DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

जेवर एयरपोर्ट के पास अपैरल पार्क से मिलेंगे पांच लाख नए रोजगार

Jewar Airport (Symbolic Image)

जेवर में बनने वाले एयरपोर्ट के पास अपैरल (गारमेंट) पार्क बनेगा। इस पार्क की इकाइयों में एयरपोर्ट से प्रभावित गांवों के बेरोजगारों सहित करीब पांच लाख लोगों को रोजगार का अवसर मिलेगा। 

इंटरनेशनल गारमेंट फेयर संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने पिछले दिनों लखनऊ मेंमुख्यमंत्री से मुलाकात की। उन्होंने इस पार्क के लिए नोटिफिकेशन जारी करने के साथ साथ सब्सिडी देने की मांग उठाई। उद्यमियों का दावा है कि मुख्यमंत्री ने इस पार्क के प्रस्ताव को कैबिनेट में रखकर पास कराने का आश्वासन दिया है।

प्रदेश और केंद्र सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट में जेवर में बनने वाला एयरपोर्ट शामिल है। इस एयरपोर्ट के बनने से जहां दिल्ली और नोएडा सीधे जुड़ेगे, वहीं एयरपोर्ट के आसपास भी उद्योग धंधे लगाने के लिए भी कई कंपनियों के यहां आने से रोजगार के अवसर खुलेंगे। 

एयरपोर्ट बनने के घोषणा के बाद से ही यहां पर अपैरल पार्क बनाने की घोषणा हुई थी। हालांकि पार्क बनने की फाइल काफी समय तक अटकी रही। अब इसके लिए इंटनेशनल गारमेंट फेयर के प्रतिनिधि मंडल ने फिर से कवायद शुरू कर दी है। पिछले दिनों इंटरनेशनल गारमेंट फेयर के ललित ठकराल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। प्रतिनिधिमंडल ने सीएम को बताया था कि अपैरल पार्क बनने से एयरपोर्ट से प्रभावित गांवों के लोगों के लिए रोजगार के अवसर खुलेंगे। इसके बनने से करीब पांच लाख लोगों को रोजगार मिल सकेगा। 

मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ललित ठकराल ने कहा कि यमुना एक्सप्रेस-वे यूपी का रोजगार द्वार बना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें आश्वासन दिया है कि जमीन की वैल्यू और अन्य चीजों के प्रस्ताव को वह जल्द ही कैबिनेट में रखेंगे। इसके बाद अलॉटमेंट की प्रक्रिया को शुरू किया जाएगा।

इस पार्क के निर्माण होने पर हम महिलाओं को ट्रेनिंग देंगे और उसके बाद उन्हें रोजगार के अवसर प्रदान करेंगे। इस पार्क को बनाने में जिला प्रशासन और प्राधिकरण पूरा सहयोग करेंगे।

हैंडीक्राफ्ट को मनरेगा से जोड़ने की तैयारी

एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट के महानिदेशक राकेश कुमार ने बताया कि हैंडीक्राफ्ट को मनरेगा से जोड़ने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। ताकि गांव में रहने वाले मजदूर 90 दिन के बजाय अधिक दिनों तक काम कर सके। ऐसे में हैंडीक्राफ्ट के दामों में भी कमी आ सकती है। इसके अलावा देशभर कई काम हो रहे हैं।

पाक और चीन सीमा के गांवों को भी फायदा होगा

एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट के महानिदेशक राकेश कुमार ने बताया कि चीन की सीमा से सटे माना गांव में भेड़ की खाल से बने उत्पादों का अधिक प्रयोग होता है। लेकिन वहां पर आजीविका के साधन कम होने के कारण ईपीसीएस ने योजना बनाई है कि माना गांव में बनने वाले उत्पादनों को पाकिस्तान सीमा से सटे बाडमेर में काम करने वाली महिलाओं से उसे विशेष तौर पर बनवाया जाए। इस काम के लिए ईपीसीएस के 22 लोगों का एक दल लगा हुआ है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Apparel Park will get five lakh new jobs near Jewar Airport