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एनसीआरनोएडा: अस्पताल ने बिना पैसे जमा कराए कोरोना मरीज का शव देने से किया मना, बेटा बोला- रात में बंद की ऑक्सीजन

मुख्य संवाददाता,नोएडाPublished By: Sneha Baluni
Tue, 01 Jun 2021 05:42 AM
नोएडा: अस्पताल ने बिना पैसे जमा कराए कोरोना मरीज का शव देने से किया मना, बेटा बोला- रात में बंद की ऑक्सीजन

बिसरख थाना क्षेत्र में स्थित एक निजी अस्पताल में मरीज की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा किया। मृतक के बेटे का आरोप है कि उनके पिता की चार लाख की मेडिक्लेम की पॉलिसी थी। अब अस्पताल के द्वारा 14 लाख का बिल बताया जा रहा। बीच में उनसे एक बार भी पैसों के लिए नहीं कहा गया और ना ही खर्चा बताया गया। 

अब मौत होने पर लाश देने से पहले पैसा जमा करने के लिए दबाव बनाया गया। पांच लाख रुपये जमा करने और दो लाख रुपये जमा करने का वायदा करने पर ही लाश दी गई। दादरी निवासी तरूण गोयल ने कहा कि उसके पिता सुदेश गोयल को कोरोना होने पर 21 अप्रैल को बिसरख थाना क्षेत्र में स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां पर रविवार देर रात में उनकी मौत हो गई। 

वह 41 दिन तक अस्पताल में रहे थे। उनका आरोप है कि अस्पताल में भर्ती करते समय उन्होंने चार लाख की मेडिक्लेम पॉलिसी अस्पताल में दी थी। जिसके बाद अस्पताल प्रशासन ने उनसे कभी पैसे जमा करने के लिए नहीं कहा और ना ही उनके पूछे जाने पर बिल बताया। 

मौत के बाद उन्होंने 14 लाख रुपये का बिल उन्हें देते हुए कहा कि वह इसे जमा कराएं, जिसके बाद ही लाश मिलेगी। इसको लेकर अन्य परिजनों और परिचितों ने नाराजगी जतायी तो पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। उनका यह भी आरोप है कि करीब एक सप्ताह पहले उनके पिता की तबीयत बिल्कुल ठीक थी और उन्हें छुट्टी देने की बात कही जा रही थी। लेकिन रात में आक्सीजन बंद हो जाने की वजह से उनके पिता की तबीयत बिगड़ी। उन्हें उसी रात आईसीयू में रखा गया। 

पुलिस के आने के बाद भी अस्पताल प्रशासन बिना पैसा जमा कराये लाश ना देने की जिद पर अड़ा रहा। उनसे पांच लाख रुपये जमा कराये गये तथा चार लाख रुपये की मेडिक्लेम पॉलिसी थी और दो लाख रुपये उनसे बाद में जमा कराने के लिए लिख कर लिया गया। जिसके बाद ही उन्हें लाश दी गई। उनका यह भी आरोप है कि उनके पिता की लाश को फ्रीजर में ना रख कर एक कमरे में फर्श पर रखा गया था और वह पूरी तरह खून में लथपथ थे। 

परिवार द्वारा अनेक आरोप लगाते हुए शासन में भी इस मामले की शिकायत की गई है। जबकि अस्पताल प्रबंधन ने उनके द्वारा लगाये गये आरोपों को गलत बताया है, पॉलिसी के साथ उन्होंने टॉप एप भी बताया था। उनके अस्पताल में कभी भी आक्सीजन बंद नहीं हुई है। यह आरोप पूरी तरह से गलत है। आईसीयू में मरीज के लंबे समय तक रहने की वजह से खर्चा तो अधिक होगा ही।

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