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27 फरवरी, 2020|1:29|IST

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अलविदा 2019 : घर के लिए धक्के खाते बीता खरीददारों का एक और साल

हजारों फ्लैट खरीददारों के लिए वर्ष 2019 भी धक्के खाते-खाते बीत गया। आम्रपाली, जेपी, यूनिटेक आदि के प्रोजेक्ट में फंसे लोग साल भर प्राधिकरण से लेकर कोर्ट तक के चक्कर लगाते रहे। हालांकि केंद्र और यूपी सरकार ने साल के अंत में 25 हजार करोड़ रुपए के स्ट्रेस फंड और जीरो पीरियड का लाभ देने की घोषणा की। आने वाले साल में ये कदम घर पर कब्जा मिलने की उम्मीद लगाए लोगों के लिए कारगर होंगे, ऐसी उम्मीद है।

रियल स्टेट क्षेत्र में इस साल भी उछाल नहीं आ पाया। आर्थिक मंदी, पैसों का डायवर्जन दूसरी परियोजनाओं में करने के बाद संकट समेत कई वजहों से बिल्डर परियोजनाओं में काम शुरू नहीं कर सके। इसका खामियाजा लोगों को फ्लैट नहीं मिलने के रूप में भुगतना पड़ रहा है। इस साल भी फ्लैट पाने के लिए खरीदार बिल्डर, जनप्रतिनिधि और प्राधिकरण के अधिकारियों के बीच चक्कर काट रहे हैं।

इस साल जनवरी से अब तक नोएडा प्राधिकरण ने कई परियोजनाओं के 7700 और ग्रेटर नोएडा में 13 हजार फ्लैट के लिए कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी किए हैं। नोएडा-ग्रेनो क्षेत्र में ढाई से तीन लाख खरीदार फ्लैट पाने के लिए धक्के खा रहे हैं।

नोएडा-ग्रेनो क्षेत्र में 2008-09 के आसपास ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं में बिल्डरों ने फ्लैट की बुकिंग शुरू की थी। वर्ष 2012 के तक अधिकतर फ्लैट बिल्डरों ने बुक कर दिए थे। ऐसे में लोगों का 2011 से 2015 तक सभी खरीदारों को फ्लैट मिल जाने चाहिए थे लेकिन अब 2019 समाप्त हो चुका है लेकिन नोएडा क्षेत्र के एक लाख खरीदार फ्लैट पाने के लिए धक्के खा रहे हैं। प्राधिकरण, रेरा व सरकार के लगातार दबाव के बाद भी अधिकतर खरीदारों को डेढ़ से पांच साल तक समय में ही फ्लैट मिलने की उम्मीद नहीं है। नोएडा क्षेत्र में इस साल 7700 फ्लैट के लिए कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी किए हैं। ऐसे में इतने लोगों को बिल्डर सोसाइटियों में रहने के लिए आशियाना मिल गया।

बेशक करीब पौने तीन साल में नोएडा प्राधिकरण ने 30161 फ्लैट के लिए कंपलीशन सर्टिफिकेट जारी कर दिया लेकिन बिल्डरों ने इनमें से 16 हजार फ्लैट की ही रजिस्ट्री कराई है। ऐसे में लोगों को मालिकाना हक नहीं मिल पाया है।

बड़ी बिल्डर परियोजनाओं के खरीदार खाली हाथ : नोएडा-ग्रेनो क्षेत्र में जिन बिल्डर परियोजनाओं के खरीदारों को फ्लैट का इंतजार है उनमें आम्रपाली, यूनिटेक और जेपी के खरीदार शामिल हैं। इन तीनों बिल्डर परियोजनाओं में 65 से 70 हजार खरीदार शामिल हैं। कुछ संख्या में जेपी की परियोजनाओं में खरीदारों को मकान मिले हैं।

ये होता तो बात बनती

मुख्यमंत्री के दावे को गंभीरता से लेते : प्रदेश में सत्ता में आने पर मुख्यमंत्री ने सितंबर 2017 में दावा किया गया था कि जिले के तीनों प्राधिकरण क्षेत्र में दिसंबर 2017 से 50 हजार लोगों को घर दे दिए जाएंगे लेकिन मुश्किल से 20 हजार लोगों को ही घर मिल पाया। इसके बाद जनवरी 2018 में मुख्यमंत्री ने दावा किया मार्च 2018 तक 80 हजार लोगों को घर दे दिए जाएंगे लेकिन यह दावा आज तक अधूरा है। अगर मुख्यमंत्री के दावे के आधार पर बिल्डर व अधिकारी गंभीरता से काम करते तो शायद अधिक लोगों को घर मिल जाते। 

2019: चार उपलब्धि

1. रेरा की सख्ती से घर मिलने शुरू हुए
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बिल्डर परियोजनओं में कब्जा और सुविधाएं नहीं मिलने पर रेरा सुनवाई कर रहा है। रेरा ने कई मामलों में बहुत सख्ती दिखाई है। इस साल भी कई मामलों में रेरा ने नोटिस जारी कर फ्लैट खरीदारों को घर दिलाने का प्रयास किया है। इसके कारण कई लोगों को अपने घर मिले हैं। रेरा की सख्ती के कारण बिल्डरों ने अपनी-अपनी परियोजनाओं में धीरे-धीरे काम करना शुरू कर दिया है। आने वाले साल में बिल्डरों पर रेरा का शिकंजा और कसेगा, इससे भी लोगों को जल्दी घर मिलने की उम्मीद बनेगी।

2. नोएडा और ग्रेनो में बंद पड़ी फ्लैट की बिक्री शुरू 
बीते सालों के मुकाबले इस साल नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में बंद पड़ी फ्लैटों की बिक्री होनी शुरू हो गई है। ऐसे में इस क्षेत्र में इस साल रियल स्टेट अंधेरे से थोड़ा बाहर निकला। बने बनाए फ्लैट बिकने शुरू हो गए हैं। बिल्डरों का कहना है कि 2019 में काम करने के लिए कुछ उम्मीद बनी है। लोगों को जल्द से जल्द फ्लैट देने का प्रयास किया जाएगा। 

3. फ्लैट और पैसा न देने पर कई बिल्डर पर सख्ती शुरू
खरीदारों से पैसा लेकर भी उनको फ्लैट नहीं देने, प्राधिकरण और  प्रशासन का बकाया नहीं देने पर जिला प्रशासन ने इस साल सख्त कार्रवाई की। कई नामी बिल्डरों को तहसील की हवालात में रखा गया। इसका नतीजा रहा है कि कई बिल्डरों ने बकाया जमा करना शुरू कर दिया है।  इससे खरीदारों को घर मिलने की उम्मीद जगी है।

4. रि-शेड्यूलमेंट पॉलिसी
आसान किश्तों में पैसा जमा कर कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी करने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने रि-शेड्यूलमेंट पॉलिसी लागू की। अब जीरो पीरियड के दौरान बकाए के हिस्से को कम कर बिल्डर बकाया जमा करना शुरू कर देंगे। इससे लोगों को जल्दी घर मिल सकेगा और मालिकाना हक भी। 

2020: चार उम्मीद

1. आम्रपाली व जेपी का जिम्मा एनबीसीसी को 
आम्रपाली की अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने का जिम्मा एनबीसीसी को दिया गया है। परियोजनाओं में छोटे काम भी एनबीसीसी ने करने शुरू कर दिए हैं लेकिन बंद बड़ी अधूरी परियोजनाओं में काम शुरू होने में तीन से चार महीने का समय लग जाएगा। इसी तरह जेपी की अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने की जिम्मेदारी भी एनबीसीसी को मिल सकती है। 

2.  जीरो पीरियड से बिल्डरों को राहत
साल के आखिर में प्रदेश सरकार ने बिल्डरों को राहत देने के लिए जीरो पीरियड को मंजूरी दी। इसके तहत कई वजहों से जिस दौरान परियोजनाओं में काम बंद रहा, उस समय का बकाया नहीं लिया जाएगा। यह नियम उन्हीं परियोजनाओं पर लागू होगा जो लिखित में यह दावा करेंगी वे सभी काम जून 2021 तक पूरा कर सकेंगे। बिल्डरों को जीरो पीरियड का फायदा खरीदारों को भी देना होगा। अधिकारियों की मानें तो बकाया कम होने पर उम्मीद है कि वे अपनी परियोजनाओं को पूरा करेंगे।

3. 25 हजार करोड़ का स्ट्रेस फंड
केंद्र सरकार ने देश में बिल्डर परियोजनाओं को पूरा कराने के लिए 25 हजार करोड़ का स्ट्रेस फंड देने की घोषणा की है। इसमें से सबसे ज्यादा पैसा दिल्ली-एनसीआर की परियोजनाओं को मिलेगा। यह फंड उन्हीं परियोजनाओं को मिलेगा जिनका मामला कोर्ट में नहीं है। ऐसे में स्ट्रेस फंड मिलने पर नोएडा-ग्रेनो में बिल्डर परियोजनाओं में जल्द काम शुरू हो सकेगा। इससे करीब एक लाख लोगों को घर मिलने की उम्मीद है। फंड देने के लिए बैंक में आवेदन मांगे जाने शुरू कर दिए गए हैं।

4. कोर्ट की सख्ती से फ्लैट मिलने की उम्मीद
इस साल जिस तरीके से आम्रपाली व जेपी के मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने खरीदारों का पक्ष रखते हुए बिल्डरों को जमकर फटकार लगाते हुए अल्मीटेम दिया है, उससे लगता है जिन अन्य परियोजनाओं के मामले उनके यहां है उनमें भी सख्ती होगी और खरीदारों को जल्द फ्लैट मिलने की उम्मीद बनेगी। इसके अलावा कोर्ट व रेरा के आदेश पर खरीदारों ने एस्क्रो एकाउंट में पैसे डालने शुरू कर दिए हैं। इससे फंड आने पर परियोजनाओं में काम शुरू हो सकेगा।

प्रतिक्रियाएं

जून 2021 तक नोएडा-ग्रेटर नोएडा में करीब एक लाख लोगों को घर दे दिया जाएगा। इसके अलावा स्ट्रेस फंड मिलने पर जिन परियोजनाओं में काम बंद पड़ा है उनमें भी काम शुरू होगा। रियल स्टेट और खरीदारा, दोनों के लिए 2020 अच्छा होगा। -प्रशांत तिवारी, अध्यक्ष, क्रेडाई पश्चिमी उत्तर प्रदेश

इस साल रियल स्टेट सेक्टर में बने बनाए फ्लैट की बिक्री में 2017 व 2018 के मुकाबले सुधार हुआ है। जीरो पीरियड की प्रदेश सरकार ने घोषणा कर दी है। अब बकाए में राहत मिलेगी तो परियोजनाओं में तेजी से काम कर अधिक से अधिक लोगों को घर दिए जाएंगे। -सुरेश गर्ग, सदस्य, क्रेडाई पश्चिमी उत्तर प्रदेश

पूरे साल फ्लैट दिलवाने के लिए बिल्डर, प्रशासन और सरकार, तीनों की ओर से कोई गंभीरता से प्रयास नहीं किए गए। अगर गंभीरता से प्रयास होते तो लोगों को जल्द फ्लैट मिल जाते। साल के अंत में स्ट्रेस फंड व जीरो पीरियड की घोषणा की है। उम्मीद है कि इनके जरिए  लोगों को घर मिलने शुरू हो सकेंगे। -अभिषेक, अध्यक्ष, नेफोवा

आम्रपाली की अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने का जिम्मा बेशक एनबीसीसी को दे दिया गया लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि फंड कहां से आएगा। परियोजनाएं पूरा करने के लिए 8500 करोड़ रुपए की जरूरत है। कोर्ट में मामला होने के कारण स्ट्रेस फंड मिलने को अड़चन है। जिसके कारण 2020 तक जल्द खरीदारों को फ्लैट मिलनी की उम्मीद कम ही नजर आ रही है। -के.के. कौशल, खरीददार, आम्रपाली परियोजना

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  • Web Title:Alvida 2019 : Ghar ke liye dhakke khaate bita khariddaron ka ek or saal