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देशद्रोह में आरोपी शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज, किस पक्ष ने क्या दी दलीलें?

अदालत ने शरजील इमाम को जमानत नहीं देने का फैसला किया है। कड़कड़डूमा अदालत ने देशद्रोह के मामले में आरोपी शरजील इमाम की वैधानिक जमानत याचिका को शनिवार को खारिज कर दिया। पढ़ें यह रिपोर्ट...

देशद्रोह में आरोपी शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज, किस पक्ष ने क्या दी दलीलें?
Krishna Singhहिन्दुस्तान,नई दिल्लीSat, 17 Feb 2024 09:39 PM
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देशद्रोह के मामले में आरोपी शरजील इमाम की वैधानिक जमानत याचिका को कड़कड़डूमा अदालत ने शनिवार को खारिज कर दिया। मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने शरजील को जमानत न देने का फैसला किया है। आरोपी शरजील पर सीएए व एनआरसी से संबंधित प्रदर्शनों के दौरान जामिया इलाके में और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में भड़काऊ भाषण देने के चलते यूएपीए के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। 

शरजील इमाम की ओर से मामले में अब तक बिताई गई अवधि के आधार पर वैधानिक जमानत की मांग की गई थी। उसके मुताबिक वह पिछले चार साल से हिरासत में है। यह उसे मिलने वाली अधिकतम सजा की आधी से ज्यादा अवधि है।

गौरतलब है कि शरजील इमाम उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई साम्पद्रायिक हिंसा की साजिश का आरोपी है। कड़कड़डूमा स्थित विशेष न्यायाधीश समीर बाजपेयी की अदालत ने बचाव पक्ष के वकील और अभियोजन की दलीलों सुनने के बाद 14 फरवरी को जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय ने 30 जनवरी को निचली अदालत को उसकी जमानत याचिका पर 10 दिनों के भीतर फैसला करने का निर्देश दिया था। शरजील इमाम ने सीआरपीसी की धारा 436 ए के तहत वैधानिक जमानत की मांग करते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

विशेष अदालत ने सात फरवरी 2024 को नए सिरे से जमानत याचिका पर सुनवाई शुरु की थी। इस मामले में शरजील इमाम को 28 जनवरी 2020 को उसके गृहनगर जहानाबाद, बिहार से गिरफ्तार किया गया था। वहां से लाकर शरजील इमाम को पटियाला हाउस अदालत में पेश किया गया था। तभी से वह न्यायिक हिरासत में जेल में है। इस मामले में बचाव पक्ष का कहना था कि उच्च न्यायालय ने इस मामले में देशद्रोह के आरोपों पर रोक लगाई हुई है। 

इस पर सरकारी वकील ने दलील दी थी कि यह रोक अस्थाई तौर पर लगी है। इस मसले पर उच्च न्यायालय में सुनवाई जारी है इसलिए इस तर्क के आधार पर जमानत नहीं मांगी जा सकती। वहीं, बचाव पक्ष ने दूसरा तर्क दिया कि उनका मुवक्किल पिछले चार साल से जेल में है। ऐसे में वह जमानत पाने का अधिकारी है। जबकि सरकारी वकील का कहना था कि साम्प्रदायिक हिंसा की साजिश एक गंभीर मुद्दा है। इस साजिश के कथित आरोपी को राहत नहीं दी जा सकती।

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