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मानहानि मामले में पत्रकार रजत शर्मा को अंतरिम राहत, हाई कोर्ट ने कांग्रेस नेताओं को दिया यह निर्देश

अदालत ने कहा कि नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है, लेकिन घटना के बारे में सच्चाई को उजागर करना भी उनका कर्तव्य है। वादी को दोषी ठहराने वाले एक्स पोस्ट तथ्यों का अति सनसनीखेज चित्रण है।

मानहानि मामले में पत्रकार रजत शर्मा को अंतरिम राहत, हाई कोर्ट ने कांग्रेस नेताओं को दिया यह निर्देश
Sourabh Jainलाइव हिंदुस्तान,नई दिल्लीSat, 15 Jun 2024 03:32 PM
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दिल्ली हाई कोर्ट ने पत्रकार रजत शर्मा को उनकी मानहानि के मुकदमे में अंतरिम राहत देते हुए कांग्रेस नेताओं रागिनी नायक, पवन खेड़ा और जयराम रमेश को निर्देश दिया कि वे उन एक्स पोस्ट(ट्वीट) को हटा लें, जिनमें आरोप लगाया गया है कि रजत शर्मा ने ऑन एयर रागिनी नायक के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया था।

सुनवाई के दौरान जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने उल्लेख किया कि तीनों कांग्रेस नेताओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक संपादित वीडियो पोस्ट किया था, जबकि उन्होंने दावा किया गया था कि यह इंडिया टीवी न्यूज चैनल पर मतगणना वाले दिन हुई बहस का ‘रॉ फुटेज’ है। साथ ही कोर्ट ने यह भी माना कि रजत शर्मा को दोषी दिखाने वाली ये एक्स पोस्ट कुछ और नहीं बल्कि अति-सनसनीखेज तरीके से तथ्यों का चित्रण है, जो कि स्पष्ट रूप से झूठे हैं।

कोर्ट ने कहा कि मुकदमे का फैसला होने तक अगर सामग्री (वीडियो और एक्स पोस्ट/ट्वीट्स) को सार्वजनिक डोमेन में रहने से रोक दिया जाता है, तो प्रतिवादियों को कोई नुकसान नहीं होगा, जबकि इन ट्वीट्स से भविष्य में वादी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने की आशंका है, तथा उनकी प्रतिष्ठा को हुए नुकसान की भरपाई व्यावहारिक रूप से नहीं की जा सकेगी।

अदालत ने कहा, 'इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है, लेकिन घटना के बारे में सच्चाई को उजागर करना भी उनका कर्तव्य है। वादी को दोषी ठहराने वाले एक्स पोस्ट कुछ और नहीं बल्कि तथ्यों का अति सनसनीखेज चित्रण और स्पष्ट रूप से झूठा चित्रण है।'

जस्टिस बंसल ने यह निर्देश भी दिया कि जिन एक्स पोस्ट या ट्वीट्स को अभी तक नहीं हटाया गया है, उन्हें मध्यस्थ दिशा-निर्देशों के अनुसार सात दिनों के भीतर हटा दिया जाए। इसके अलावा अदालत ने निर्देश दिया कि जो वीडियो सार्वजनिक डोमेन में हैं, उन्हें गूगल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निजी बनाया जाए और अदालत के आदेश के बिना उन्हें सार्वजनिक डोमेन में न डाला जाए।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि कोर्ट में चलाए गए टीवी डिबेट के फुटेज से यह प्रथम दृष्टया स्पष्ट है कि रजत शर्मा ने कुछ सेकंड के लिए ही हस्तक्षेप किया था और रागिनी नायक के खिलाफ कोई अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल नहीं किया गया था।

यह विवाद उस वक्त पैदा हुआ जब कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता रागिनी नायक ने शर्मा पर 2024 के लोकसभा चुनावों की मतगणना वाले दिन यानी 4 जून को शो में बहस के दौरान राष्ट्रीय टेलीविजन पर उनके साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया था कि लाइव टेलीकास्ट के दौरान रजत शर्मा ने बुदबुदाते हुए उन्हें गाली दी थी। आरोप लगाते हुए रागिनी नायक भावुक भी हो गई थीं। इस मामले में कांग्रेस नेताओं पवन खेड़ा और जयराम रमेश ने भी रागिनी के का समर्थन किया था और उस वीडियो क्लिप को शेयर किया था, जिसमें कथित रूप से रजत शर्मा अपशब्द कहते हुए दिख रहे हैं। 

रागिनी ने इस मामले को लेकर मंगलवार को इंडिया टीवी के एडिटर-इन-चीफ पर दिल्ली के तुगलक लेन पुलिस थाने में केस फाइल कराया था। रागिनी ने शर्मा के खिलाफ सेक्शन 294 और 509 के तहत केस दर्ज कराया था। रागिनी ने मांग की थी कि रजत शर्मा को इस मामले में बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए।

हालांकि रागिनी नायक के आरोपों को इंडिया टीवी ग्रुप ने खारिज किया था। यही नहीं चैनल की ओर से नायक और कांग्रेस नेताओं पवन खेड़ा और जयराम रमेश को चेतावनी दी गई थी कि वे अपने आरोप वापस ले लें। कांग्रेस नेताओं की ओर से आरोप वापस न लिए जाने के बाद रजत शर्मा ने शुक्रवार को मानहानि का केस किया गया था। शर्मा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने दलील दी कि शो की एक क्लिप प्रसारित की जा रही थी, जिसमें एक गाली डाली गई थी, जबकि मूल फुटेज में ऐसी कोई सामग्री नहीं है।