
राकेश टिकैत बोले- किसान आंदोलन का हश्र क्या होगा, अभी यह नहीं पता, खेत की तरह करनी होगी आंदोलन की रखवाली
केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसान आंदोलन के छह माह पूरे होने पर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बुधवार को कहा कि यह आंदोलन अभी लंबा चलेगा। कोरोना...
केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसान आंदोलन के छह माह पूरे होने पर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बुधवार को कहा कि यह आंदोलन अभी लंबा चलेगा। कोरोना काल में कानून बन सकते हैं तो समाप्त क्यों नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि सरकार आंदोलन को कुचलने का प्रयास करेगी। आंदोलन का हश्र क्या होगा, अभी यह नहीं पता। अगर आंदोलन असफल हुआ तो सरकार मनमर्जी करेगी और अगर सफल रहा तो किसानों की आने वाली पीढ़ियों को लाभ मिलेगा।
कोरोना काल में सरकार ने क्या किया समझ नहीं आया। ऑक्सीजन देने वाले को लाठी मिली। समझ में नहीं आया कि सरकार देना क्या चाहती थी 400 का इंजेक्शन 40 हजार में बेचा गया। बीमारी के नाम पर देश को लूटा गया। रोटी तिजोरी की वस्तु बन गई है। उसी के नाम पर यह आंदोलन है। हम शांति से आंदोलन बढ़ाएंगे। ये आंदोलन 2024 तक भी चल सकता है। किसानों को इसके लिए उसी तरह तैयार रहना है जैसे वो फसलों की तैयारी करते हैं।
प्रशासन तंग करेगा तो गांवों में इलाज करेंगे
टिकैत ने कहा कि अगर गांवों में बैठे लोग नहीं आएंगे तो आंदोलन कैसे चलेगा। आंदोलन की रखवाली खेत की तरह करनी पड़ेगी। यहां ट्रॉलियां, बांस, चारपाई सहित अन्य सामान चाहिए। चंदा गांव से आ रहा है। आंदोलन लंबा चलाना है तो सामानों को बर्बाद नहीं करना होगा। सफेद झंडा कल लगेगा। शांति से वार्ता और आंदोलन दोनों जारी रहेंगे। हर महीने 26 तारीख आती है। उन्होंने कहा कि वह धरनास्थल पर पानी-बिजली नही कटने देंगे। प्रशासन तंग करेगा तो गांवों में इलाज करेंगे।
किसानों ने मनाया 'काला दिवस' पर काले झंडे लहराए
बता दें कि, केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने अपने आंदोलन के छह माह पूरे होने पर बुधवार को 'काला दिवस' मनाया और इस दौरान उन्होंने काले झंडे फहराए, सरकार विरोधी नारे लगाकर पुतले जलाए और प्रदर्शन किया। दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर गाजीपुर में सैकड़ों की संख्या में किसान भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) नेता राकेश टिकैत की अगुवाई में समूहों में बंट गए और उन्होंने विरोध प्रदर्शन करने हुए केन्द्र का पुतला जलाया। इस बीच स्थानीय पुलिस ने दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस-वे के नीचे यूपी गेट पर पुतला जलाने की कोशिश कर रहे किसानों को रोकने की कोशिश की और इस दौरान वहां थोड़ी देर के लिए अफरा-तफरी मच गई। भाकियू समर्थक हाथों में काले झंडे लिए हुए थे, कई लोगों के हाथों में तख्तियां थीं जिनमें सरकार की निंदा वाले नारे लिखे हुए थे और उन्होंने तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की।
दिल्ली पुलिस ने लोगों से कोरोना वायरस संक्रमण से हालात और लागू लॉकडाउन के मद्देनजर इकट्ठे नहीं होने की अपील की और कहा कि प्रदर्शन स्थल पर किसी भी स्थिति से निपटने के लिए वह कड़ी नजर बनाए हुए है।
गौरतलब है कि मंगलवार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा को कथित तौर पर प्रदर्शनकारी किसानों द्वारा कोविड-19 नियमों का उल्लंघन करने पर नोटिस भेजा था। वहीं दिल्ली पुलिस ने भी संक्रमण से हालात और लॉकडाउन के मद्देनजर इकट्ठा नहीं होने की अपील की थी।

लेखक के बारे में
Praveen Sharmaप्रवीण शर्मा लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। करीब डेढ़ दशक से हिंदी पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे प्रवीण साल 2014 में डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले प्रिंट मीडिया का अनुभव भी हासिल कर चुके हैं। एक दशक से भी अधिक लंबा समय वह डिजिटल मीडिया में बिता चुके हैं।
प्रवीण ने अपने करियर की शुरुआत हरिभूमि अखबार से की थी। इसके बाद वह थोड़े समय नेशनल दुनिया अखबार में भी रहे। वहां से निकलकर उन्होंने मार्च 2014 में न्यूज 18 के साथ डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में कदम रखा। वर्ष 2018 में वह लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े।
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प्रवीण मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के निवासी हैं, लेकिन इनका जन्म और स्कूली शिक्षा दिल्ली से हुई है। हालांकि, पत्रकारिता की पढ़ाई इन्होंने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से की है।
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