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Hindi News NCR100 दिन से जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर दिल्लीवाले, आज 'गंभीर' हो सकती है हवा; GRAP-3 होगा लागू?

100 दिन से जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर दिल्लीवाले, आज 'गंभीर' हो सकती है हवा; GRAP-3 होगा लागू?

दिल्ली-एनसीआर के लोग पिछले 100 दिनों से जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं। 20 अक्तूबर के बाद से एक दिन भी ऐसा नहीं रहा है जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 से कम रहा हो। ऐसा रहा तो ग्रैप-3 लागू होगा।

100 दिन से जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर दिल्लीवाले, आज 'गंभीर' हो सकती है हवा; GRAP-3 होगा लागू?
Sneha Baluniहिन्दुस्तान,नई दिल्लीTue, 30 Jan 2024 05:33 AM
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राजधानी दिल्ली के लोग बीते सौ दिनों से प्रदूषण के कारण जहरीली हवा में सांस ले रहे हैं। पिछले साल 20 अक्तूबर के बाद से एक दिन भी ऐसा नहीं रहा है जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 से कम रहा हो। अगले दो-तीन दिनों के अंदर भी प्रदूषण का स्तर बेहद खराब श्रेणी में ही रहने की संभावना है। इस बार सर्दियों के मौसम में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ कम आए हैं। 

इसके चलते लोगों को सामान्य से ज्यादा प्रदूषण का सामना करना पड़ा है। सोमवार का दिन 101वां है जब वायु गुणवत्ता खराब है। 20 अक्तूबर को एक्यूआई 195 अंक पर था। हवा मध्यम श्रेणी में थी। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़े बताते हैं कि इस अवधि में 15 दिन एक्यूआई का स्तर 400 से भी ऊपर रहा है।

गंभीर श्रेणी में हवा

केंद्र ने सोमवार को दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए सख्त उपाय लागू नहीं किए। माना जा रहा है कि 30 जनवरी को वायु गुणवत्ता 'गंभीर' श्रेणी में चली जाएगी। 24 जनवरी के बाद से यह तीसरी बार है जब केंद्र सरकार ने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सख्त उपायों को लागू नहीं करने का फैसला किया है। दिल्ली में 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) सोमवार शाम 4 बजे 356 था। भारत मौसम विज्ञान विभाग और इंडियन इंस्टीट्यू ऑफ ट्रॉपिकल मीटियरोलॉजी के अनुसार, मंगलवार को इसके 'गंभीर' श्रेणी (एक्यूआई 400 से ऊपर) तक पहुंचने की संभावना है। यदि एक्यूआई 400 अंक को पार करता है, तो दिल्ली-एनसीआर में अधिकारियों को वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए केंद्र के ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी) के चरण-3 के तहत सख्त प्रतिबंध लागू करने पड़ेंगे।

अस्थमा-स्ट्रोक का खतरा

विशेषज्ञों की मानें तो लंबे समय तक खराब हवा में सांस लेने के कारण कैंसर, अस्थमा, हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक के मामलों में तेजी आ सकती है। साथ ही गर्भवती महिलाओं, गंभीर रोग से ग्रस्त मरीजों और बच्चों में भी पेरशानी बढ़ सकती है।

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