PMO अधिकारी बताकर किया मंदिर में VIP दर्शन, कोर्ट ने शख्स पर लगाया इतना जुर्माना
केशवन और प्रमोद कुमार सिंह ने पांडिचेरी और आंध्र प्रदेश के तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम बोर्ड में तैनात कई सरकारी अधिकारियों को फोन किया था। इसमें सिंह ने खुद को पीएमओ के प्रधान सचिव बताया

खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में काम करने वाला एक अधिकारी मंदिर दर्शन, सरकारी आवास और कारों जैसी सुविधाएं मांगने वाले शख्ख पर दिल्ली हाई कोर्ट ने जुर्माना लगाया है। दिल्ली कोर्ट ने विवेक केशवन नाम के एक व्यक्ति पर ₹35,000 का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने आरोपी की याचिका पर सुनावाई करते हुए यह फैसला सुनाया। जस्टिस नवीन चावला ने आईपीसी की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश) के साथ धारा 419 (वेश बदलकर धोखाधड़ी) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत अपराध के लिए आरोप तय करने के निचली अदालत के आदेश के खिलाफ केशवन की याचिका पर सुनवाई करते हुए उन पर जुर्माना लगाया।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, 'याचिकाकर्ता को 35,000 रुपये दो हफ्ते के भीतर दिल्ली राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण के पास जमा करना होगा। जमा की गई राशि का उपयोग दिल्ली राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण द्वारा ऐसी सहायता की आवश्यकता वाले POCSO पीड़ितों को परामर्श/मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करने के लिए किया जाएगा।'
आरोपों के मुताबिक, केशवन और प्रमोद कुमार सिंह ने पांडिचेरी और आंध्र प्रदेश के तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम बोर्ड में तैनात कई सरकारी अधिकारियों को फोन किया था। इसमें सिंह ने खुद को प्रधान मंत्री कार्यालय के प्रधान सचिव बताया और सरकारी वाहनों के साथ-साथ आवास और दर्शन सुविधाओं की भी मांग की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विवेक के (केशवन) इन जगहों का दौरा करेंगे और उनके लिए भी सुविधाओं की आवश्यकता है।
मामला जब सामने आया तो सीबीआई के आरोप पर केशवन ने कोर्ट को बताया कि इन घोटाले में उनकी कोई भूमिका नहीं थी क्योंकि उनके नाम और नंबर का इस्तेमाल सिंह ने सरकार से विभिन्न सुविधाएं प्राप्त करने के लिए किया था। मैंने कभी भी किसी को फोन करके ये सुविधाएं नहीं मांगीं। इससे मुझे कोई फायदा नहीं मिला है।'
जबकि सीबीआई ने सुनवाई के दौरान दलील दी कि आरोप साफ है और इस बात के सबूत भी हैं कि सरकारी अधिकारियों ने याचिकाकर्ता (केशवन) के फोन नंबर पर फोन करके यह पुष्टि की कि क्या वह पांडिचेरी का दौरा कर रहे हैं, और उनके द्वार ली जाने वाली सेवाओं के बारे में भी पूछा था। पांडिचेरी में केशवन को एक गाड़ी भी दी गई थी, यहां तक कि उनके ठहरने की व्यवस्था पांडिचेरी के सरकारी होटल में की गई थी।'
कोर्ट ने इस मामले में बताया की आरोप तय करने का मामला बनता है। जज चावला ने याचिकाकर्ता को भी कोर्ट में लताड़ लगाई और कहा कि वकील का दलील है कि सह-अभियुक्त ने याचिकाकर्ता के नाम और मोबाइल फोन नंबर का दुरुपयोग किया है, इसलिए केसवन पर केस नहीं चलाया जा सकता है। जबकि सीबीआई ने आरोप लगाया है कि कुछ अधिकारियों ने केशवन के मोबाइल नंबर पर वापस कॉल किया था। याचिकाकर्ता ने इस बात पर तो विरोध नहीं किया था।' इसके बाद जज चावला ने केशवन की अपील खारिज कर दी।


