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दिल्ली में हर वीकएंड कैसे हो रहा मौत का तांडव, शोध में गजब का खुलासा; ये हैं 10 ब्लैक स्पॉट

आईआईटी रुड़की के शोध में पता चला है कि वीकएंड पर आम दिनों की तुलना में मरने वालों का आंकड़ा चार फीसदी बढ़ जाता है। रात 12 बजे से लेकर तड़के तीन बजे के बीच होने वाले हादसों में से 40 % जानलेवा होते हैं

दिल्ली में हर वीकएंड कैसे हो रहा मौत का तांडव, शोध में गजब का खुलासा; ये हैं 10 ब्लैक स्पॉट
Nishant Nandanगौरव त्यागी,नई दिल्लीMon, 04 Dec 2023 05:43 AM
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दिल्ली में हर वीकएंड पर मौत का तांडव मच रहा है। एक शोध में इसे लेकर चौकाने वाले खुलासे हुए हैं। दरअसल राजधानी की सड़कों पर सप्ताहांत पर हादसों में जान गंवाने वाले दोपहिया वाहन चालकों की संख्या बढ़ जाती है। आईआईटी रुड़की के शोध में पता चला है कि वीकएंड पर आम दिनों की तुलना में मरने वालों का आंकड़ा चार फीसदी बढ़ जाता है। वहीं, रात 12 बजे से लेकर तड़के तीन बजे के बीच होने वाले हादसों में से 40 फीसदी जानलेवा साबित होते हैं, जबकि दोपहर तीन बजे से लेकर शाम छह बजे तक यह आंकड़ा घटकर 21.1 फीसदी रह जाता है।

आकड़ा बढ़ रहा दोपहिया वाहन चालकों के लिए राजधानी की सड़कें जानलेवा साबित हो रही हैं। वर्ष 2021 में सड़क हादसों में 457 दोपहिया वाहन सवारों की मौत हुई। वर्ष 2022 में यह आंकड़ा बढ़कर 539 हो गया। 2023 में 30 जून तक 255 दोपहिया सवारों ने सड़कों पर अपनी जान गंवाई। दोपहिया वाहन चालकों के साथ होने वाले हादसों को लेकर आईआईटी रुड़की ने रिपोर्ट तैयार की है।

आईआईटी रुड़की की रिपोर्ट से पता चला है कि दोपहिया वाहन चालकों के लिए हादसे तब जानलेवा साबित होते हैं, जब उनकी भिड़ंत बस या ट्रक जैसे भारी वाहनों से होती है। साथ ही दोपहिया वाहन सवार की उम्र 55 से अधिक होने, अंडरपास के नीच दुर्घटना होने और हिट एंड रन के मामलों में सड़क दुर्घटना जानलेवा साबित होती है। सप्ताह के दिनों के हिसाब से भी जानलेवा हादसों की संख्या में बदलाव आता है। सामान्य दिनों में दोपहिया वाहनों सवारों के साथ हुए कुल हादसों में 30.3 फीसदी जानलेवा साबित होते हैं, जबकि वीएंड में यह आंकड़ा बढ़कर 34.7 फीसदी हो जाता है।

फरवरी-मार्च में हादसे ज्यादा फरवरी-मार्च में हादसों की संख्या घटती है, लेकिन कुल हादसों में जानलेवा हादसों का प्रतिशत बढ़ जाता है। आईआईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी-मार्च महीनों में होने वाले हादसों में 37.8 फीसदी जानलेवा होते हैं। इसके बाद अक्तूबर-नवंबर में जानलेवा हादसे 35.8 फीसदी, जुलाई से सितंबर तक बरसात के मौसम में जानलेवा हादसे 31.8 प्रतिशत हुए। सर्दी के मौसम में दिसंबर-जनवरी में जानलेवा हादसों की संख्या 25 प्रतिशत रही।

ये हैं ब्लैक स्पॉट

राजधानी में दस स्थानों पर लगातार जानलेवा सड़क हादसे हो रहे हैं। बीते वर्ष इन्हीं दस स्थानों पर सड़क हादसों में 80 लोगों ने जान गंवाई थी। यह आंकड़ा दिल्लीभर में सर्वाधिक है। दरअसल, ट्रैफिक पुलिस ने 2022 में दिल्ली में 100 से ज्यादा दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान की थी। इस सूची में 10 ब्लैक स्पॉट शीर्ष पर हैं, जहां वर्ष 2022 में सर्वाधिक 80 लोगों की सड़कों हादसों में मौत हुई थी। इनमें से कई स्थान ऐसे हैं, जो बीते तीन वर्ष से ब्लैक स्पॉट में शामिल हैं। ब्लैक स्पॉट खत्म करने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने इस वर्ष चार दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें सिविक एजेंसियों के अफसरों के अलावा आईआईटी, डीटीयू के विशेषज्ञों ने सड़क हादसे कम करने के उपाय सुझाए। जिन दस ब्लैक स्पॉट की पहचान की गई है उनमें - मुकरबा चौक, खामपुर, धौला कुआ, मायापुरी चौक, गांधी विहार बस स्टॉप, भलस्वा चौक, पीरा गढ़ी चौक, पंजाबी बाग चौक, ब्रिटानिया चौक औऱ आश्रम चौक शामिल हैं।

उपाय किए जा रहे

कार्यशाला में सड़क हादसों को कम करने के उपाय सुझाए गए, जिन पर संबंधित एजेंसियां काम कर रही हैं। ट्रैफिक पुलिस द्वारा जुटाए गए आंकड़ों से पता चला है कि मुकरबा चौक पर बीते तीन वर्षों से साधारण और घातक दुर्घटनाओं में वृद्धि हुई है। गांधी विहार बस स्टॉप पर भी दुर्घटनाओं में वृद्धि देखी गई है।
 

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