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1 जून, 2020|8:23|IST

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Covid-19 से 6 की मौत से चर्चा में तबलीगी जमात, जानें कैसे हुई इसकी शुरुआत

corona virus infection in tablighi jamaat nizamuddin markaz

दिल्ली के निजामुद्दीन में तबलीगी जमात में शामिल होने हजारों लोगों में से 6 लोगों की अचानक कोरोना वायरस महामारी मौत होने से हड़कंप मच गया है। मरने वाले सभी लोग तेलंगाना के हैं। आशंका है कि यहां जमात में शामिल होने आए सैकड़ों में लोगों में कोरोना फैल चुका है। इन जमातियों के जरिए अब तक न जाने कितने लोग अनजाने में कोरोना के चपेट में आ चुके होंगे और अभी आगे न जाने कितने लोगों को कोरोना वायरस संक्रमण फैला देंगे।

मरकज में शामिल हुए थे कई देशों के प्रतिनिधि-
कि कोरोना वायरस के चलते देशव्यापी लॉकडाउन के बीच मशहूर निजामुद्दीन मस्जिद में जमात के लिए मरकज का आयोजन किया। इस मरकज में श्रीलंका, चीन, बांग्लादेश, नेपाल और पाकिस्तान समेत दुनिया कई देशों के सैकड़ों जमातियों हिस्सा लिया था। यहां आए कई लोग उत्तर प्रदेश के देवबंद भी गए थे। ऐसे में तमाम लोगों में कोरोना संक्रमण तेजी से फैलने डर गहरा गया है। कोरोना संक्रमण फैलने के बीच अब निजामुद्दीन का तबलीगी जमात चर्चा का विषय बन गया है। लोग इसके बारे में बात कर रहे हैं और जानना चाहते हैं कि आखिरी यहां से तमाम लोगों तक कैसे कोरोना संक्रमण पहुंचा। जानिए कैसे और कब शुरू हुआ तबलीगी जमात।

क्या है तबलीगी जमात और मरकज
मरकज, जमात और तबलीगी जमात ये तीनों शब्द अलग-अलग हैं। मरकज का मतलब होता है सामूहिक बैठक या मीटिंग। जमात का अर्थ होता है समूह या टोली। तबलीगी जमात का अर्थ होता है अल्लाह और दीन का प्रचार-प्रसार करने वाला समूह। तबलीगी जमात के कंसेप्ट को मानने वाले लोग पारंपरिक और प्राचीन इस्लामिक परंपराओं को मानते हैं। तबलीगी जमात की शुरुआ मुस्लिम धर्म के अनुयायियों में इस्लाम का प्रचार प्रसार करते रहने के उद्देश्य से हुई थी। इसका मुख्यालय भारत में दिल्ली की निजामुद्दीन मस्जिद है।

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कैसे शुरू हुआ तबलीगी जमात ?
तबलीगी जमात एक सुन्नी मुसलमानों का संगठन है। इसकी शुरुआत भारत में अंग्रेजों के जमाने में ही हो गई थी। हजरत मौलाना इलियास कांधलवी ने 1926-27 में सुन्नी मुसलमानों के संगठन तबलीगी जमात की स्थापना दिल्ली में निजामुद्दीन स्थित मस्जिद से की थी। यहीं जमात का मुख्यालय है। इस्लाम की शिक्षा देने के लिए इलियास शुरुआत में हरियाणा के मेवात के मुस्लिम समुदाय के लोगों को पहली जमात में ले गए थे।

1941 में हुआ जमात का पहला कार्यक्रम
भारत में तबलीगी जमात का पहला धार्मिक कार्यक्रम 1941 हुआ था। इसमें 25000 लोग शामिल हुए थे। 1940 तक जमात का कार्यक्रम सिर्फ भारत तक ही सीमित था लेकिन धीरे, धीरे बाद में पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी इसकी शाखाएं खोली गईं। तबलीगी जमात हर साल एक वार्षिक धार्मिक आयोजन करता है जिसे इज्तेमा के नाम से जानते हैं।

जमात के 6 उसूल : तबलीगी जमात के छह मुख्य उद्देश्य या उसूल बताए जाते हैं। ये उसूल हैं- कलिमा, सलात, इल्म, इक्राम-ए-मुस्लिम, इख्लास-ए-निय्यत, दावत-ओ-तबलीग।

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