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दिल्ली में कितने बुजुर्ग? सर्वे की मांग पर हाईकोर्ट ने केजरीवाल सरकार को दी डेडलाइन

दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका के जरिए राष्ट्रीय राजधानी में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या का पता लगाने के लिए सर्वेक्षण करने की मांग की गई है। जानें इस मसले पर हाईकोर्ट ने केजरीवाल सरकार से क्या कहा...

दिल्ली में कितने बुजुर्ग? सर्वे की मांग पर हाईकोर्ट ने केजरीवाल सरकार को दी डेडलाइन
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Krishna Singhपीटीआई,नई दिल्लीWed, 05 Jun 2024 05:32 PM
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दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने दिल्ली के मुख्य सचिव से राष्ट्रीय राजधानी में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या का पता लगाने के लिए घर-घर जाकर सर्वेक्षण करने और हर जिले में बुजुर्गों के लिए घर बनाने के निर्देश देने की मांग वाली एक याचिका पर निर्णय लेने को कहा है। अदालत ने कहा कि याचिका को एक अभ्यावेदन के रूप में माना जाए। अदालत ने कहा कि मांग पर 12 हफ्ते के भीतर निर्णय ले लिया जाना चाहिए।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति मनमीत पीएस अरोड़ा की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि यह अदालत वर्तमान रिट याचिका को एक अभ्यावेदन के रूप में मानने का निर्देश देती है। दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को निर्देश दिया जाता है कि वह इसे प्रतिनिधि के तौर पर कानून के अनुसार 12 हफ्ते के भीतर निर्णय लें। 

अदालत ने सलेक चंद जैन की ओर से दाखिल याचिका का निपटारा करते हुए उक्त आदेश दिया। सलेक चंद जैन ने वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ हो रहे अपराधों का अलग से डेटा बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस को निर्देश देने की मांग की थी। याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता दिनेश पी. राजभर ने बताया कि मौजूदा वक्त में दिल्ली में केवल दो सरकारी या सहायता प्राप्त वृद्धाश्रम हैं।

याचिकाकर्ता ने कहा कि एक वृद्धाश्रम बिंदापुर में है। इसे दिल्ली सरकार निजी-सार्वजनिक भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर चला रही है। दूसरा वृद्धाश्रम लामपुर में है जिसे दिल्ली सरकार फंड देती है। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि एक अन्य वृद्धाश्रम दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) द्वारा चलाया जाता है।

याचिकाकर्ता के वकील ने अपनी दलीलों में कहा कि वरिष्ठ नागरिकों की उपेक्षा की जाती है। उनके साथ भेदभाव किया जाता है। ऐसे में उनको विशेष देखभाल, प्यार और स्नेह की जरूरत है। याचिकाकर्ता ने कहा कि मैंने अधिकारियों को कई बार इस मसले से अवगत कराया, लेकिन उन्होंने कोई निर्णय नहीं लिया, जिसके कारण उसे अदालत का रुख करना पड़ रहा है।