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लोगों को मरता हुआ नहीं छोड़ सकते, साथ मिलकर काम करें राज्य; प्रदूषण पर 'लाल' हुआ सुप्रीम कोर्ट 

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जाहिर की है। कोर्ट ने पांच राज्यों को पराली जलाने पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। साथ ही राज्यों को लड़ाई छोड़कर साथ काम करने को कहा है।

लोगों को मरता हुआ नहीं छोड़ सकते, साथ मिलकर काम करें राज्य; प्रदूषण पर 'लाल' हुआ सुप्रीम कोर्ट 
Sneha Baluniहिन्दुस्तान,नई दिल्लीWed, 08 Nov 2023 05:50 AM
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दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के स्तर में खतरनाक रूप से हो रही बढ़ोतरी के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा, हम प्रदूषण के चलते लोगों को मरता हुआ नहीं छोड़ सकते। कोर्ट ने पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान को पराली जलाने पर तत्काल रोक लगाने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और सुधांशु धूलिया की पीठ प्रदूषण के मामले पर सुनवाई कर रही थी। न्यायमूर्ति कौल ने कहा, यह लोगों के स्वास्थ्य की हत्या है। हम यह नहीं कह रहे कि प्रदूषण की एकमात्र वजह पराली है, बल्कि यह भी एक मुख्य वजह है।

न्यायमूर्ति कौल ने पंजाब सरकार की ओर से पेश महाधिवक्ता गुरमिंदर सिंह से कहा कि राज्य पराली जलाने पर रोक को किस तरह लागू करते हैं, इससे हमें लेना-देना नहीं है, लेकिन यह सुनिश्चित हो कि पराली न जले। भले इसके लिए कभी जबरदस्ती कार्रवाई करनी पड़े या कभी प्रोत्साहन देना पड़े। कहीं भी पराली जली तो संबंधित थाना प्रभारी जिम्मेदार होंगे। पीठ ने चारों राज्यों को बैठक करने का भी निर्देश दिया।

अन्य फसलों पर एमएसपी दें 

कोर्ट ने कहा, धान पंजाब की मूल फसल नहीं है, ऐसे में अन्य वैकल्पिक फसलों पर ध्यान देना जरूरी है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पराली जलाने की समस्या दोबारा न हो। कोर्ट ने कहा, किसान धान की बजाय अन्य फसलों की ओर तभी बढ़ेंगे जब न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) धान की बजाय अन्य फसलों को दिया जाए।

वायु गुणवत्ता में मामूली सुधार 

इस बीच, चार दिनों बाद राजधानी दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 अंक से नीचे 395 रहा। हालांकि, यह अब भी बेहद खराब श्रेणी में है।

सम-विषम योजना ठोस परिणाम के बिना दिखावा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सम-विषम योजना बिना ठोस परिणाम के महज दिखावा है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा कि क्या आपने मूल्यांकन किया है कि पिछले वर्षों में योजना से कितना लाभ हुआ, प्रदूषण में कितनी कमी आई? यदि मेट्रो सेवा नहीं होती तो प्रदूषण की स्थिति और बदतर होती। पीठ ने अन्य राज्यों के नारंगी टैग वाहनों (प्रदूषणकारी डीजल कार), टैक्सियों के प्रवेश को नियंत्रित करने का भी निर्देश दिया।

राजनीतिक लड़ाई छोड़ साथ मिलकर काम करें

राज्यों द्वारा प्रदूषण के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराए जाने पर शीर्ष कोर्ट ने कहा, हमेशा राजनीतिक लड़ाई नहीं हो सकती। पीठ ने कहा, राज्य राजनीतिक लड़ाई अलग रखें और समस्या के हल को समुचित कदम उठाए। पर्यावरणविद एमसी मेहता द्वारा दाखिल याचिका पर कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए यह निर्देश दिया।

साल-दर-साल स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोग

प्रदूषण से संबंधित एक मामले की सुनवाई करते हुए पीठ ने पराली, वाहन प्रदूषण और खुले में कचरा जलाने के मुद्दों पर विचार किया। अदालत ने कहा कि पराली जलाने की घटनाएं रुक नहीं रहीं। लोग साल-दर-साल स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं क्योंकि प्रदूषण का समाधान नहीं खोजा जा सका है।

अधिकारी सुनिश्चित करें खुले में कचरा न जले

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को सुनिश्चित करने का आदेश दिया कि कूड़ा-कचरा खुले में न जलाएं। पीठ ने प्रदूषण दूर करने के लिए लगाए गए स्मॉग टावर के काम नहीं करने पर स्थिति को हास्यास्पद बताया। साथ ही सरकार को स्मॉग टावरों को ठीक करने को समुचित कदम उठाने का निर्देश दिया।

पराली निपटान के लिए कोष बनाया जाए

आम आदमी पार्टी (आप) ने मंगलवार को कहा कि केंद्र और हरियाणा सरकार को पराली निपटान के लिए एक कोष बनाना चाहिए। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता मलविंदर सिंह कांग ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की इस मांग को केंद्र सरकार पहले खारिज कर चुकी है। हम दोबारा मांग करते हैं कि यह कोष बनाया जाए।

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