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हाईकोर्ट का JNU को निर्देश, दृष्टिबाधित छात्र को मुहैया कराएं हॉस्टल, क्या था मामला?

जेएनयू में 100 प्रतिशन दृष्टिबाधित स्नातकोत्तर छात्र के छात्रावास आवास के अधिकार को बरकरार रखते हुए, दिल्ली हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय को एक हफ्ते के भीतर आदेश का अनुपालन करने का निर्देश दिया है।

हाईकोर्ट का JNU को निर्देश, दृष्टिबाधित छात्र को मुहैया कराएं हॉस्टल, क्या था मामला?
Krishna Singhभाषा,नई दिल्लीTue, 27 Feb 2024 12:27 AM
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दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) प्रशासन को निर्देश दिया है कि वह वह छात्रावास से निकाले गए एक दृष्टिबाधित छात्र को पीजी की डिग्री पूरी होने तक नि:शुल्क छात्रावास आवास उपलब्ध कराए। जस्टिस सी. हरिशंकर ने जेएनयू को एक हफ्ते के भीतर छात्र को सभी सुविधाएं प्रदान करने का निर्देश दिया। अदालत ने अपने आदेश दिया कि दिव्यांग छात्र को वे सभी जरूरी अधिकार प्रदान किया जाए जिसका वह हकदार है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने संजीव कुमार मिश्रा (49) की याचिका को मंजूर कर लिया। इसमें उन्होंने इस आधार पर छात्रावास से निष्कासन को चुनौती दी थी कि लागू नियम दूसरे स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में पढ़ने वाले छात्र को छात्रावास में रहने की अनुमति नहीं देते हैं। अदालत ने कहा कि दुखद है कि जेएनयू प्रशासन इस तथ्य पर भरोसा करके अपने मामले का बचाव करना चाहता है कि शत-प्रतिशत दृष्टिबाधित याचिकाकर्ता ने जेएनयू परिसर से 21 किलोमीटर दूर एक आवासीय पता प्रदान किया है।

अदालत ने अपने आदेश में साफ कहा कि जेएनयू में जो दिव्यांग है, उसे रहने की जगह मिलती है। एक छात्र जो जेएनयू में दूसरा मास्टर डिग्री कोर्स कर रहा है और पहले ही एक कोर्स पूरा कर चुका है, वह हॉस्टल पाने का उतना ही हकदार है जितना वह छात्र जो पहली बार जेएनयू में शामिल हो रहा है। एक की जरूरतों को दूसरे की जरूरतों की वेदी पर बलिदान नहीं किया जा सकता है। जेएनयू जिस तरह छात्रों के बीच अंतर करना चाहता है, उसका कोई कानूनी आधार नहीं है क्योंकि दोनों छात्र हैं।

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