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ISIS के इशारे पर सोशल मीडिया के जरिए देश में आतंक फैलाने की रचते थे साजिश, अदालत ने 15 आतंकियों को सुनाई सजा 

नई दिल्ली प्रमुख संवाददाताPublished By: Dinesh Rathour
Sat, 17 Oct 2020 06:26 AM
ISIS के इशारे पर सोशल मीडिया के जरिए देश में आतंक फैलाने की रचते थे साजिश, अदालत ने 15 आतंकियों को सुनाई सजा 

आतंकी संगठन आईएसआईएस के इशारे पर भारत में संगठन का फैलाव करने के प्रयास के जुर्म में अदालत ने 15 आतंकियों को अलग-अलग सजा सुनाई है। इन दोषियों पर भारतीय मुसलमान युवाओं को सोशल मीडिया के माध्यम से जोड़कर देश मेंं आतंकी गतिविधि को फैलाने की साजिश का अपराध साबित हुआ है।पटियाला हाउस स्थित विशेष न्यायाधीश प्रवीण सिंह की अदालत ने दोषी नफीस खान को दस साल की जेल की सजा सुनाई है। जबकि तीन अन्य दोषियों को सात साल की जेल की सुनाई गई है। वहीं एक दोषी को छह साल की सजा सुनाई गई है। अन्य बचे आठ दोषियों को पांच-पांच साल की सजा सुनाई गई है। इसके अलावा दो अन्य दोषियों को भी पांच-पांच साल की सजा सुनाई गई है। अदालत ने इन सभी दोषियों को गैरकानूनी गतिविधि(रोकथाम) अधिनियम, आपराधिक साजिश, विस्फोटक अधिनियम के तहत दोषी पाते हुए सजा सुनाई है।

दोषियों ने अदालत में अपना जुर्म कबूला कहा था पछतावा है 
इस मामले का रोचक पहलु यह है कि इन सभी दोषियों ने अपनी अधिवक्ता कौसर खान के माध्यम से अदालत में याचिका दायर कर अपना जुर्म कबूल लिया था। इन्होंने कहा था कि उन्हें अपने कृत्य पर पछतावा है। साथ ही याचिका में कहा था कि वह भविष्य में इस तरह की गतिविधि में शामिल नहीं रहेंगे। वहीं इनकी अधिवक्ता कौसर खान ने अदालत से आग्रह किया था कि उनके मुवक्किल मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं। सभी दोषी कम उम्र के युवक हैं। उनका पूरा भविष्य दाव पर लगा है। जबकि उनमें सुधार की संभावना है। इस याचिका में यह भी कहा गया था कि वह आदतन अपराधी नहीं हैं। वह सोशल मीडिया पर समुदाय विशेष के खिलाफ परोसी जा रही सामग्री से बहकावे में आ गए थे।

पांच साल पहले दर्ज हुआ था मुकदमा
यह मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने 9 दिसंबर 2015 को दर्ज किया था। एनआईए ने जांच में पाया था कि भारत के मुसलमानों को भड़काने व उन्हें आतंकी गतिविधि में शामिल करने के लिए आईएसआईएस ने बड़ी साजिश रची है। इसके लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया गया है।यहां तक की इस आतंकी संगठन ने मुस्लिम युवाओं को आतंकी संगठन में भर्ती किया है। इसके लिए आतंकी संगठन ने अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफार्म का सहारा लिया है। भारत के मुस्लिम युवाओं ने आईएसआईएस के बहकावे में आकर यहां जुनूद-उल-खलिफा-फिल-हिन्द नाम से आतंकी संगठन बनाया। इसमें आईएसआईएस की मदद सिरिया के आतंकी संगठन युसुफ-अल-हिन्दी ने भी की। एनआईए के मुताबिक आईएसआईएस का मीडिया प्रमुख युसुफ अल हिन्दी ने भारत के युवाओं को बहकाने की जिम्मेदारी उठाई थी।

एनआईए ने देश के अलग-अलग हिस्सों से की गिरफ्तारी
इस मामले में एनआईए ने आरोपियों के खिलाफ वर्ष 2016-17 में अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। एनआईए ने बताया कि आतंकी संगठन आईएसआईएस के नेता बकर-उल-बगदादी ने वर्ष 2014 में भारत मेंं आतंक फैलाने की साजिश रची। इसके तहत सोशल मीडिया प्लेटफार्म जैसे फेसबुक, टि्वटर आदि का इस्तेमााल किया गया। यहां मुस्लिमों के खिलाफ भारत में माहौल को लेकर पहले सामग्री परोसी गई। फिर कोड-वडिंग में भारतीय युवाओं को इस्लाम का हवाला देकर संगठन में शामिल होने के लिए पकड़ा गया। दोषी पाए गए 13 युवा देश के अलग-अलग हिस्सों जैसे मुंबई, हैदराबाद, बैंगलुरु व मैंगलुरु से गिरफ्तारियां हुईं थी। इन दोषियों के पास से बड़ी तादात में आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद हुई। यह सभी गिरफ्तारियां नवंबर-दिसंबर 2015 में हुईं।

कुल 20 युवक बनाए गए थे आरोपी
इस मामले में एनआईए ने दिसंबर 2015 में कुल 20 युवाओं को आरोपी बनाया था जिनमें से 15 को शुक्रवार को सजा हो गई। इनमें से तीन युवा सरकारी गवाह बन गए। उनकी सजा माफ हो गई। जबकि एक आरोपी नफीस ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए आरोपों का सामना करने का निर्णय किया है। बाकी बचा एक आरोपी युसुफ भगौड़ा करार है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वह भागकर सीरिया चला गया है।

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