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अवैध खनन से अरावली को कितना हुआ नुकसान? ऐसे पता लगाएगी खट्टर सरकार, रिवाइवल का प्लान तैयार

अवैध खनन की वजह से अरावली पर्वतों को कितना नुकसान हुआ है इसका पता खट्टर सरकार ग्राउंड-ट्रुथिंग के जरिए लगाएगी। संरक्षित वन भूमि को बहाल करने की प्रक्रिया में यह पहला ऐसा कदम है।

अवैध खनन से अरावली को कितना हुआ नुकसान? ऐसे पता लगाएगी खट्टर सरकार, रिवाइवल का प्लान तैयार
Sneha Baluniलाइव हिन्दुस्तान,गुरुग्रामTue, 20 Feb 2024 09:19 AM
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मनोहर लाल खट्टर सरकार अरावली में अवैध खनन की वजह से हुए नुकसान का पता लगाएगी। इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों के रिवाइवल (पुनर्जीवित)  के लिए 'ग्राउंड-ट्रुथिंग' (जमीनी सच्चाई) का पता लगाना शुरू कर दिया गया है। संरक्षित वन भूमि को बहाल करने की प्रक्रिया में यह पहला ऐसा कदम है। यह सर्वे हर उस जिले में किया जाएगा जिसमें अरावली का एक हिस्सा है, जैसे- गुड़गांव, नूंह, फरीदाबाद, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, चरखी दादरी और भिवानी।

'ग्राउंड-ट्रुथिंग' में सरकारी टीमें खनन से प्रभावित क्षेत्रों और संवेदनशील क्षेत्रों का नक्शा बनाने के लिए ड्रोन का उपयोग करेंगी। भूमि के स्वामित्व, वनस्पतियों और जीवों की सीमा, ठोस अपशिष्ट डंपिंग और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील जंगलों को खतरा पैदा करने वाली किसी भी चीज पर रिपोर्ट तैयार करेंगी। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष पी राघवेंद्र ने कहा, 'हमारी टीमें हर उस साइट का दौरा कर रही हैं जिसे रिवाइव करने की जरूरत है। फील्ड कार्य पूरा होने के बाद, हम वहां की समस्या के आधार पर विशिष्ट क्षेत्रों के लिए योजनाएं तैयार कर सकते हैं। हर क्षेत्र की अपनी-अपनी दिक्कत है।'

सरकार सर्वे के लिए पर्यावरण मुआवजे से इकट्ठा हुई राशि का इस्तेमाल करने की योजना बना रही है, जो खनन से प्रभावित अरावली क्षेत्रों को बहाल करने और भविष्य में नियमों के उल्लंघनों से रोकने के लिए एनजीटी के निर्देश का पालन किया जाएगा। बता दें कि 2009 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसरा,  गुड़गांव, फरीदाबाद और नूंह की पहाड़ियों में खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। हालांकि, आदेश के अमल में कमी के कराण पत्थरों का अवैध उत्खनन होता रहता है, जिनमें से अधिकांश का उपयोग रियल एस्टेट में होता है।

अधिकारियों का कहना कि वेटलैंड के रूप में पहचाने गए क्षेत्रों में गाद जमा होने पर उन्हें रिचार्ज किया जाएगा। इन क्षेत्रों के आसपास घास के मैदान भी विकसित किये जा सकते हैं। इनमें से कुछ हिस्सों को अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में काटे गए पेड़ों को 10 साल के लिए आवश्यक वनीकरण योजना से लाभ मिलेगा। इनमें से अधिकांश क्षेत्रों को पहले ही संरक्षित वनों के रूप में अधिसूचित किया जा चुका है, जिन्हें भारतीय वन अधिनियम और वन संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित किया जाएगा।

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