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आजम खान का गढ़ जीते, दिल्ली में क्यों हार? BJP में घमासान के आसार, नेता बोले- अब ऐक्शन का वक्त

राजेंद्र नगर सीट पर उपचुनाव में हार के बाद दिल्ली भाजपा में घमासान के आसार बढ़ गए हैं। कई नेताओं ने दबी जुबान में तो कुछ ने खुलकर प्रदेश नेतृत्व पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

आजम खान का गढ़ जीते, दिल्ली में क्यों हार? BJP में घमासान के आसार, नेता बोले- अब ऐक्शन का वक्त
Sudhir Jhaहिन्दुस्तान,नई दिल्लीMon, 27 Jun 2022 11:28 AM
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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बेहद मुश्किल माने जाने वाले आजम खान के गढ़ में भी भगवा परचम लहरा दिया है। आजमगढ़ में भी अखिलेश के भाई धर्मेंद्र यादव को हरा दिया। लेकिन दिल्ली में क्यों बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा? कुछ इसी तरह के सवाल दिल्ली में बीजेपी के समर्थक और पार्टी के कई नेता पूछ रहे हैं। राजेंद्र नगर सीट पर उपचुनाव में हार के बाद दिल्ली भाजपा में घमासान के आसार बढ़ गए हैं। कई नेताओं ने दबी जुबान में तो कुछ ने खुलकर प्रदेश नेतृत्व पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

राजेंद्र नगर में पार्टी हार के बाद रविवार को दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने उम्मीदवार राजेश भाटिया को 'स्नेह और आशीर्वाद' के लिए जनता का आभार जताया। उन्होंने कहा, ''हार-जीत लोकतंत्र का अभिन्न अंग है, भाजपा इस जनादेश का सम्मान करती है। हमारे कार्यकर्ता इस चुनाव की भांति आगे भी और अधिक बल के साथ रणक्षेत्र में उतरेंगे।'' 

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देशभर में जीत, दिल्ली में क्यों हार?
इस बीच पार्टी के समर्थकों और नेताओं में निराशा साफ देखी जा सकती है। कुछ नेताओं ने तो सोशल मीडिया पर भी अपनी राय जाहिर की है। पूर्व मीडिया पैनलिस्ट और बीजेपी नेता राहुल त्रिवेदी ने ट्वीट किया, ''दिल्ली बीजेपी को आत्ममंथन की जरूरत है। क्या वजह है कि हम देश के हर कोने में चुनाव जीत रहे हैं। लेकिन दिल्ली में हमें सिर्फ हार मिलती है। पार्टी और जनता के बीच में दूरी बढ़ रही है, जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।'' एक अन्य कार्यकर्ता केएस दुग्गल ने लिखा, ''राजेंद्र नगर विधानसभा उपचुनाव में हार के बाद मंथन वाली बैठकों की नहीं, बल्कि ऐक्शन लेने की जरूरत है।''

'बदलनी होगी रणनीति'
इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में भी कुछ नेताओं ने रणनीति में बदलाव की बात कही है। एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ''झुग्गियों और अनऑथराइज्ड कॉलोनियों में लोकल लीडरशिप तैयार करने की जरूरत है। हम सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं रह सकते हैं कि बड़े नेता रोड शो करेंगे और लोग बड़ी संख्या में हमें वोट कर देंगे। केवल प्रदर्शन और पंपलेट बांटने पर निर्भर रहने वाले दिन बीत गए। स्टेट यूनिट में जनता से जुड़ने के लिए नए प्रयोग की कमी है। हम जनता के लिए विकल्प प्रस्तुत करने की बजाय केजरीवाल पर आरोप लगाते रहते हैं।'' 

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'प्रचार अभियान में खामी'
एक अन्य नेता ने कहा, ''इस बात को सोचने की जरूरत है कि कैसे बीजेपी आजम खान और अखिलेश यादव के गढ़ में जीत गई, लेकिन दिल्ली में उसे लगातार हार का सामना करना पड़ रहा है। राजेंद्र नगर सीट पर प्रचार टीम का हिस्सा रहे एक नेता ने कहा कि पार्टी का युवाओं से कनेक्ट नहीं रहा। उन्होंने कहा, ''स्टेट यूनिट ने प्रचार अभियान का  ठीक से प्रबंधन नहीं किया। पानी आपूर्ति को लेकर जनता में काफी शिकायतें थीं, लेकिन हम उन्हें यह विश्वास दिलाने में नाकाम रहे कि बीजेपी कैसे इस संकट को दूर करेगी।''

'पार्टी के वोटर्स रह गए बूथ से दूर'
कम वोटिंग की ओर इशारा करते हुए नेता ने कहा कि पार्टी समर्थकों को घर से बूथ तक पहुंचाने पर और अधिक काम करने की जरूरत थी। आप ने इस मामले में बेहतर काम किया। उन्होंने अपने किसी वोटर को घर में नहीं रहने दिया। लेकिन बीजेपी के बहुत से वोटर घर से निकले नहीं। उन्होंने कहा, ''राजेंद्र नगर, न्यू राजेंद्र नगर, नारायणा और इंदरपुरी के कुछ इलाकों में वोटिंग बेहद कम रही, जहां भाजपा मजबूत है।'' गौरतलब है कि उपचुनाव में महज 43.75 फीसदी वोटिंग हुई, जबकि 2020 में 58.72 फीसदी वोटर्स ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। 

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