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59 फीसदी बच्चों को नहीं मिली किताबें, हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को लगाई फटकार, क्या कहा?

सरकारी स्कूलों में किताबों का वितरण पूरा नहीं किए जाने को लेकर हाईकोर्ट (Delhi High Court ) ने दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि यह ठीक नहीं है। क्या है पूरा मामला...

59 फीसदी बच्चों को नहीं मिली किताबें, हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को लगाई फटकार, क्या कहा?
Krishna Singhलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीThu, 16 May 2024 12:38 AM
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दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने स्कूली बच्चों को 15 मई तक किताबें नहीं उपलब्ध करा पाने पर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने बुधवार को चेतावनी दी कि वह सरकारी स्कूलों के छात्रों को किताबों की आपूर्ति करने में दिल्ली सरकार की विफलता के लिए शिक्षा विभाग के उप निदेशक को अवमानना का नोटिस जारी करेगा। 15 मई को राज्य सरकार की ओर से दाखिल रिपोर्ट के अनुसार, अभी तक 59 फीसदी स्कूलों में किताबें नहीं पहुंच पाई हैं।

अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य सरकार ने 2 मई को अपने हलफनामे में कहा था कि गर्मी की छुट्टियां शुरू होने से पहले 10 मई तक छात्रों को किताबें बांट दी जाएंगी, जबकि 15 मई को दाखिल रिपोर्ट में उसने कहा है कि यह काम अब जुलाई तक पूरा होगा। इस पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने कहा कि सरकार का समय सीमा देना और फिर डेडलाइन का अनुपालन नहीं करना अच्छी बात नहीं है। 

दिल्ली सरकार के स्थायी वकील संतोष कुमार त्रिपाठी द्वारा यह आश्वासन दिए जाने के बाद कि जुलाई में गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूल फिर से खुलेंगे, छात्रों को उनकी किताबें मिल जाएंगी। इसके बाद अदालत ने नोटिस जारी नहीं किया। कोर्ट ने मामले को जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया। वहीं सरकार का कहना है कि पाठ्यपुस्तकों की आपूर्ति में देरी के लिए पाठ्यक्रम में हुआ बदलाव भी है। पीठ सोशल ज्यूरिस्ट नामक संगठन की ओर से दाखिल दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई कर रही थी।

याचिका में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने दलीलें रखी। 15 मई, 2024 को दाखिल रिपोर्ट के मुताबिक, 7,073 स्कूलों में से 4,215 स्कूलों (59.5%) को किताबों की आपूर्ति की जानी बाकी है। रिपोर्ट से यह भी पता चला है कि सरकारी स्कूलों में पाठ्यपुस्तकों की कुल मांग लगभग 1.08 करोड़ है लेकिन केवल 23.25 लाख किताबें (21.34%) ही आपूर्ति की गई हैं।