ट्रेंडिंग न्यूज़

Hindi News NCRलेफ्टिनेंट गवर्नरों और गवर्नरों के रोज-रोज के ड्रामे पर रोक लगनी चाहिए, बोले केजरीवाल के मंत्री

लेफ्टिनेंट गवर्नरों और गवर्नरों के रोज-रोज के ड्रामे पर रोक लगनी चाहिए, बोले केजरीवाल के मंत्री

सौरभ ने कहा, 'राज्य की सरकारों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में जाने की परंपरा संवैधानिक ढाँचे की सुरक्षा के लिए अच्छा नहीं है। इसलिए गवर्नरों और लेफ्टिनेंट गवर्नरों के रोज-रोज के ड्रामे पर रोक लगनी

लेफ्टिनेंट गवर्नरों और गवर्नरों के रोज-रोज के ड्रामे पर रोक लगनी चाहिए, बोले केजरीवाल के मंत्री
Nishant Nandanएएनआई,नई दिल्लीThu, 30 Nov 2023 02:58 PM
ऐप पर पढ़ें

दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार और उपराज्यपाल के बीच अक्सर तनातनी की खबरें सामने आती रहती हैं। अब केजरीवाल सरकार के मंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा है कि लेफ्टिनेंट गवर्नरों और गवर्नरों के रोज-रोज के ड्रामे पर रोक लगनी चाहिए। सौरभ भारद्वाज ने कहा, 'देश को सुप्रीम कोर्ट से कुछ ज्यादा उम्मीदे हैं। इसलिए गवर्नरों और लेफ्टिनेंट गवर्नरों के रोज-रोज के ड्रामे पर रोक लगनी चाहिए।'

सौरभ भारद्वाज ने कहा, 'राज्य की सरकारों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में जाने की परंपरा संवैधानिक ढाँचे की सुरक्षा के लिए अच्छा नहीं है। इसलिए गवर्नरों और लेफ्टिनेंट गवर्नरों के रोज-रोज के ड्रामे पर रोक लगनी चाहिए। राज्यपालों को असीमित समय तक किसी बिल को रोकना नहीं चाहिए। लेकिन कोई ठोस ऐक्शन केंद्र सरकार द्वारा नहीं लिया गया है।'

सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा, 'पिछले 10 सालों से दिल्ली बीजेपी के लिए लेबोरेट्री बनी हुई है। दिल्ली में जब लेफ्टिनेंट गवर्नर ने चुनी हुई सरकार के कामकाजों को जबरन रोकना शुरू कर दिया, रोज मुख्यमंत्री से झगड़ा शुरू कर दिया तब बीजेपी और कांग्रेस दोनों हमें यह कहने लगे कि हमें यह पता नहीं है कि सरकार कैसे चलाते हैं। लेकिन इसके बाद यही ड्रामा कांग्रेस और दूसरी पार्टियों द्वारा शासित राज्यों में शुरू हो गया। मललन-तमिलनाडु, पुडु्डुचेरी, पश्चिम बंगाल और पंजाब। यह सब जगह हो रहा है।' 

दरअसल इससे पहले बुधवार को केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को लेकर देश की सबसे बड़ी अदालत ने अपनी नाराजगी जाहिर की थी। दरअसल राज्य विधानसभा मंडल द्वारा पारित विधयकों को दो साल तक दबा कर बैठे रहने पर सुप्रीम कोर्ट ने नाखुशी जाहिर करते हुए कहा था कि वो इस संबंध में दिशा निर्देश तय करने पर विचार करेगा कि राज्यपाल की सहमति के लिए विधेयकों को कब सदन के पास भेज सकते हैं। अदालत ने पूछा था कि वो दो साल तक बिल को दबा कर क्यों बैठे थे?

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि उसे ऐसा कोई वजह नहीं मिली है जिसके कारण गवर्नर ने इतने समय तक बिल को अपने पार रखने का निर्णय लिया। शीर्ष अदालत ने कहा था कि गवर्नर की शक्तियों का इस्तेमाल विधायिका के काम को रोकने के लिए नहीं किया जा सकता है। AAP नेता सौरभ भारद्वाज इसी मुद्दे पर अपनी बात रख रहे थे। 

हिन्दुस्तान का वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें