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सीवर में मौतों के मामले में दिल्ली सरकार को प्रभावित परिवारों को ₹20 लाख देने के निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल सरकार से कहा है कि वह सीवर सफाई में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिवारों को अतिरिक्त 20 लाख रुपये का भुगतान करे। अदालत ने क्या बातें कही जानने के लिए पढ़ें यह रिपोर्ट...

सीवर में मौतों के मामले में दिल्ली सरकार को प्रभावित परिवारों को ₹20 लाख देने के निर्देश
Krishna Singhहिन्दुस्तान,नई दिल्लीTue, 06 Feb 2024 09:48 PM
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दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल सरकार से कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप सीवर लाइन में सफाई के काम में अपनी जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिवारों को अतिरिक्त 20 लाख रुपये का भुगतान करने का प्रयास करे। अदालत ने कहा कि यह स्थापित है कि जब कोई व्यक्ति अदालत में जाता है और अपने पक्ष में कानून की घोषणा प्राप्त करता है, तो यह उम्मीद की जाती है कि राज्य उन व्यक्तियों को अदालत में जाने के लिए मजबूर किए बिना सभी समान स्थिति वाले व्यक्तियों को समान लाभ प्रदान करेगा। 

पीठ ने कहा कि अदालत उम्मीद करती है कि राज्य मैला ढोने में अपनी जान गंवाने वाले व्यक्तियों के परिवार के सदस्यों को रिट याचिका दायर करके इस अदालत में जाने के लिए मजबूर करने के बजाय समान रूप से रखे गए सभी व्यक्तियों को 20 लाख रुपये की शेष राशि का भुगतान करने का प्रयास करेगा। उच्च न्यायालय ने कई विधवाओं की याचिका को अनुमति दे दी है। 

पीड़ित परिवारों ने दिल्ली सरकार को उच्चतम न्यायालय के 2023 के फैसले के अनुसार 20 लाख रुपये अतिरिक्त मुआवजा देने का निर्देश देने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया कि दिल्ली सरकार ने अपनी नीति के तहत याचिकाकर्ताओं समेत जिन लोगों की इस बीच मौत हुई है, उनके परिवार को 10 लाख रुपये दिए हैं। 

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि सीवर में होने वाली मौतों के मामलों में मुआवजा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 30 लाख रुपये किया जाना चाहिए। सीवर संचालन से उत्पन्न होने वाली स्थायी विकलांगता के मामलों में मुआवजे की राशि को बढ़ाकर 20 लाख रुपये और अन्य प्रकार की विकलांगता के लिए 10 लाख रुपये से कम नहीं करने का निर्देश दिया था। 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यदि किसी पीड़ित के आश्रितों को इतनी राशि (30 लाख रुपये) का भुगतान नहीं किया गया है, तो उपरोक्त राशि उन्हें देय होगी। उच्च न्यायालय ने कहा कि इस मामले में याचिकाकर्ताओं की स्थिति समान है और उन्हें उच्चतम न्यायालय के फैसले के अनुसार अतिरिक्त 20 लाख रुपये का समान लाभ दिया जाना चाहिए।

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