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बिल्डर्स को 3 साल में पूरा करना होगा प्रोजेक्ट, वरना होंगे ब्लैकलिस्ट; योगी सरकार के फैसले से बदलेगी NCR की तस्वीर

योगी सरकार ने बिल्डर्स और फ्लैट बायर्स के बीच विवाद को खत्म करने के लिए अमिताभ कांत समिति की सिफारिशों को मंजूरी दे दी है। अब बिल्डर्स को तीन साल के अंदर प्रोजेक्ट पूरा करना होगा।

बिल्डर्स को 3 साल में पूरा करना होगा प्रोजेक्ट, वरना होंगे ब्लैकलिस्ट; योगी सरकार के फैसले से बदलेगी NCR की तस्वीर
Sneha Baluniहिन्दुस्तान,ग्रेटर नोएडाFri, 22 Dec 2023 06:54 AM
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बिल्डरों और खरीदारों के मुद्दे को हल करने के लिए अमिताभ कांत समिति की 13 सिफारिशों को लागू किया गया है। बिल्डरों को शून्यकाल का लाभ, तीन वर्ष में बकाया जमा करने, मार्टगेज, प्रचलित एफएआर, परियोजना पूरी करने के लिए समय वृद्धि मिल सकेगी। खरीदारों को तीन महीने में रजिस्ट्री, अतिरिक्त पैसा नहीं देने समेत कई लाभ मिलेंगे। बिल्डरों को तीन साल में परियोजना पूरी करनी होगी। ऐसा नहीं करने जुर्माना लगेगा और पांच साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।

नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत समिति की सिफारिशों को प्रदेश सरकार की मुहर के बाद आदेश जारी कर दिए गए। अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त मनोज कुमार सिंह ने सभी प्राधिकरणों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसमें बिल्डरों और खरीदारों को दिए जाने वाले लाभ के बारे में बताया गया है। यह भी बताया गया कि किस तरह से इनको लागू किया जाएगा। बिल्डरों को छूट के साथ उन पर कार्रवाई की भी सिफारिश की गई है ताकि वह परियोजना को पूरा कर सकें।

समिति की सिफारिशों को लागू करने के लिए प्राधिकरण का बोर्ड निगरानी करेगा। सभी महत्वपूर्ण निर्णय बोर्ड से अनुमोदित कराए जाएंगे। पैकेज के पूर्ण क्रियान्वयन होने तक प्रत्येक बोर्ड बैठक में यह एजेंडा अनिवार्य रूप से जाएगा। अगर जरूरी हुआ तो विशेष बोर्ड बैठकों का आयोजन किया जाएगा। बिल्डर और खरीदारों को सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा।

40 हजार फ्लैट का काम शुरू होगा

अमिताभ कांत समिति की सिफारिशें लागू होने से बिल्डरों के संगठन क्रेडाई के अनुसार 40 हजार फ्लैट बनने शुरू होंगे। बैंक भी रुकी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए एक बार फिर लोन देने के लिए तैयार हैं।

बिल्डर्स को कई राहत
शून्यकाल का लाभ मिलेगा

बकाए की 25 प्रतिशत राशि जमा करने पर बिल्डर को परमिशन टू मॉर्टगेज मिल सकेगा। इससे उन्हें बैंक से ऋण मिलने में आसानी होगी। सभी बकाया राशि का चार्टर्ड अकाउंटेंट से सत्यापन होगा। इसकी पुनर्गणना लीज डीड की शर्तों तथा प्राधिकरण के समय-समय पर जारी आदेशों को शामिल करते हुए की जाएगी। कार्य की सहमति देने वाले तथा कार्य करने वाले बिल्डर की रजिस्ट्री रद्द नहीं की जाएगी।

इन तर्कों के साथ भेजी गई सिफारिशें

अमिताभ कांत समिति ने सिफारिश देने से पहले सभी स्टेक होल्डरों से पांच बैठकें की थीं। इनके बाद सिफारिशों को तय किया। फिर तर्क के साथ सिफारिशें प्रदेश सरकार को भेजी गईं। कहा गया कि रियल इस्टेट एक महत्वपूर्ण सेक्टर है और इससे 200 से अधिक उद्योग जुड़े हैं। इससे बड़ी संख्या में रोजगार सृजन होता है।

निशुल्क समय विस्तार मिलेगा

वर्तमान नीति के अनुसार, सभी नियमों को पूरा करने के बाद प्रचलित दर पर अतिरिक्त एफएआर दिया जाएगा। प्रोजेक्ट को अधिकतम तीन वर्ष में पूरा करना होगा। यह समय विस्तार बिना शुल्क के मिलेगा। यदि कोई बिल्डर तय वक्त के भीतर प्रोजेक्ट को पूरा करने में विफल रहता है तो उस पर कार्रवाई होगी। उस पर तीन वर्ष की अवधि के बाद बकाया राशि पर 20 जुर्माना लगेगा। इसके बाद प्रोजेक्ट को प्राधिकरण द्वारा पूरा कराने का प्रयास किया जाएगा।

शून्यकाल का लाभ मिलेगा

कोरोना काल के तहत बिल्डरों को पहली अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2022 तक शून्य काल का लाभ मिलेगा। ओखला बर्ड सेंचुरी के 10 किलोमीटर के दायरे में एनजीटी के आदेशों के क्रम में 14 अगस्त 2013 से 19 अगस्त 2015 तक जीरो पीरियड का लाभ मिलेगा। यह केस टू केस पर लागू होगा। शून्यकाल का लाभ लेने के बाद बकाया राशि का 25 फीसदी 60 दिनों में जमा करना होगा। शेष 75 प्रतिशत धन साधारण ब्याज के साथ तीन साल में जमा करना होगा।

आंशिक सरेंडर की अनुमति मिलेगी

परियोजना को पूरा करने के लिए सह विकासकर्ता को रखने के लिए अनुमति दी जाएगी। प्राधिकरण का बकाया देने की जिम्मेदारी आवंटी के साथ विकासकर्ता दोनों की रहेगी। परियोजना की अनुपयुक्त भूमि का आंशिक सरेंडर करने की अनुमति होगी। सरेंडर की गई भूमि के लिए पहले से भुगतान की गई राशि को बिल्डर के बकाये के साथ समायोजित करेगा। सरेंडर न करने की दशा में तथा प्राधिकरण का बकाया नहीं देने पर प्राधिकरण आंशिक भाग का अलॉटमेंट एवं रलीज डीड रद्द कर सकेगा।

इस तरह धन जमा करना होगा

100 करोड़ रुपये तक के बकाये की राशि एक वर्ष के अंदर देनी होगी। 500 करोड़ रुपये तक की राशि दो वर्षों तथा इससे अधिक राशि तीन वर्ष में अदा करनी होगी। बिल्डर को दी जाने वाली रियायत तथा प्राधिकरण के बकाये के भुगतान और खरीदारों की रजिस्ट्री आपस में लिंक रहेगी। परियोजना पूरा कराने के लिए बिल्डरों को लाभ दिए गए हैं। उन्हें ऋण लेने के लिए मॉटगेज परमीशन दी जाएगी।

खरीदारों को मालिकाना हक

1. लाभ लेने वाली बिल्डर परियोजना के खरीदारों से अतिरिक्त धन नहीं वसूल किया जाएगा। इसको शर्तों में शामिल किया गया है।
2. बने हुए फ्लैट और बिना ओसी-सीसी के फ्लैट, जिसमें खरीदार रह रहे हैं, उनकी रजिस्ट्री तीन महीने के अंदर हो जाएगी। बकाये का 25 प्रतिशत पैसा जमा करने पर रजिस्ट्री की अनुमति मिलेगी।
3. आवंटियों और बिल्डरों को सुविधा देने के लिए पैकेज तय कर दिए गए। इसके आधार पर आगामी छह महीनों में 30 हजार से 40 हजार आवंटियों को फ्लैट देने का लक्ष्य रखा गया है।
4. इन सिफारिशों के लागू होने से एनसीआर में फंसे करीब 2.40 लाख फ्लैट खरीदारों को राहत मिलेगी। उन्हें मालिकाना हक मिलेगा। आवंटियों के फंसे फ्लैट छह माह में मिलने शुरू होंगे।

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमा ने कहा, 'सरकार ने अमिताभ कांत समिति की सिफारिशों में जो तय किया है, उसको लागू करेंगे। इनके लागू होने से खरीदारों को घर मिल सकेगा और रजिस्ट्री भी हो सकेंगी।'

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