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दिल्ली के अस्पताल में 7 बच्चों की मौत पर ACB की रिपोर्ट, क्या बताई गई गलती 

दिल्ली के विवेक विहार में बच्चों के अस्पताल में लगी आग को लेकर भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने सतर्कता विभाग को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में तीन अधिकारियों पर आरोप लगाया गया है।

दिल्ली के अस्पताल में 7 बच्चों की मौत पर ACB की रिपोर्ट, क्या बताई गई गलती 
Subodh Mishraलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीThu, 13 Jun 2024 10:46 AM
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दिल्ली के विवेक विहार में बच्चों के अस्पताल में लगी आग को लेकर भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने सतर्कता विभाग को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इसमें कहा गया है कि यदि अधिकारियों ने लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए अस्पताल के अनुरोध पर समय पर कार्रवाई की होती तो इस त्रासदी को टाला जा सकता था।

सोमवार को सतर्कता विभाग को सौंपी गई रिपोर्ट में एसीबी ने कहा कि बेबी केयर न्यू बोर्न हॉस्पिटल के पास 2021 से लाइसेंस था, जो इस साल मार्च में समाप्त हो गया था। हॉस्पिटल के मालिक डॉ. नवीन खिची ने लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए आवेदन किया था। हिन्दुस्तान टाइम्स के पास नवीनीकरण के लिए किए गए आवेदन की एक प्रति मौजूद है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि हॉस्पिटल की ओर से फरवरी 2024 में लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए आवेदन किया गया था। यदि समय रहते हॉस्पिटल का निरीक्षण कर लाइसेंस का नवीनीकरण कर दिया जाता तो आग की घटना से बचा जा सकता था। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तत्कालीन चिकित्सा अधीक्षक (नर्सिंग होम) डॉ संदीप अग्रवाल ने हॉस्पिटल का निरीक्षण कर कुछ सुधारात्मक उपाय बताए थे। 

एसीबी के अधिकारियों ने कहा कि हॉस्पिटल में कोई अग्निशामक यंत्र नहीं था। कोई आपातकालीन निकास भी नहीं था। साथ ही नियमों का उल्लंघन करते हुए 32 से अधिक ऑक्सीजन सिलेंडर रखे हुए थे। हॉस्पिटल में केवल पांच बेड की अनुमति थी, लेकिन 12 बेड का उपयोग किया जा रहा था। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वास्थ्य अधिकारियों ने इन तथ्यों का जिक्र अपने पिछले निरीक्षण के दौरान नहीं किया था।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नर्सिंग होम के डॉक्टर आयुर्वेद के चिकित्सक थे और नवजात शिशुओं का इलाज करने में सक्षम नहीं थे। बेडों की संख्या में वृद्धि के कारण बुनियादी ढांचा ध्वस्त हो गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि आशंका है कि डॉक्टर खीची और तत्कालीन चिकित्सा अधीक्षक-नर्सिंग होम आरएन दास और अन्य अधिकारियों के बीच सांठगांठ थी।

वहीं, डॉ. दास ने इन आरोपों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और डॉ. अग्रवाल ने कहा कि वह इस मामले पर टिप्पणी करने के लिए सक्षम प्राधिकारी नहीं हैं। दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह प्रारंभिक रिपोर्ट है। स्वास्थ्य विभाग और रिपोर्ट में नामित अन्य एजेंसियों से जवाब मांगा गया है। आरोपों का सत्यापन करने के बाद कार्रवाई की जाएगी।

एसीबी ने राष्ट्रीय राजधानी में 65 नर्सिंग होम का निरीक्षण किया और पाया कि उनमें से कम से कम 13 स्वास्थ्य विभाग के लाइसेंस के बिना काम कर रहे थे या उनका लाइसेंस समाप्त हो चुका था। 27 नर्सिंग होम ने अवैध रूप से अस्पताल के बिस्तरों का विस्तार किया था। 34 के पास फायर लाइसेंस नहीं था। 27 के पास अग्निशमन विभाग की मंजूरी तो थी, लेकिन वहां अग्निशमन उपकरण काम नहीं कर रहे थे।

एसीबी ने नर्सिंग होम मालिकों के साथ कथित मिलीभगत और निरीक्षण नहीं करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के तीन चिकित्सा अधीक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है। इनमें चिकित्सा अधीक्षक (नर्सिंग होम सेल) डॉ. संदीप अग्रवाल, पूर्व चिकित्सा अधीक्षक (नर्सिंग होम सेल) डॉ. नितिन और डॉ. आरएन दास शामिल हैं। तीनों अधिकारियों पर कई महीनों तक लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं करने का आरोप लगा है।

बता दें कि 25 मई को विवेक विहार के बेबी केयर न्यू बोर्न हॉस्पिटल में भीषण आग लगने से सात नवजात शिशुओं की मौत हो गई और छह अन्य घायल हो गए। 28 मई को उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने एसीबी को नर्सिंग होम और अस्पतालों में जांच करने का आदेश दिया कि क्या उनके पास पंजीकरण है और वे मानदंडों का पालन कर रहे हैं या नहीं।