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MCD चुनाव से पहले दिल्ली बीजेपी का 'सफाई' अभियान, भ्रष्टाचार के आरोप में घिरे तीन निगम पार्षदों को किया बाहर

नई दिल्ली। लाइव हिन्दुस्तान टीमPublished By: Praveen Sharma
Sun, 19 Sep 2021 12:45 PM
MCD चुनाव से पहले दिल्ली बीजेपी का 'सफाई' अभियान, भ्रष्टाचार के आरोप में घिरे तीन निगम पार्षदों को किया बाहर

दिल्ली भाजपा ने भ्रष्टाचार के आरोप में घिरे अपने तीन निगम पार्षदों को 6 साल के लिए पार्टी की सदस्यता से निष्कासित कर दिया है। भाजपा के इस कदम को अगले साल होने वाले दिल्ली नगर निगम चुनावों (MCD Elections) से पहले पार्टी में सफाई अभियान के रूप में देखा जा रहा है। 

दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता की ओर से रविवार को जारी किए गए आदेश के अनुसार, तीन निगम पार्षदों संजय ठाकुर, रजनी पांडेय और पूजा मदान को उनके खिलाफ बढ़ रही भ्रष्टाचार की शिकायतों के आधार पर कार्रवाई करते हुए तुरंत प्रभाव से 6 साल के लिए भाजपा की सदस्यता से निष्कासित कर दिया गया है।

संजय ठाकुर दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) के अंतर्गत आने वाले सहदुलजाब वार्ड से पार्षद हैं, तो रजनी बब्लू पांडेय न्यू अशोक नगर वार्ड से पार्षद हैं, जो पूर्वी दिल्ली नगर निगम (ईडीएमसी) के तहत आता है। वहीं, पूजा मदान उत्तरी दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) के मुखर्जी नगर वार्ड का प्रतिनिधित्व करती हैं।

आदेश गुप्ता की ओर से तीनों निगम पार्षदों को भेजे गए पत्र में गया है कि आपको यह सूचित किया जाता है कि आपके खिलाफ जनता की अत्याधिक आर्थिक भ्रष्टाचार की शिकायतों के कारण आपको 6 साल के लिए भारतीय जनता पार्टी की साधारण सदस्यता से निलंबित किया जाता है। आपको अनेक बार इस बारे में अवगत करा कर अपने भ्रष्टाचारी व्यवहार को ठीक करने के लिए कहा गया, लेकिन आपके व्यवहार में कोई सुधार नहीं आया। अत: आपको तुरंत प्रभाव से 6 साल के लिए भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता से निष्कासित किया जाता है।   

गौरतलब है कि 272 वार्ड वाले दिल्ली नगर निगम चुनाव में अब बस कुछ माह शेष बचे हैं। ऐसे में अपनी छवि सुधारने के लिए भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर भाजपा अपने सभी पार्षदों को कड़ा संदेश देना चाहती है।

बता दें कि 2012 में एमसीडी को तीन भागों - उत्तर, दक्षिण और पूर्वी दिल्ली नगर निगम में बांट दिया गया था। एनडीएमसी और एसडीएमसी में जहां 104-104 सीटें हैं, वहीं ईडीएमसी में 64 पार्षद हैं। एमसीडी तीन भागों में बांटने के कदम के पीछे यह तर्क दिया गया था कि यह प्रशासन को सरल बनाएगा और दिल्लीवासियों को बेहतर नागरिक सेवाएं प्रदान करेगा, लेकिन दुर्भाग्य से ज्यादा कुछ नहीं हुआ।

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