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राहत:दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण आधा, बारिश से मदद की उम्मीद

Air pollution

दिल्ली-एनसीआर प्रदूषण के आपात स्तर से बाहर आ गया है। बीते सात नवंबर के मुकाबले मंगलवार को हवा की गुणवत्ता में आधे से ज्यादा सुधार हुआ। मौसम विभाग के मुताबिक बुधवार को बारिश के कारण प्रदूषण से राहत और बढ़ेगी। सफर के अनुसार सात नवंबर को दिल्ली की हवा में पीएम 2.5 का स्तर 640 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था। मंगलवार को घट कर 236 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच गया। हालांकि यह समान्य स्तर (60 माइक्रोग्राम) से अभी भी कई गुना है।

बारिश से मदद  
मौसम वैज्ञानिक समरजीत चौधरी के अनुसार पाकिस्तान , पंजाब व राजस्थान के कुछ इलाकों में अच्छी बारिश हुई है। इसके चलते यहां फसलों के अवशेष जलाने से पैदा हुए धुएं में कमी आई है। वहीं हवा के रुख में बदलाव से भी प्रदूषण के स्तर में कमी आयी है। पहले उत्तर पश्चिमी हवाएं फसलों को जलाने से निकले धुएं को दिल्ली में ला कर एकत्र कर रहीं थी। वहीं अब हवाएं दक्षिण पूर्व से आ रही हैं।  

दिल्ली सरकार ने NGT में फिर दायर की पुनर्विचार याचिका

दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में दमघोंटू प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ऑड-ईवन योजना पर लगायी गयी शर्तों पर पुनर्विचार का अनुरोध करते हुए राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) के समक्ष मंगलवार को नयी याचिका दायर की। याचिका में न्यायाधिकरण से दोपहिया और महिला चालकों को ऑड-ईवन योजना के तहत एक वर्ष के लिए या 2000 बसों का इंतजाम होने तक छूट देने का अनुरोध किया गया है। नयी याचिका में एनजीटी से यह भी आग्रह किया गया है कि पड़ोसी राज्यों को उनके यहां ऑड-ईवन योजना लागू करने का निर्देश दिया जाये। 
        
इससे पहले दिल्ली सरकार ने पुनर्विचार याचिका वापस ले ली थी
इससे पहले दिल्ली सरकार ने ऑड-ईवन योजना शर्तों के साथ लागू करने के एनजीटी के आदेश के खिलाफ सोमवार को दायर की गयी पुनर्विचार याचिका वापस ले ली थी। उस पर सुनवाई के दौरान न्यायाधिकरण ने दिल्ली सरकार को एक बार फिर फटकार लगाते हुए कई सवाल पूछे। 

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एनजीटी ने शनिवार को ऑड-ईवन योजना को अनुमति देते हुए दोपहिया वाहनों, महिलाओं और सरकारी कर्मचारियों को भी छूट नहीं देने का आदेश दिया था। सरकार 13 नवम्बर से पांच दिन के लिए ऑड-ईवन योजना लागू करना चाहती थी लेकिन न्यायाधिकरण द्वारा लगायी गयी शर्तों को देखते हुए उसने इसे फिलहाल टाल दिया था। दिल्ली सरकार का कहना था कि महिलाओं की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें छूट दी जानी चाहिए। न्यायाधिकरण ने पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए उससे सवाल किया कि वह योजना के दौरान महिलाओं के लिए अलग से बस क्यों नहीं चला सकती।

न्यायाधिकरण ने दोपहिया वाहनों के संबंध में दिल्ली सरकार से पूछा कि जब अध्ययनों के अनुसार चार पहिया वाहनों की तुलना में दोपहिया वाहन अधिक प्रदूषण फैलाते हैं तो सरकार मनमाने ढंग से इन्हें छूट देने पर क्यों आमादा है। यह मजाक नहीं तो और क्या है? इससे क्या फायदा होने वाला है।

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न्यायाधिकरण ने सुझाव दिया कि ऑड-ईवन योजना पर छूट के लिए वह उसके समक्ष दोबारा तभी आये जब उसके पास तार्किक तथ्य हों। उसने कहा कि बच्चों को संक्रमित फेफड़ों का उपहार न दें। स्कूल जाते समय बच्चों को मास्क पहनने पड़ते हैं।
        
एनजीटी ने पूछा कि हालात बिगड़ने से पहले ही इससे निपटने के लिए उसके पास क्या उपाय हैं। सरकार को ऐसे कदम उठाने चाहिए कि पीएम-2.5 और पीएम-1० का स्तर जब 48 घंटे के दौरान खतरनाक स्तर से ऊपर निकल जाये तो इसे रोकने के उपाय स्वत: लागू हो जाएं।
         
न्यायाधिकरण ने दिल्ली सरकार के छूट के अनुरोध पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा,' सरकार छूट मांगने की बजाय सकारात्मक कदम क्यों नहीं उठाती। पिछली बार सरकार ने कहा था कि वह चार हजार बसें खरीद रहीं है,
इसका क्या हुआ?
         
दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण का मामला उच्चतम न्यायालय तक पहुंच चुका है। न्यायालय ने सोमवार को इस पर सुनवाई करते हुए केन्द्र, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब सरकार समेत दिल्ली के तीनों निगमों को नोटिस जारी कर प्रदूषण से निपटने के उपाय बताने को कहा।         

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  • Web Title:Delhi Govt files fresh review petition before NGT in connection with Odd Even policy
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