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15 दिसंबर से दिल्ली विधानसभा का शीतकालीन सत्र, इन मुद्दों पर आमने-सामने होगी AAP-BJP

दिल्ली सरकार ने 15 दिसंबर से विधानसभा का शीतकालीन सत्र बुलाया है। अधिकारियों की मानें तो शीतकालीन सत्र दो दिन 15 व 18 दिसंबर को होगा। चर्चा के दौरान जरूरत पड़ी तो इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।

15 दिसंबर से दिल्ली विधानसभा का शीतकालीन सत्र, इन मुद्दों पर आमने-सामने होगी AAP-BJP
Sneha Baluniहिन्दुस्तान,नई दिल्लीThu, 30 Nov 2023 06:14 AM
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दिल्ली सरकार ने आगामी 15 दिसंबर से दिल्ली विधानसभा का शीतकालीन सत्र बुलाया है। अधिकारियों की मानें तो शीतकालीन सत्र दो दिन 15 व 18 दिसंबर को होगा। चर्चा के दौरान जरूरत पड़ी तो इसे आगे बढ़ाया जा सकता है। उधर, विपक्ष ने सिर्फ दो दिन के शीतकालीन सत्र को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। सूत्रों की मानें तो सरकार विधानसभा सत्र में मौजूदा मुख्य सचिव के सेवा विस्तार के फैसले पर भी चर्चा करा सकती है। इसके अलावा जल बोर्ड के बजट जारी नहीं करने समेत अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है।

शीतकालीन सत्र के दौरान वित्तीय वर्ष 2023-24 के संशोधित बजट का प्रस्ताव आएगा। सभी विभागों के बढ़े हुए बजट के प्रस्तावों को इसमें पास किया जाएगा। खासतौर से इस दौरान दिल्ली जल बोर्ड का भी संशोधित बजट आ सकता है, क्योंकि जल बोर्ड के पास वर्तमान में फंड की कमी है। पहली बार बतौर वित्त मंत्री आतिशी संशोधित बजट सदन में रखेंगी। वहीं विपक्ष ने इस शीतकालीन सत्र को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी के मुताबिक, इतने कम समय के लिए सत्र बुलाना ठीक नहीं है। प्रश्नकाल खत्म कर दिया गया है, उसे दोबारा शुरू करना चाहिए।

कोर्ट ने मुख्य सचिव पर मानी केंद्र सरकार की बात

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के मुख्य सचिव नरेश कुमार का कार्यकाल छह महीने और बढ़ाने के केंद्र के फैसले को बुधवार को बरकरार रखा, जो 30 नवंबर को सेवानिवृत्त होने वाले थे। प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार के फैसले को 'कानून का उल्लंघन नहीं माना जा सकता।'

पीठ ने कहा, 'हम स्पष्ट करते हैं कि यह (कार्यकाल के विस्तार को बरकरार रखने वाला आदेश) प्रारंभिक दृष्टिकोण पर आधारित है। संविधान पीठ (राष्ट्रीय राजधानी में सेवाओं से संबंधित संशोधित कानून का परीक्षण) के समक्ष लंबित मुद्दों पर कोई विचार नहीं किया है।' पीठ ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय को मुख्य सचिव का कार्यकाल बढ़ाने का अधिकार है जो संविधान की राज्य सूची की सातवीं अनुसूची की प्रविष्टि 1, 2 और 8 (पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था और भूमि) से संबंधित सभी मुद्दों से निपटता है।

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