ट्रेंडिंग न्यूज़

अगला लेख

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

Hindi News NCR'गलत' डॉक्टरों से इलाज, इमरजेंसी एग्जिट भी नहीं; मासूमों को निगलने वाले अस्पताल को लेकर कई खुलासे

'गलत' डॉक्टरों से इलाज, इमरजेंसी एग्जिट भी नहीं; मासूमों को निगलने वाले अस्पताल को लेकर कई खुलासे

बताया जा रहा है कि अस्पताल में लगातार कई लापरवाही बरती जा रही थी और बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा था। 

'गलत' डॉक्टरों से इलाज, इमरजेंसी एग्जिट भी नहीं; मासूमों को निगलने वाले अस्पताल को लेकर कई खुलासे
baby care hospital fire pti
Aditi Sharmaलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीMon, 27 May 2024 10:32 AM
ऐप पर पढ़ें

दिल्ली के बेबी केयर अस्पताल अग्निकांड से हर कोई सदमे में है। इस हादसे में 7 नवजात मासूमों ने अपनी जान गंवा दी जबकि पांच का इलाज चल रहा है। यह आग इतनी भीषण थी कि पूरा अस्पताल खंडहर में तब्दील हो गया। बेबी केयर अस्पताल का मालिक गिरफ्तार कर लिया गया है। उस पर बच्चों की जान जोखिम में डालने का आरोप लगा है। वहीं अब इस मामले से जुड़े कई बड़े खुलासे हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि अस्पताल में लगातार कई लापरवाही बरती जा रही थी और बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा था। 

अस्पताल का लाइसेंस खत्म हो चुका था लेकिन इसके बावजूद अस्पताल चल रहा था। इसके अलावा जो एक्सपायर लाइसेंस था उसमें भी अस्पताल को केवल 5 बेड की ही इजाजत मिली हुई थी लेकिन वहां 25-30 बच्चों का इलाज किया जाता था। जानकारी के मुताबिक मौके से 32 ऑक्सीजन सिलेंडर बरामद हुए हैं जबकि यहां 5 बेड के हिसाब से ही ऑक्सीजन सिलेंडर होने चाहिए थें। इसके अलावा अस्पताल में ना तो इमरजेंसी एग्जिट था और ना ही आग बुझाने का कोई इंतजाम। इसके अलावा इस अस्पताल को फायर सर्विस की तरफ से एनओसी भी नहीं दिया गया था। सबसे परेशान करने वाली बात यह है कि बच्चों का इलाज ऐसे डॉक्टर कर रहे थे जो इसके लिए क्वालिफाई भी नहीं थे। इन डॉक्टरों के पास बैचलर ऑफ आयुर्वेदि मेडिसिन एंड सर्जरी थी। यानी इनमें से कोई भी बच्चों का डॉक्टर नहीं था। 

अग्निशमन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अस्पताल के पास फायर क्लीयरेंस नहीं था। डीएफएस के एक अधिकारी ने नाम न छापने का अनुरोध करते हुए कहा, "इमारत के पास कोई फायर एनओसी नहीं है। बाकी हम सोमवार को एनओसी से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच करेंगे।" अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने अस्पताल के मालिक डॉ. नवीन किची को गिरफ्तार कर लिया है, जो शनिवार देर रात आग लगने की घटना के बाद से फरार था। दिल्ली सरकार ने अग्निकांड की मजिस्ट्रेटी जांच के भी आदेश दिए हैं।

बच्चों के परिवार ने लगाई इंसाफ की गुहार

घटना के बाद, शाहदरा की जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) रितिशा गुप्ता असपताल गई तो वहां अपने बच्चों को खो चुके परिवारों ने खूब गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने 'हमें इंसाफ चाहिए' के नारे लगाए। अपने 10 दिन के बच्चे को खोने वाले रितिक ने कहा, "यहां आने वाला हर अधिकारी चुप्पी साधे हुए है। उनके पास कोई जवाब नहीं है कि क्या अस्पताल वैध था, क्या अस्पताल के पास अग्निशमन विभाग से कोई एनओसी थी।"

एक निवासी मुकेश बंसल ने दावा किया कि इमारत में अवैध ऑक्सीजन रिफिलिंग सिलेंडर का काम किया जा रहा था। बंसल ने कहा, "हमने स्थानीय पार्षद से भी इसकी शिकायत की थी। लेकिन कुछ नहीं किया गया। यह सब पुलिस की नाक के नीचे हो रहा था।"बंसल ने यह भी कहा कि वह अस्पताल के बगल में रहते थे लेकिन सिलेंडर रिफिलिंग के 'अवैध' काम के कारण वह अगली गली में चले गए।

पुलिस ने कहा कि वे दावे की जांच कर रहे हैं। जिला मजिस्ट्रेट (शाहदरा) द्वारा दिल्ली मंडल आयुक्त को सौंपी गई एक रिपोर्ट के अनुसार, घटना के समय अस्पताल में 12 बच्चे भर्ती थे। एक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 11 को आसपास के अस्पताल में ले जाया गया, जहां छह को मृत घोषित कर दिया गया।

मृतक बच्चों में चार लड़के और तीन लड़कियां शामिल हैं। 25 दिन के एक लड़के को छोड़कर सभी 15 दिन के थे। दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) के अधिकारियों ने कहा कि आग शनिवार रात करीब 11:30 बजे बेबी केयर न्यू बोर्न अस्पताल में लगी और जल्द ही आसपास की दो अन्य इमारतों में फैल गई।

संभागीय अग्निशमन अधिकारी राजेंद्र अटवाल ने कहा कि आग पर काबू पाने के लिए 16 दमकल गाड़ियों को लगाया गया। उन्होंने बताया कि दो मंजिला इमारत में रखे ऑक्सीजन सिलेंडर फट गए जिससे आसपास की इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं। पुलिस ने कहा कि जांच के दौरान यह भी पता चला कि अस्पताल की दिल्ली के पंजाबी बाग और हरियाणा के फरीदाबाद और गुरुग्राम में ऐसी तीन और ब्रांच हैं।