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आकाश आनंद के लिए गृह जनपद में BSP का खोया वर्चस्व हासिल करना चुनौती

आकाश गृह जनपद गौतमबुद्धनगर और बसपा का गढ़ रहे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खोया वर्चस्व हासिल करने के लिए कड़ा संघर्ष करना होगा। गौतमबुद्धनगर जिले में बसपा के सिंबल पर जीता एक भी जनप्रतिनिधि नहीं है।

आकाश आनंद के लिए गृह जनपद में BSP का खोया वर्चस्व हासिल करना चुनौती
Praveen Sharmaनोएडा। निशांत कौशिकTue, 12 Dec 2023 06:51 AM
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बहुजन समाज पार्टी (BSP) के नए सर्वेसर्वा के रूप में आकाश आनंद का नाम घोषित हो चुका है। बसपा के युवराज आकाश आनंद के सामने अब खुद को साबित करने की चुनौती है। आकाश आनंद गृह जनपद गौतमबुद्धनगर और बसपा का गढ़ रहे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खोया वर्चस्व हासिल करने के लिए कड़ा संघर्ष करना होगा। गौतमबुद्धनगर जिले में बसपा के सिंबल पर जीता एक भी जनप्रतिनिधि नहीं है। साथ ही पुराने दिग्गज साथी भी बसपा का साथ छोड़ चुके हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती के लिए गौतमबुद्धनगर की राजनीति हमेशा प्रतिष्ठा का विषय रही है। मायावती का गृह जनपद होने के कारण बसपा ने हमेशा दूसरे दलों को चुनाव में कड़ी टक्कर दी, लेकिन सपा से चुनाव हारने के बाद बसपा की जमीनी पकड़ ढीली होती गई।

नए परिसीमन के बाद बनी गौतमबुद्धनगर लोकसभा सीट पर पहला चुनाव वर्ष 2009 में हुआ था। इसमें बसपा प्रत्याशी सुरेन्द्र नागर जीते थे। 2014 के चुनाव से पहले ही वह पार्टी का साथ छोड़ गए। वह अब भाजपा के राष्ट्रीय सचिव और राज्यसभा सांसद हैं। उनके अलावा एमएलसी अनिल अवाना, पूर्व मंत्री वेदराम भाटी, जिला पंचायत चेयरमैन जयवती नागर और उनके के पति गजराज नागर, पूर्व विधायक होराम सिंह, पूर्व जिलापंचायत अध्यक्ष बाला देवी, संजीव त्यागी, एडवोकेट राम शरण नागर, वीरेंद्र डाढ़ा एक-एक कर बसपा से अलग होते गए। दादरी से दो बार बसपा से विधानसभा चुनाव जीते सतवीर गुर्जर भी बसपा से निकल गए। ऐसे में अपने गृह जनपद में ही बसपा चुनाव हारती गई और वर्तमान में लोकसभा, राज्यसभा, एमएलसी और जिला पंचायत की सभी सीटों पर भाजपा काबिज है। आकाश आनंद के लिए सबसे पहली चुनौती गौतमबुद्धनगर में खुद को साबित करने की है।

कांशी राम ने मायावती को सौंपी थी कमान

1984 में कांशी राम ने बहुजन समाज पार्टी की स्थापना की थी। उन्होंने मायावती को सियासी वारिस बनाया। 1993 के विधानसभा चुनाव में बीएसपी की पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर धमक दिखी। पार्टी ने यूपी विधानसभा चुनाव में 67 सीटों पर जीत हासिल की थी। बीएसपी की ताकत दलित और मुस्लिम समीकरण रहा। 1995 में मायावती पहली बार यूपी की मुख्यमंत्री बनीं। हालांकि, वह 4 महीने तक ही सत्ता में रहीं। 1997 में वह दूसरी बार सीएम बनीं और इस बार भी महज छह महीने कुर्सी पर रह पाईं। 2002 में मायावती तीसरी बार सीएम बनीं और 15 महीने तक मुख्यमंत्री रहीं।

पहली बार 2007 में मिला पूर्ण बहुमत

2007 में 206 सीटों पर जीत हासिल कर पहली बार बसपा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई। लेकिन इसके बाद प्रदर्शन फीका रहा। पार्टी 2012 में सिर्फ 80 सीटें जीत सकी। 2014 के लोकसभा चुनाव में बसपा को एक भी सीट नहीं मिली। 2017 के विधानसभा चुनाव में मात्र 19 सीटों पर ही पार्टी जीती। 2019 में सपा से गठबंधन का बसपा को लाभ मिला। लोकसभा चुनाव में बसपा ने दस सीट जीतीं। 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा को फिर झटका लगा और पूरे प्रदेश में एकमात्र बलिया की रसड़ा विधानसभा सीट जीतने में सफल हो पाई।

सहारनपुर या बिजनौर से लड़ सकते हैं चुनाव

बसपा के वरिष्ठ नेताओं की मानें तो आने वाले लोकसभा चुनाव में आकाश आनंद पश्चिमी उत्तर प्रदेश से ही सियासी रण में उतरेंगे। माना जा रहा है कि वह सहारनपुर या बिजनौर में से लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं। सहारनपुर बसपा का पुराना गढ़ है और मायावती स्वयं यहां की हरौड़ा विधानसभा सीट से जीत कर मुख्यमंत्री बनती रही हैं। बिजनौर भी बसपा सुप्रीमो मायावती का पुराना कर्मक्षेत्र रहा है। 1989 में बसपा सुप्रीमो सबसे पहले बिजनौर लोकसभा सीट से ही संसद पहुंची थीं। ऐसे में दोनो ही सीटों को आकाश आनंद के लिए अच्छा माना जा रहा है। हालांकि पार्टी ने इस संबंध में अभी कोई टिप्पणी नहीं की है।