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दिल्ली में संपन्न अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों को झटका, नियमित करने के अनुरोध वाली PIL हाईकोर्ट ने की खारिज

नई दिल्ली। भाषाPraveen Sharma
Tue, 26 Oct 2021 06:33 PM
दिल्ली में संपन्न अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों को झटका, नियमित करने के अनुरोध वाली PIL हाईकोर्ट ने की खारिज

दिल्ली हाईकोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने का अनुरोध किया गया था जिन्हें प्राधिकारियों ने छोड़ दिया था। इसके साथ ही अदालत ने कहा कि नियमितीकरण वाली ऐसी कॉलोनियां गरीबों और वंचित तबकों के लिए है न कि अमीर वर्ग के लिए।

चीफ जस्टिस डी.एन. पटेल और जस्टिस ज्योति सिंह की बेंच ने सोमवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि ये याचिका संपन्न अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों के इशारे पर दायर की गई लगती है। बेंच ने सवाल किया कि क्या संपत्ति के धनी मालिक अशिक्षित, गरीब या वंचित वर्ग से हैं, क्योंकि उन्होंने यहां सैनिक फार्म, महेंद्रू एंक्लेव और अनंत राम डेयरी कॉलोनी जैसी अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने का अनुरोध किया है।

बेंच ने एक वकील द्वारा दायर जनहित याचिका खारिज करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि यह संपन्न अनधिकृत कॉलोनी के मकान मालिकों के इशारे पर प्रेरित मुकदमा है। बेंच ने कहा कि छूट गई अनधिकृत कॉलोनियों के निवासी जब भी अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे, नियम और कानून के अनुसार कोई फैसला किया जाएगा।

बेंच ने अनधिकृत कॉलोनियों को कानूनी या नियमित कॉलोनियों में बदलने के अनुरोध वाली याचिका को खारिज करते हुए यह आदेश पारित किया। 

केंद्र की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी ने दलील दी कि अनधिकृत कॉलोनियों में समाज के निम्न आय समूहों के मुद्दों को व्यापक रूप से हल करने के मकसद से नियम और कानून बनाए गए हैं। 

''इन विनियमों और अधिनियमन का प्राथमिक उद्देश्य समाज के निम्न आय वर्ग को राहत देना है, जो अनधिकृत कॉलोनियों के अधिकांश निवासी हैं, न कि समाज के समृद्ध वर्ग। केंद्र ने वकील निधि बंगा के माध्यम से दायर अपने हलफनामे में कहा, कानून समाज की जरूरतों और जरूरतों के अनुसार वर्गों को बना और अलग कर सकता है।''

इसमें कहा गया है कि अनधिकृत समृद्ध कॉलोनियों में रहने वाले लोग अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले निम्न आय वर्ग के लोगों के साथ समानता की तलाश नहीं कर सकते।

याचिकाकर्ता वकील ने कहा कि प्राधिकरणों ने जानबूझकर संपन्न लोगों द्वारा बनाई गई अनधिकृत कॉलोनियों के लोगों को बाहर रखा है। याचिका में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को केंद्र द्वारा प्रकाशित एक गजट के मद्देनजर अपने पोर्टल पर 1,731 के बजाय सभी 1,797 अनधिकृत कॉलोनियों के नियमितीकरण के लिए पंजीकरण स्वीकार करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

याचिका में कहा गया था कि प्राधिकरणों ने 1,797 अनधिकृत कॉलोनियों की सूची में से 66 अनधिकृत कॉलोनियों की सूची इस आधार पर बनाई है कि इन 66 कॉलोनियों के निवासी "संपन्न" लोग हैं। 

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