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दिल्ली में प्रदूषण पर कैसे लगेगी रोक, पर्यावरणविदों ने सुझाए उपाय, क्या अमल करेगी सरकार?

Delhi Pollution: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदूषण पर रोक कैसे लगेगी। इसको लेकर पर्यावरणविदों ने कुछ उपाय सुझाए हैं। साथ ही दिल्ली सरकार के कुछ फैसलों की आलोचना भी की है। पढ़ें यह रिपोर्ट...

दिल्ली में प्रदूषण पर कैसे लगेगी रोक, पर्यावरणविदों ने सुझाए उपाय, क्या अमल करेगी सरकार?
Krishna Singhभाषा,नई दिल्लीSat, 28 Oct 2023 12:59 AM
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दिल्ली में प्रदूषण की समस्या से निजात कैसे मिलेगी। इस बारे में पर्यावरणविदों की ओर से कुछ उपाय सुझाए गए हैं। इनमें सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में सुधार, निर्माण स्थलों पर 'स्मॉग गन' और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (डीपीसीसी) को एक संस्था के रूप में मजबूत करना शामिल है। निगरानी एजेंसियों के अनुसार, दिल्ली की वायु गुणवत्ता शुक्रवार को लगातार पांचवें दिन 'खराब' श्रेणी में दर्ज की गई। आने वाले दिनों में इसके और खराब होने के आसार हैं।

पर्यावरणविद् भावरीन कंधारी ने कहा कि दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए प्रदूषण के स्रोतों का पता लगाने और प्रणालीगत बदलावों को लागू करने के लिए लगातार प्रयासों की आवश्यकता है। निर्माण स्थलों के आसपास धूल प्रदूषण के बारे में कंधारी ने कहा कि निर्माण स्थलों पर पूरे साल स्मॉग गन एक अनिवार्य उपकरण होना चाहिए।
     
कंधारी ने कहा कि प्रदूषण स्रोतों का पता लगाने और प्रणालीगत परिवर्तनों को लागू करने के लिए लगातार प्रयासों की आवश्यकता है। स्मॉग टावर, गन और स्प्रिंकलर की जरूरत है। हमें स्मॉग गन की आवश्यकता है, लेकिन उन्हें पूरे वर्ष निर्माण स्थलों पर अनिवार्य उपकरण होना चाहिए, केवल फोटो खिंचवाने के लिए नहीं। 

दिल्ली में शु्क्रवार को 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 261 दर्ज किया गया। इससे पहले बृहस्पतिवार को  एक्यूआई 256 , बुधवार को 243 और मंगलवार को 220 रहा था। दिल्ली के लिए केंद्र की वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान प्रणाली के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी की वायु गुणवत्ता शनिवार को 'बहुत खराब' श्रेणी में पहुंचने की आशंका है। इसकी मुख्य वजह हवा की धीमी गति और तापमान में गिरावट मानी जा रही है।

कंधारी ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार हर साल पौधे लगाने की बात तो करती है, लेकिन साथ ही पेड़ काटने की इजाजत भी देती है। कार्य योजना में दस लाख पौधे लगाने का उल्लेख है, लेकिन सरकार साथ ही पेड़ों को काटने की अनुमति भी देती है। अब समय आ गया है कि हवा को साफ करने के लिए एक ठोस सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में निवेश किया जाए। हमारा नीतियां इस दृष्टिकोण के अनुरूप होनी चाहिए।

पिछले हफ्ते, प्रदूषण नियंत्रण योजना 'ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान' (जीआरएपी) को सक्रिय रूप से लागू करने के लिए जिम्मेदार एक वैधानिक निकाय, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने प्रदूषण के स्तर में संभावित वृद्धि के बीच एनसीआर में अधिकारियों को निजी परिवहन को हतोत्साहित करने और सीएनजी या इलेक्ट्रिक बसों और मेट्रो ट्रेन की सेवाओं को बढ़ाने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाने का निर्देश दिया था।

चिंतन एनवायरमेंट रिसर्च एंड एक्शन ग्रुप संस्थापक और निदेशक भारती चतुर्वेदी ने कहा कि सरकार को जीआरएपी पर भरोसा नहीं करना चाहिए और राष्ट्रीय राजधानी में सार्वजनिक परिवहन में सुधार किया जाना चाहिए। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) में कार्यकारी निदेशक (अनुसंधान और वकालत) अनुमिता रॉयचौधरी ने कहा कि दिल्ली में एकीकृत सार्वजनिक परिवहन सुनिश्चित करना आवश्यक है।

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