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खातों की जानकारी मांगी, मना करने पर डराया; तीन दिन डिजिटल अरेस्ट करके वसूले 56 लाख

गाजियाबाद में एक महिला को तीन दिन तक डिजिटल अरेस््ट करके साइबर ठगों ने 56 लाख वसूल लिए। पीड़िता केंद्र सरकार में कार्यरत है। आरोपियों ने खुद को नारकोटिक्स सेल मुंबई से बताया था।

खातों की जानकारी मांगी, मना करने पर डराया; तीन दिन डिजिटल अरेस्ट करके वसूले 56 लाख
Sneha Baluniहिन्दुस्तान,गाजियाबादFri, 01 Mar 2024 10:44 AM
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साइबर अपराधियों ने केंद्र सरकार में कार्यरत महिला कर्मचारी को 23 से 25 फरवरी तक डिजिटल अरेस्ट कर 56 लाख रुपये ऐंठ लिए। आरोपियों ने खुद को नारकोटिक्स सेल मुंबई से बताया और परिजनों को जेल भेजने की धमकी देकर ब्लैकमेल किया। पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपियों को ट्रेस करने का प्रयास शुरू कर दिया है।

वसुंधरा सेक्टर-13 निवासी नलिनी शर्मा का कहना है कि 23 फरवरी को अनजान नंबर से फोन आया। कॉलर ने खुद को फेडेक्स का कर्मचारी राहुल देव बताते हुए कहा कि 12 फरवरी को कंपनी की अंधेरी वेस्ट शाखा से सैफ अल खलील द्वारा पार्सल इरान भेजा गया है। उसमें चार फर्जी पासपोर्ट, पांच क्रेडिट कार्ड, अंतरराष्ट्रीय सिम कार्ड, लैपटॉप और प्रतिबंधित दवा है। पार्सल के लिए जीएसटी के साथ 99,510 रुपये का भुगतान किया गया है। इस संबंध में मुंबई नारकोटिक्स सेल में शिकायत दी गई है।

इसके बाद प्रदीप सावंत नाम के व्यक्ति ने गंभीर कार्रवाई और गिरफ्तारी से बचने के लिए स्काइप कॉल पर जुड़ने के लिए कहा। वह मेल आईडी और डेस्कटॉप के जरिये स्काइप कॉल से जुड़ गईं। प्रदीप सावंत ने अपना आईकार्ड साझा किया और फिर उनका आधार कार्ड मांगा। इसके बाद उनसे कहा गया कि उनके कई खातों का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है।

एडीसीपी क्राइम सच्चिदानंद ने कहा, 'मामले में धोखाधड़ी और आईटी ऐक्ट का केस दर्ज कर लिया गया है। मोबाइल नंबर तथा स्काइप पर इस्तेमाल की गई आईडी के जरिये आरोपियों को ट्रेस करने का प्रयास किया जा रहा है।'

डीएसपी बनकर पीड़िता को धमकाया

पीड़िता का कहना है कि आरोपियों ने उनसे खाते की जानकारी मांगी तो मना कर दिया। इस पर मिलिंद भारंबे नाम के व्यक्ति खुद को डीएसपी बताते हुए कहा कि उनके साथ उनके परिवार को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस दौरान चार एफडी तोड़कर खातों में ट्रांसफर कर दी गईं। 24 और 25 फरवरी को फिर से फोन कर 56 लाख रुपये ऐंठ लिए गए।

क्या है डिजिटल अरेस्ट

डिजिटल अरेस्ट ठगों का नया हथियार है। हाल ही में कई मामले सामने आए हैं। साइबर अरेस्ट के दौरान ठग कॉल कर व्यक्ति को किसी भी अपराध में संलिप्त होने का आरोप लगाकर फंसाते हैं। जांच के नाम पर उन्हें ऑनलाइन माध्यम से वीडियो कॉल पर बने रहने को मजबूर करते हैं और जेल भिजवाने की धमकी देकर वसूली की जाती है। कैमरे के सामने दबाव बनाकर बैठाए रखने की प्रक्रिया को ही साइबर अपराध में डिजिटल अरेस्ट कहा जाता है।

मुनाफे का झांसा देकर एक करोड़ रुपये हड़पे

सिद्धार्थ विहार की अपेक्स द क्रेमलिन सोसाइटी निवासी रोशन लाल का कहना है कि सात दिसंबर 2023 को वह एक व्हॉट्सऐप ग्रुप से जुड़े। वहां उन्हें बताया गया कि दिन में तीन बार शेयर बाजार के बारे में प्रशिक्षण दिया जाएगा। करीब दो महीने बाद आरोपियों ने 500 फीसदी मुनाफा कमाने की योजना पर काम शुरू कर दिया गया। इस तरह उनसे साढ़े 43 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। उनके पास 59 लाख रुपये मुनाफे का मैसेज आया। लेकिन इस रकम को निकालने के लिए आरोपी अलग-अलग बहानों से पैसों की मांग करने लगे। इस तरह निवेश और कमाई के करीब एक करोड़ रुपये आरोपियों ने ठग लिए।

निवेश के नाम पर 75 लाख ठगे

शिप्रा सनसिटी इंदिरापुरम की रिगालिया हाईट्स सोसाइटी निवासी दुर्गा शर्मा का कहना है कि वह कैंसर पीड़ित हैं। उन्होंने 27 दिसंबर 2023 को इंस्टाग्राम पर ऑनलाइन ट्रेडिंग का विज्ञापन देखा। क्लिक करने पर उन्हें एक ग्रुप में जोड़ दिया गया। उसमें उनसे छोटे-छोटे स्टॉक खरीदने के लिए कहा गया। जनवरी माह से उन्होंने अपने डीमैट अकाउंट से निवेश करना शुरू कर दिया। इस तरह आरोपियों ने उन्हें झांसे में लेकर 75.13 लाख रुपये ऐंठ लिए।

ऐसे बरतें सावधानी

1. किसी भी ऑफर के लालच में न आएं। अनजान व्यक्ति से फोन पर बात कर उसके बहकावे में न आएं
2. जांच करने के बाद ही बैंक खाते में राशि डालें। किसी भी अनजान को खाते संबंधी जानकारी न दें
3. नौकरी संबंधी विज्ञापन पर भरोसा करने से पहले जांच कर लें। निवेश करने से पहले भी सावधानी बरतें।
4. असली वेबसाइट के एड्रेस बार में https:// से पहले हरे रंग में सिक्योर लिखा होता है और हरे रंग से ताला बना होता है, किसी वेबसाइट पर सिक्योर नहीं लिखा है तो लेनदेन करने देने से बचें।

अपराध होने पर क्या करें

● ठगी होने पर तुरंत 1930 पर फोन कर पूरी जानकारी दें
● इंटरनेट मीडिया से जुड़े अपराध https://cybercrime.gov.in पर दर्ज कराएं
● थाने पर शिकायत दें, मुंशी टरकाने का प्रयास करें तो एसएचओ और एसीपी से जरूर मिलें।
● साइबर सेल हेल्प डेस्क के नंबर पर 8929436699 संपर्क करें
● साइबर सेल प्रभारी को भी 9643322892 काल करें
● cybercrimegz- up@nic.in पर ईमेल भी भेज सकते हैं

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