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ट्रैक्टर परेड हिंसा के बाद नोएडा के दलित प्रेरणा स्थल पर कम हुए किसान, सभी ट्रैक्टर गायब

नोएडा। लाइव हिन्दुस्तान टीमPublished By: Praveen Sharma
Wed, 27 Jan 2021 01:55 PM
ट्रैक्टर परेड हिंसा के बाद नोएडा के दलित प्रेरणा स्थल पर कम हुए किसान, सभी ट्रैक्टर गायब

नए कृषि कानूनों के विरोध में गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा का असर आज किसान आंदोलन पर भी देखा जा रहा है। बीते करीब दो महीने से नोएडा के दलित प्रेरणा स्थल पर डटे भारतीय किसान यूनियन (लोकशक्ति) से जुड़े किसानों की संख्या आज अन्य दिनों के मुकाबले काफी कम है। इसके साथ ही यहां आज एक भी ट्रैक्टर नहीं दिख रहा है। आंदोलन स्थल पर गिने-चुने लोग ही बैठे हैं।

जानकारी के अनुसार, किसान संगठनों की केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग के पक्ष में मंगलवार को हजारों की संख्या में किसानों ने ट्रैक्टर परेड निकाली थी। इस दौरान कई जगह प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के बैरिकेड्स को तोड़ दिया और पुलिस के साथ झड़प की, वाहनों में तोड़फोड़ की और लाल किले पर एक धार्मिक ध्वज लगा दिया था।

लाल किले की घटना की जांच हो : टिकैत

किसान नेता राकेश टिकैत ने लाल किला परिसर में भीड़ के घुसने और धार्मिक झंडा फहराने की घटना की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि हिंसा के पीछे कुछ असामाजिक तत्व थे। टिकैत ने कहा कि ऐसा करने वाले लोगों का किन राजनीतिक दलों और व्यक्तियों से संबंध था इसकी जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा ने किसानों से लाल किला जाने का आह्वान नहीं किया था, वे पहले से निर्धारित मार्ग पर आगे बढ़ रहे थे। उन्होंने कहा कि परेड के लिए पहले से तय कुछ मार्गों की घेराबंदी की गई थी, जिसकी भी जांच कराई जानी चाहिए। 

टिकैत ने कहा कि जिस किसी ने भी पुलिस कर्मियों पर ट्रैक्टर चढ़ाने का प्रयास किया उनकी पहचान की जानी चाहिए और उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। किसान संगठनों और पुलिस के बीच समझौते के बाद गणतंत्र दिवस के अवसर पर राजधानी में किसान परेड निकालने पर सहमति बनी थी। उन्होंने कहा कि भारतीय किसान यूनियन शांतिपूर्ण प्रदर्शन में विश्वास करती है और हिंसा के पीछे उपद्रवियों की पहचान करेगी। 

उल्लेखनीय है कि मंगलवार को किसान ट्रैक्टर परेड के दौरान काफी लोग ट्रैक्टर के साथ लाल किला परिसर में घुस गए थे और वहां एक धार्मिक झंडा फहराया था और तोड़फोड़ की थी। किसान संगठन तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने तथा फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी दर्जा देने की मांग को लेकर 63 दिनों से राजधानी की सीमाओं पर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं।  

दिल्ली पुलिस ने 22 एफआईआर दर्ज कीं 

दिल्ली पुलिस ने राजधानी में किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा के संबंध में अभी तक 22 एफआईआर दर्ज की हैं। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि हिंसा में 300 से अधिक पुलिस कर्मी घायल हुए हैं। अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार को हुई हिंसा में शामिल किसानों की पहचान करने के लिए कई सीसीटीवी फुटेज और तमाम वीडियो खंगाले जा रहे हैं और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हिंसा के बाद राजधानी में कई स्थानों पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है, खासकर लाल किले और किसानों के प्रदर्शन स्थलों पर अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है।

अतिरिक्त पीआरओ (दिल्ली पुलिस) अनिल मित्तल ने बताया कि मंगलवार को हुई हिंसा के मामले में अभी तक 22 एफआईआर दर्ज की गई हैं। उन्होंने बताया कि हिंसा में 300 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। प्रदर्शनकारी किसान संगठनों के एकीकृत संगठन संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा पर चर्चा के लिए बुधवार को एक बैठक भी बुलाई है। इससे पहले सिंघु बॉर्डर पर पंजाब के 32 किसान संगठनों के प्रतिनिधि भी एक बैठक करेंगे।

चार रूटों पर निकाली जानी थी ट्रैक्टर परेड

एसकेएम की ओर से गणतंत्र दिवस के मौके पर किसान ट्रैक्टर रैली का प्रस्ताव पेश किया गया था। ट्रैक्टर परेड के संबंध में मोर्चा के साथ दिल्ली पुलिस की कई दौर की बैठक हुई थी। पुलिस ने बताया कि संयुक्त किसान मोर्चा ने चार मार्गों पर शांतिपूर्ण परेड निकालने का आश्वासन दिया था, लेकिन मंगलवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे छह से सात हजार ट्रैक्टर सिंघु बॉर्डर पर एकत्र हो गए और तय मार्गों के बजाय मध्य दिल्ली की ओर जाने पर जोर देने लगे। उन्होंने बताया कि बार-बार समझाने के बावजूद निहंगों की अगुवाई में किसानों ने पुलिस पर हमला किया और पुलिस के बैरिकेड्स को तोड़ दिया। गाजीपुर एवं टीकरी बॉर्डर से भी इसी तरह की घटना की खबरें आईं। इसके बाद गाजीपुर एवं सिंघु बॉर्डर से आए किसानों की एक बड़ा समूह आईटीओ पहुंच गया और उसने लुटियन जोन की तरफ जाने का प्रयास किया।

उन्होंने बताया कि पुलिस कर्मियों ने उन्हें रोका तो किसानों का एक वर्ग हिंसक हो गया, उन्होंने बैरिकेड्स तोड़ दिए तथा वहां मौजूद पुलिसकर्मियों को कुचलने का प्रयास किया। हालांकि बाद में पुलिस ने लाठीचार्ज करके हिंसक भीड़ को नियंत्रित किया, लेकिन यहां से वे लाल किले की ओर बढ़ गए।

बयान के अनुसार, मंगलवार को लगभग 90 मिनट तक अफरा-तफरी मची रही, किसान अपनी ट्रैक्टर परेड के निर्धारित मार्ग से हटकर इस ऐतिहासिक स्मारक तक पहुंच गए थे। वहां वे उस ध्वज-स्तंभ पर भी अपना झंडा लगाते दिखे, जिस पर प्रधानमंत्री स्वतंत्रता दिवस के दिन राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं। काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारी किसानों को लाल किला परिसर से हटा दिया था।  

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