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5 साल बाद 5 महीने में सबसे कम बारिश, दिल्ली में कब मिलेगी गर्मी से राहत

दिल्ली में 2018 के बाद शुरू के 5 महीने में इस साल सबसे कम बारिश दर्ज की गई। इस साल पहले 5 महीनों में केवल 44.7 मिमी बारिश हुई। इस दौरान होने वाली औसत बारिश का यह केवल 42 प्रतिशत है।

5 साल बाद 5 महीने में सबसे कम बारिश, दिल्ली में कब मिलेगी गर्मी से राहत
Subodh Mishraलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीSat, 08 Jun 2024 10:04 AM
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राजधानी में 2018 के बाद इस साल शुरू के 5 महीनों में सबसे कम बारिश दर्ज की गई। सफदरजंग स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, 2024 के शुरुआती 5 महीनों में सिर्फ 44.7 मिमी वर्षा दर्ज की गई। इस दौरान होने वाली औसत बारिश का यह केवल 42 प्रतिशत है। दिल्ली में साल के शुरुआती 5 महीनों में औसत बारिश का रिकॉर्ड 104.8 मिमी रहा है। 

हिन्दुस्तान टाइम्स के विश्लेषण से पता चलता है कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा जारी आंकड़ों से पता चलता है कि 2018 में साल के शुरुआत में शहर में 43.5 मिमी बारिश हुई थी, जो इस साल से कम थी। वहीं पिछले 5 साल की बात करें तो 2023 के पहले पांच महीनों में शहर में 204.7 मिमी दर्ज किया गया, जो इस वर्ष के आंकड़े से लगभग पांच गुना अधिक है। 2022 में 31 मई तक 165.9 मिमी, 2021 में 210.5 मिमी, 2020 में 194.4 मिमी और 2019 में 126.6 मिमी बारिश हुई थी।

मौसम विशेषज्ञों ने इस साल कम बारिश होने के लिए पश्चिमी विक्षोभ की कमी को जिम्मेदार ठहराया है। इसके कारण उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान रहा। 29 मई को सफदरजंग में अधिकतम तापमान 46.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। यह मई महीने में सफदरगंज में दर्ज किया जाने वाला दूसरा सबसे अधिकतम तापमान है। इससे पहले 29 मई 1944 को यहां 47.2 डिग्री तापमान दर्ज किया गया था, जो अब तक का रिकॉर्ड है। इस साल दिल्ली का सबसे अधिकतम तापमान मुंगेशपुर में 52.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हालांकि मौसम विभाग ने बताया कि ऐसा उपकरणों के खराबी के कारण हुआ। मौसम विभाग के अनुसार उपकरणों की खराबी के कारण तापमान 3 डिग्री ज्यादा दर्ज कर लिया गया।  

आईएमडी के आंकड़ों से पता चलता है कि इस साल पहले पांच महीनों में दर्ज की गई 44.7 मिमी बारिश में से लगभग 72 प्रतिशत यानी 32.5 मिमी बारिश सिर्फ फरवरी में दर्ज की गई थी। आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि दिल्ली और उत्तर पश्चिम भारत के बड़े हिस्से में ज्यादा सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ नहीं देखे गए हैं। यही वजह है कि कम बारिश दर्ज की गई है। यही कारण है कि हम इतनी तेज गर्मी दर्ज कर रहे हैं। बताया कि 15 मई के बाद से उत्तर पश्चिम भारत के बड़े हिस्से में औसतन बारिश हुई ही नहीं। 

मानसून आने तक राहत नहीं

महापात्रा ने कहा कि जून में भी बहुत अलग होने की संभावना नहीं है, लेकिन एक बार दिल्ली में मानसून आने के बाद स्थिति बदलने की संभावना है। आईएमडी के आंकड़ों से पता चला है कि दिल्ली में इस साल जनवरी में कोई बारिश दर्ज नहीं की गई। फरवरी में 32.5 मिमी दर्ज किया गया, जो 21.3 मिमी के मासिक एलपीए से अधिक है। मार्च में जब दिल्ली में आम तौर पर 17.4 मिमी बारिश होती है, केवल 4.3 मिमी दर्ज की गई। अप्रैल में सामान्य 16.3 मिमी की तुलना में 7.5 मिमी बारिश हुई और मई में सामान्य 30.7 मिमी की तुलना में केवल 0.4 मिमी बारिश हुई। राजधानी में पिछले साल मई में 111 मिमी, 2022 में 47.7 मिमी और 2021 में 144.8 मिमी बारिश हुई थी।

स्काईमेट मौसम विज्ञान के उपाध्यक्ष महेश पलावत ने कहा कि दिल्ली में अप्रैल और मई में उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों की तरह ही नुकसान हुआ है। आम तौर पर हम अप्रैल और मई में दो से तीन अच्छी बारिश देखते हैं। लेकिन इस बार चक्रवाती परिसंचरण इतना कमजोर रहा है कि कुछ स्थानों पर बहुत हल्की बारिश हुई।