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दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, महरौली में अतिक्रमण हटाने का तोड़फोड़ नोटिस किया रद्द

दिल्ली हाईकोर्ट ने महरौली पुरातत्व पार्क के आसपास अनधिकृत निर्माणों को हटाने के लिए डीडीए की ओर से जारी विध्वंस नोटिस को बुधवार को रद्द कर दिया। इसे दिसंबर 2022 को जारी किया गया था।

दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, महरौली में अतिक्रमण हटाने का तोड़फोड़ नोटिस किया रद्द
Krishna Singhभाषा,नई दिल्लीThu, 09 Nov 2023 01:03 AM
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दिल्ली हाईकोर्ट ने महरौली पुरातत्व पार्क (Mehrauli Archaeological Park) के आसपास कुछ 'अनधिकृत' निर्माणों को ध्वस्त करने के नोटिस को बुधवार को रद्द कर दिया। डीडीए की ओर से यह नोटिस दिसंबर 2022 को जारी किया गया था। अदालत ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) से प्रक्रिया को फिर से शुरू करने और अपनी भूमि पर अतिक्रमण पर आगे की कार्रवाई करने से पहले प्रभावित पक्षों का पक्ष सुनने के निर्देश जारी किए। 

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) का यह आदेश उन याचिकाओं पर आया, जिसमें डीडीए के तोड़फोड नोटिस को इस आधार पर चुनौती दी गई कि याचिकाकर्ताओं की संपत्तियां गांव लाढा सराय (Village Ladha Sarai) में नहीं वरन महरौली गांव में क्षेत्र में आती हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि कथित अतिक्रमण को हटाने के लिए सीमांकन रिपोर्ट पर भरोसा नहीं किया जा सकता है।

मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा (Chief Justice Satish Chandra Sharma) और न्यायमूर्ति संजीव नरुला की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि चूंकि यह साफ है कि डीडीए अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार तोड़फोड़ के नोटिस से पहले याचिकाकर्ताओं को कोई सूचना नहीं दी गई थी, हम 12 दिसंबर 2022 को जारी विध्वंस नोटिस को रद्द करते हैं। हम डीडीए को नए सिरे से प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश देते हैं। 

अदालत ने कहा- नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों की मांग है कि जिन लोगों के हित प्रशासनिक कार्रवाई से प्रभावित होते हैं, उन्हें सुनने का मौका दिया जाना चाहिए, खासकर जब ऐसी कार्रवाई का उन्हें उनकी संपत्ति से वंचित करने का महत्वपूर्ण परिणाम हो। वहीं डीडीए ने याचिकाओं का विरोध किया और कहा कि विचाराधीन भूमि दक्षिणी सेंट्रल रिज, विशेष रूप से पार्क के भीतर है।

अदालत ने यह भी कहा कि भविष्य में किसी भी तोड़फोड़ कार्रवाई शुरू करने से पहले सभी याचिकाकर्ताओं को डीडीए अधिनियम की धारा 30 (1) के प्रावधानों के अनुसार सुनवाई का उचित अवसर दिया जाना चाहिए। यह प्रक्रिया तीन महीने की अवधि के भीतर पूरी की जाएगी। मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि डीडीए का दायित्व है कि प्रभावित लोगों के लिए प्रक्रियात्मक निष्पक्षता सुनिश्चित करे। 

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