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Hindi News NCR'मजबूत नेता-एजेंसियां उन्हीं को काटने वापस आती हैं, जिनकी रक्षा की वे कसम खाते हैं', ED पर कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

'मजबूत नेता-एजेंसियां उन्हीं को काटने वापस आती हैं, जिनकी रक्षा की वे कसम खाते हैं', ED पर कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

दिल्ली में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा, 'नागरिकों के पास अधिकार हैं, जबकि राज्य के कुछ कर्तव्य हैं। इस मौलिक संबंध को एक अधिनायकवादी तर्क को लागू करने के लिए उल्टा नहीं किया जा सकता है।

'मजबूत नेता-एजेंसियां उन्हीं को काटने वापस आती हैं, जिनकी रक्षा की वे कसम खाते हैं', ED पर कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
Sourabh Jainहिन्दुस्तान टाइम्स,नई दिल्लीWed, 01 May 2024 04:39 PM
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दिल्ली की एक अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक आरोपी का इलाज करने वाले डॉक्टरों के बयान दर्ज करने के लिए कड़े PMLA कानून का उपयोग करने पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की खिंचाई की है। कार्यवाही के दौरान कोर्ट ने कहा, 'इतिहास यही सिखाता है कि मजबूत नेता, कानून और एजेंसियां ​​आमतौर पर उन्हीं नागरिकों को काटने के लिए वापस आती हैं, जिनकी रक्षा करने की कसम वे खाते हैं।'

स्पेशल जज विशाल गोगने ने 30 अप्रैल को पारित आदेश में कहा कि ईडी कानून से बंधी हुई है और इस कानून के तहत उन नागरिकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं कर सकती जो कि संदिग्ध भी नहीं हैं। अदालत ने केंद्रीय जांच एजेंसी को फटकार लगाते हुए कहा कि धारा 50 के तहत प्रावधान का इस्तेमाल सबूतों के संग्रह या कार्यवाही से असंबंधित उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकता है। कार्यवाही के दौरान अदालत ने कहा कि न केवल अस्पतालों को पत्र भेजकर बल्कि धारा 50 PMLA के तहत निजी अस्पतालों में डॉक्टरों की जांच करके ईडी अदालत से भी आगे निकल गई।

अदालत ने ईडी को ये फटकार 'जमीन के बदले नौकरी' घोटाले से जुड़े मामले में आरोपी और RJD (राष्ट्रीय जनता दल) प्रमुख लालू प्रसाद के करीबी सहयोगी अमित कात्याल द्वारा दायर एक आवेदन पर सुनवाई के दौरान लगाई, जिसमें उन्होंने अपनी अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाए जाने की मांग की थी। हालांकि कोर्ट ने अंतरिम जमानत बढ़ाने की उनकी मांग को भी नहीं माना।

अदालत ने अपने आदेश में आगे कहा, 'अगर इतिहास से कोई सबक सीखना है, तो यह देखा जाएगा कि मजबूत नेता, कानून और एजेंसियां आमतौर पर उन्हीं नागरिकों को काटने के लिए वापस आती हैं जिनकी रक्षा करने की वे कसम खाते हैं... ईडी द्वारा निजी अस्पतालों के कानून का पालन करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ धारा 50 का उपयोग इसी धारणा को बढ़ाने का एक ताजा उदाहरण है। सख्त कानूनों के इच्छित उद्देश्य की इस तरह की अनदेखी से जांच एजेंसियों को बचना चाहिए और अदालतों द्वारा सचेत रूप से निगरानी करनी चाहिए।' 

अदालत में कात्याल का पक्ष रख रहे सीनियर एडवोकेट विकास पाहवा ने दलील दी कि यह न केवल PMLA कानून के अंतर्गत दी गई अनुमतियों का उल्लंघन है, बल्कि मेडिकल ट्रीटमेंट की गोपनीयता में भी दखलअंदाजी है, जो कि आरोपी का मौलिक अधिकार है। उन्होंने आगे कहा कि ईडी की कार्रवाई के चलते एक अस्पताल जहां पर वे परामर्श ले रहे थे, वहां के डॉक्टर आरोपी का इलाज करने में संकोच कर रहे हैं। 

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, 'आरोपी अमित कात्याल के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के साथ डॉक्टरों की सांठगांठ के रत्ती भर भी आरोप के बगैर एक सामान्य नागरिक को धारा 50 की कठोर प्रक्रिया के अधीन करने को लेकर ईडी के पास कोई औचित्य नहीं था।'

इसके बाद अदालत ने दो सरकारी अस्पतालों, RML अस्पताल और DDU अस्पताल के साथ कात्याल के मेडिकल रिकॉर्ड साझा करने के अलावा कात्याल के पिछले उपचार को निजी अस्पतालों अपोलो अस्पताल और मेदांता अस्पताल द्वारा सत्यापित कराने को लेकर ईडी को कड़ी फटकार लगाई। विशेष न्यायाधीश गोगने ने कहा, 'ईडी ने जांच करने वाले डॉक्टरों के सामने न तो आरोपी की उपस्थिति की मांग की, न उसकी सहमति मांगी और न ही अदालत से अनुमति मांगी। पहली चूक संभवतः आरोपी की निजता के अधिकार पर आघात करती है, जबकि दूसरी चूक अदालत तक पहुंचने का एक उदाहरण है।'

कोर्ट ने आगे कहा कि अगर अदालत के निर्देश पर कात्याल के मेडिकल रिकॉर्ड का सत्यापन किया गया होता तो ईडी की कार्रवाई अधिक उचित रूप से संरक्षित होती।

अदालत ने अपने आदेश में आगे कहा, 'अगर इतिहास से कोई सबक सीखना है, तो यह देखा जाएगा कि 'मजबूत' नेता, कानून और एजेंसियां आमतौर पर उन्हीं नागरिकों को काटने के लिए वापस आती हैं जिनकी वे रक्षा करने की कसम खाते हैं... ईडी द्वारा निजी अस्पतालों के कानून का पालन करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ धारा 50 का उपयोग इसी धारणा को बढ़ाने का एक ताजा उदाहरण है। सख्त कानूनों के इच्छित उद्देश्य की इस तरह की अनदेखी से जांच एजेंसियों को बचना चाहिए और अदालतों द्वारा सचेत रूप से निगरानी करनी चाहिए।' 

अदालत ने कात्याल की अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाने की याचिका खारिज करते हुए कहा कि उनका स्वास्थ्य ठीक हो रहा है। साथ ही कोर्ट ने उन्हें बुधवार को केंद्रीय जेल अधीक्षक के सामने आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।

अमित कात्याल को अदालत ने 5 फरवरी, 2024 को चिकित्सा आधार पर चार सप्ताह की अवधि के लिए अंतरिम जमानत दी थी। इससे पहले ईडी ने कात्याल को 11 नवंबर, 2023 को धन शोधन रोकथाम अधिनियम (PMLA) के विभिन्न प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया था। केंद्रीय एजेंसी ने आरोप लगाया कि कात्याल ने राजद प्रमुख एवं पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद की ओर से नौकरी के इच्छुक कई अभ्यर्थियों से जमीन हासिल की थी।

ईडी ने दावा किया है कि कात्याल एके इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी के निदेशक थे, जिसने अभ्यर्थियों से लालू प्रसाद की ओर से जमीन हासिल की थी। इस मामले में राजद प्रमुख प्रसाद के परिवार के कुछ अन्य सदस्य भी आरोपी हैं।