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रेप के आरोप से मुकर गई नाबालिग, कोर्ट ने फिर भी शख्स को दोषी ठहराया, कही महत्वपूर्ण बात

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा, अभियोजन पक्ष ने बिना किसी शक के साबित कर दिया है कि आरोपी ने नाबालिग पीड़िता के साथ शारीरिक संबंध बनाए थे और इसलिए आरोपी को दोषी ठहराया जाता है।

रेप के आरोप से मुकर गई नाबालिग, कोर्ट ने फिर भी शख्स को दोषी ठहराया, कही महत्वपूर्ण बात
Sourabh Jainभाषा,नई दिल्लीThu, 16 May 2024 10:02 PM
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दिल्ली की एक अदालत ने रेप के मामले में एक असाधारण फैसला सुनाते हुए 12 वर्षीय लड़की के साथ बलात्कार करने वाले एक व्यक्ति को दोषी ठहराया है, जबकि पीड़िता अपने बयान से मुकर गई थी। अदालत ने कहा कि DNA और FSL नतीजों जैसे निर्णायक सबूत के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया जाता है। 

रेप की यह वारदात लगभग 10 साल पहले अक्टूबर 2014 में हुई थी। नाबालिग लड़की से हुए बलात्कार के इस मामले की सुनवाई कर रहे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमित सहरावत ने कहा, 'पीड़िता हालांकि इस तथ्य से मुकर गई कि आरोपी ने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाये थे, लेकिन DNA और फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) के नतीजों से सच्चाई सामने आ गई है, जो कि एक निर्णायक सबूत है।'

अदालत ने सोमवार को पारित अपने आदेश में कहा कि पीड़िता ने डॉक्टर, पुलिस और मजिस्ट्रेट को दिए अपने बयानों में कहा था कि आरोपी ने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए थे। हालांकि अदालत के सामने दिए अपने चौथे बयान में वह मुकर गई थी और अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं किया।

जज ने कहा कि अदालत का कर्तव्य सच्चाई का पता लगाना है और आरोपी व्यक्तियों को न्यायपालिका का मजाक उड़ाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि  DNA और FSL रिपोर्ट के आधार पर निर्णायक रूप से यह कहा जा सकता है कि आरोपी ने पीड़िता के साथ शारीरिक संबंध स्थापित किए थे और इसलिए ही उसके जैविक नमूने पीड़िता के निजी अंगों के अंदर भी पाए गए थे।

अदालत ने आगे कहा, 'गवाह झूठ बोल सकते हैं लेकिन वैज्ञानिक साक्ष्य जो निर्णायक प्रकृति के होते हैं और इन्हें झूठा नहीं ठहराया जा सकता और इसलिए इन्हें खारिज नहीं किया जा सकता है।' सजा पर दलीलें बाद में सुनी जाएंगी।

आमतौर पर यौन उत्पीड़न के मामलों में बलात्कार पीड़िता की गवाही को मुख्य सबूत माना जाता है और यदि पीड़िता आरोपी को क्लीन चिट दे देती है तो उसे संदेह का लाभ मिल जाता है और वह छूट जाता है।