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ऐसे तो कोई इंडिया गेट पर घर बना लेगा; HC का बुलडोजर पर रोक से इनकार

दिल्ली में अवैध निर्माण पर बुलडोजर ऐक्शन रोक से इनकार करते हुए हाई कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि अवैध निर्माण की स्थिति दिल्ली में ऐसी है कि कोई इंडिया गेट को भी खरीदकर घर बना लेगा।

ऐसे तो कोई इंडिया गेट पर घर बना लेगा; HC का बुलडोजर पर रोक से इनकार
Sudhir Jhaलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीFri, 01 Mar 2024 12:21 PM
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दिल्ली में अवैध निर्माण पर बुलडोजर ऐक्शन रोक से इनकार करते हुए हाई कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि अवैध निर्माण की स्थिति दिल्ली में ऐसी है कि कोई इंडिया गेट को भी खरीदकर वहां घर बना लेगा। एक्टिंग चीफ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मनमीत पीएस अरोड़ा ने स्पेशल टास्क फोर्स की ओर से द्वारका समेत कई इलाकों में चल रहे धस्वतीकरण कार्रवाई पर स्टे लगाने से इनकार कर दिया। 

बिल्डर्स और प्रभावित संपत्ति मालिकों ने अलग-अलग याचिका दायर करते हुए तुरंत कार्रवाई रोकने का आदेश देने की गुजारिश की थी। छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं का हवाला देते हुए बीएसईएस से बिजली आपूर्ति बहाल कराने की भी मांग की गई थी। हालांकि, बेच ने सहमत नहीं हुआ और ऐसे दस्तावेजी सबूतों की मांग की जो साबित करें कि निर्माण वैध है।    

कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, 'यह सच में गजब है कि लोग पहले कानून तोड़ते हैं और फिर कोर्ट चले आते हैं। आप साफ हाथ के साथ नहीं बल्कि सने हुए हाथ लेकर आए हैं। स्थिति ऐसी है कि कोई इंडिया गेट को खरीद सकता है और वहां घर बना लेगा। आज पूरा शहर रहने लायक नहीं बचा।' जब बिल्डर्स की तरफ से वकील ने कोर्ट से हस्तक्षेप करते हुए ध्वस्तीकरण पर रोक लगाने की मांग की तो अदालत ने कहा, 'मगरमच्छ के आंसू मत बहाओ। आपने पैसे लिए और चले गए। जो आपने किया है वह बहुत गलत है। हमें सेंक्शन प्लान दिखाए, कुछ ऐसा दिखाइए जिसके आधार पर हम कार्रवाई रोक सकें।'

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ऐसे खरीदारों की मुश्किलों को भी माना जो ऐसी जमीनों को खरीदते हैं और उस पर निर्माण करते हैं फिर ध्वस्तीकरण का सामना करना पड़ता है। हालांकि, कोर्ट ने संकेत दिया कि इसमें अधिक कुछ नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा, 'चाहे चिटफंड हो या ऐसे कोलोनाइजर्स, वे खासतौर पर छोटे उपभोक्ताओं को निशाना बनाते हैं, ताकि वे इन बड़े खिलाड़ियों को चुनौती ना दे सकें।' कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को एमसीडी के अपीलीय न्यायाधिकरण के पास जाने को कहा। 

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