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Hindi News NCRस्कूलों में बम की धमकी : आईएस-आईएसआई के गठजोड़ की तरफ बढ़ी दिल्ली पुलिस की जांच

स्कूलों में बम की धमकी : आईएस-आईएसआई के गठजोड़ की तरफ बढ़ी दिल्ली पुलिस की जांच

आईएस जांच एजेंसियों को चकमा देने को प्रॉक्सी सर्वर और ऐसे इंटरनेट नेटवर्क का इस्तेमाल करता है, जिससे आसनी से कहीं भी बैठकर दूसरे देश की आईपी को शो कराया जा सके। इस धमकी भरे ई-मेल में भी किया गया है।

स्कूलों में बम की धमकी : आईएस-आईएसआई के गठजोड़ की तरफ बढ़ी दिल्ली पुलिस की जांच
Praveen Sharmaनई दिल्ली। रमेश त्रिपाठीFri, 03 May 2024 06:36 AM
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दिल्ली-एनसीआर के सैकड़ों स्कूलों में बम की धमकी मामले की जांच आतंकी संगठन आईएस व पाकिस्तानी खुफिया इकाई आईएसआई के गठजोड़ की तरफ बढ़ रही है। आईएस जांच एजेंसियों को चकमा देने के लिए प्रॉक्सी सर्वर और ऐसे इंटरनेट नेटवर्क का इस्तेमाल करता है, जिससे आसनी से कहीं भी बैठकर दूसरे देश की आईपी को शो कराया जा सके। ठीक इसी तरह इस धमकी भरे ई-मेल में भी किया गया है। साथ ही रूसी कनेक्शन सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटजिक ऑपरेशंस (आईएफएसओ) यूनिट आईपी ऐड्रेस तक पहुंचने के लिए जांच में जुट गई हैं। यूनिट के विशेषज्ञ आतंकी संगठनों द्वारा अमूमन इस्तेमाल किए जाने वाले वीपीएन नेटवर्क को खंगाल रहे हैं।

पहले भी ऐसा मामला सामने आ चुका : सूत्रों ने बताया कि इससे पहले वर्ष 2023 में दिल्ली के एक स्कूल में धमकी भरा ई-मेल भेजे जाने का मामला सामने आया था। उस दौरान भी रूसी कनेक्शन सामने आया था। इस बार भी धमकी का पैटर्न उसी प्रकार का है। 28 नवंबर 2022 और 12 अप्रैल 2023 को सादिक नगर स्थित एक स्कूल को ई-मेल के जरिये धमकी मिली थी। हालांकि, इस मामले में जांच अब भी उलझी हुई है।

अस्थायी ई-मेल आईडी का किया गया इस्तेमाल : अब तक की तफ्तीश के मुताबिक, ये ई-मेल रूस के सर्वर से भेजे गए हैं। खास बात यह है कि इस धमकी भरे मेल को भेजने के लिए अस्थायी ई-मेल आईडी का इस्तेमाल किया गया, जो एक घंटे में ही निष्क्रिय हो जाती है। इस तरह की आईडी बनाने का काम मुख्यत आतंकी संगठन आईएस करता है। इतना ही नहीं, आईएस अक्सर प्रॉक्सी सर्वर का इस्तेमाल कर एजेंसियों को चकमा देने का प्रयास करता है।

मेल भेजने में डार्क वेब का इस्तेमाल होने का शक

दरअसल, जिस ईमेल आईडी johnfoster tutanota.com से धमकी मिली थी, उसका आईईएमआई और एन्ड्रॉयड आईडी जर्मनी के थे। उस वक्त इंटरपोल के जरिए जर्मनी से मिले जवाब में कहा गया था कि इस आईईएमआई और एन्ड्रॉयड आईडी का कोई रिकॉर्ड उनके पास नहीं है। आशंका जताई जा रही है कि ई-मेल भेजने के लिए डार्क वेब का इस्तेमाल किया गया होगा।