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दिल्ली में सबसे ज्यादा चमके चंदोलिया, उदित राज का किया बुरा हाल; क्यों यह जीत है खास

उत्तर पश्चिमी लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी योगेन्द्र चंदोलिया ने दिल्ली में सबसे बड़ी जीत (2.90 से) हासिल की है। रुझान आने के साथ ही उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी उदित राज को पीछे छोड़ दिया।

दिल्ली में सबसे ज्यादा चमके चंदोलिया, उदित राज का किया बुरा हाल; क्यों यह जीत है खास
yogendra chandolia
Sudhir Jhaहिन्दुस्तान,नई दिल्लीWed, 05 Jun 2024 05:18 AM
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उत्तर पश्चिमी लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी योगेन्द्र चंदोलिया ने दिल्ली में सबसे बड़ी जीत हासिल की है। मतगणना के पहले रुझान आने के साथ ही उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी उदित राज को पीछे छोड़ दिया। मतगणना के हर दौर के साथ ही उनकी जीत का अंतर बढ़ता रहा। अंत में उन्होंने उदित राज को 2.90 लाख से अधिक वोट से हराया। चंदोलिया को कुल 866483 वोट मिले जबकि उदित राज 575634 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे।

दिल्ली में भाजपा के लिए लंबे समय से काम कर रहे और उत्तरी दिल्ली नगर निगम के मेयर रह चुके योगेन्द्र चंदोलिया को पार्टी ने पहली बार उत्तर पश्चिमी दिल्ली सीट से उम्मीदवार बनाया था। योगेन्द्र ने अपने चुनाव अभियान में स्थानीय मुद्दों, विकास परियोजनाओं के साथ-साथ राष्ट्र स्तर के मुद्दों को भी जमकर उठाया। पार्टी के वरिष्ठ नेता भी उनके अभियान में शामिल रहे। इसका परिणाम मतगणना में देखने को मिला है।

चुनौती में भी नहीं दिखाई दिए उदित राज
आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच हुए गठबंधन के चलते माना जा रहा था कि उदित राज कुछ चुनौती पेश कर सकते हैं, लेकिन मतगणना के पहले दौर से ही योगेन्द्र चंदोलिया ने उन्हें मुकाबले से बाहर कर दिया। सुबह सवा नौ बजे के लगभग उनकी बढ़त पांच हजार 78 मतों की थी। सवा दस बजे यह अंतर बढ़कर 18 हजार मतों से ज्यादा का हो गया। दोपहर बाद वे उदित राज से 86 हजार से ज्यादा मतों से आगे हो गए।

एकमात्र सुरक्षित सीट
उत्तरी पश्चिमी लोकसभा सीट दिल्ली में इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिल्ली की एकमात्र सुरक्षित सीट है। यहां पर कुल मिलाकर दस विधानसभा क्षेत्र हैं, जिनमें से बवाना, सुल्तानपुर माजरा, और मंगोलपुरी विधानसभा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। इसके अलावा नरेला, बादली, रिठाला, मुंडका, किराड़ी, नांगलोई जट और रोहिणी विधानसभा सीट इसमें शामिल हैं। इसमें से नरेला के अलावा बाकी विधानसभा सीटें आम आदमी पार्टी के पास है।

टिकट को लेकर हुआ था विरोध
उदित राज के टिकट को लेकर कांग्रेस के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया था, लेकिन उन्होंने इन सब बाधाओं को दूर करते हुए मेहनत के साथ चुनाव लड़ा, लेकिन हार मिली।

शहर के साथ गांव को भी साधने की थी चुनौती
दिल्ली की उत्तर पश्चिमी सीट पर शहर के साथ-साथ दिल्ली देहात को भी साधने की चुनौती थी। यहां पर जहां एक तरफ जहांगीरपुरी और मुंडका जैसे घनी आबादी वाले, कच्ची कॉलोनियों वाले क्षेत्र थे, वहीं बवाना और नरेला जैसे औद्योगिक क्षेत्र भी इसमें थे। इस संसदीय क्षेत्र में दिल्ली देहात के भी काफी इलाके आते हैं। इसलिए यहां पर प्रत्याशी के लिए शहरी क्षेत्र के साथ-साथ ग्रामीण इलाके के मतदाताओं को भी लुभाने की चुनौती रहती है।

जाम और जलभराव भी बड़ी समस्या
इस इलाके के कई प्रमुख मार्गों पर जाम और जलभराव की बड़ी समस्या है। आए दिन लोग यह मुद्दे उठाते रहते हैं। इसलिए चंदोलिया को इन मुद्दों का भी समाधान निकालना होगा।

दिल्ली देहात को चाहिए किसान का दर्जा
दिल्ली में खेती करने वालों को किसान का दर्जा प्राप्त नहीं है। इसके चलते किसानों को मिलने वाली तमाम सुविधाएं दिल्ली में खेती करने वालों को नहीं मिलती है। दिल्ली देहात के लोग लगातार ही दिल्ली में खेती करने वालों को किसानों को दर्जा दिए जाने की मांग करते रहे हैं, ताकि उन्हें भी किसानों को मिलने वाली तमाम सुविधाएं मिल सकें।

वहीं, इस संसदीय क्षेत्र में बवाना, नरेला, मुंडका जैसे औद्योगिक क्षेत्र हैं। जहां पर बड़ी संख्या में कामगार काम करते हैं। और उनकी समस्याएं अलग हैं। इसलिए यहां पर प्रत्याशी के सामने किसान और मजदूर दोनों को ही साधने की चुनौती होती है। हालांकि, इसको लेकर पार्टी और प्रत्याशी की ओर से पहले ही रणनीति बना ली गई थी। पार्टी नेताओं का कहना है कि उसी वजह से चंदोलिया को यहां जीत मिली है। उन्होंने दावा किया कि जनहित के तमाम मुद्दों को प्रमुखता से उठाएंगे और उनकी समस्याओं का समाधान कराएंगे।

प्रदूषण का मुद्दा छाया रहा
उत्तर पश्चिमी सीट के लिए प्रदूषण का मुद्दा भी बेहद महत्वपूर्ण है। यहां पर भलस्वा जैसी लैंडफिल साइट मौजूद है। जहां पर कचरे का एक बड़ा पहाड़ जमा है। इस लैंडफिल साइट में आए दिन ही आग लगती रहती है, जिसके चलते लोगों को प्रदूषण की समस्या का भी सामना करना पड़ता है। इसके चलते प्रत्याशी अपनी प्रमुख घोषणाओं में प्रदूषण को कम करने को भी शामिल करते रहे हैं।