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युद्ध के लिए रूस में भारतीयों की तस्करी, आरोपी को जमानत से इनकार, क्या बोली अदालत?

दिल्ली की एक अदालत ने उस व्यक्ति को जमानत देने से इनकार कर दिया है, जो युक्रेन से लड़ने के लिए भारतीय नागरिकों की तस्करी रूस में कर रहा था। जानें अदालत ने अपने फैसले में क्या कहा?

युद्ध के लिए रूस में भारतीयों की तस्करी, आरोपी को जमानत से इनकार, क्या बोली अदालत?
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Krishna Singhभाषा,नई दिल्लीMon, 17 Jun 2024 10:45 PM
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दिल्ली की एक अदालत ने उस व्यक्ति को जमानत देने से इनकार कर दिया है, जिस पर भारतीय नागरिकों की तस्करी रूस में करने का आरोप है। आरोपी नागरिकों की तस्करी इसलिए करता था ताकि उन्हें यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में मोर्चे पर उनकी मर्जी के बगैर तैनात किया जा सके। तस्करी किए गए कुछ भारतीय गंभीर रूप से घायल भी हो गए। अदालत ने जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि उसके खिलाफ आरोप गंभीर हैं। आरोपी सबूत नष्ट करने की कोशिश कर सकता है।

विशेष न्यायाधीश अतुल कृष्ण अग्रवाल ने मुंबई निवासी माइकल एलंगोवन एंथनी को राहत देने से इनकार कर दिया। आरोपी ने कोर्ट में खुद को निर्दोष बताया था। न्यायाधीश ने सात जून को सुनाए गए आदेश में कहा कि आरोपी के खिलाफ आरोप गंभीर और संगीन प्रकृति के हैं। इस स्तर पर याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा करने से मामले की आगे की जांच में बाधा आएगी। यह भी संभावना है कि वह उन सबूतों को नष्ट करने की कोशिश कर सकता है। 

खासकर उन सबूतों को जो अभी तक आईओ (जांच अधिकारी) द्वारा प्राप्त नहीं किए गए हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता अन्य आरोपियों की कानून की प्रक्रिया से बचने में मदद भी कर सकता है। आरोपी ने यह दावा करते हुए जमानत का अनुरोध किया था कि वह स्वयं इस गिरोह का शिकार है और उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है। एंथनी को 26 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था। वह 26 अप्रैल से ही हिरासत में है।

सीबीआई के अनुसार, आरोपी और उसके कथित साथियों ने पैसे के बदले भारतीय नागरिकों को रूसी सेना में सुरक्षा गार्ड, सहायक और इसी तरह की नौकरी दिलाने के बहाने उनकी रूस में तस्करी की। यही नहीं तस्करी के लिए आरोपियों से रूसी सेना में शामिल होने के लिए अनुबंध पर हस्ताक्षर तक कराए गए। यही नहीं भारतीय नागरिकों को बाकायदा ट्रेनिंग दी गई। उन्हें रूसी सेना की वर्दी और बैज तक प्रदान किए गए।

सीबीआई का आरोप है कि भारतीय नागरिकों को उनकी मर्जी के खिलाफ युद्ध क्षेत्रों में तैनात किया गया। इसमें से कुछ गंभीर रूप से घायल भी हो गए। आरोपियों ने भारतीय छात्रों को भी रूस में निजी विश्वविद्यालयों में प्रवेश दिलाने का वादा करके ठगा था। आरोपियों ने मुफ्त में छूट वाले वीजा विस्तार, फीस ढांचा आदि की पेशकश की और उनको अधिकारियों की दया पर छोड़ दिया। इतना ही नहीं पीड़ितों के पासपोर्ट रूस पहुंचने पर एजेंट द्वारा जब्त कर लिए गए थे।