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आरुषि हत्याकांड : 11 साल बीते लेकिन हत्या की गुत्थी आज भी अनसुलझी

आरुषि बर्थडे पार्टी का बेसब्री से इंतजार करती थी। वैसे तो उसका बर्थडे 24 मई को होता था। लेकिन स्कूल में गर्मी की छुट्टियों को देखते हुए वह आखिरी क्लास वाले दिन ही यह पार्टी दे देती थी।

Aarushi talwar

पूरे देश को हिलाकर रख देने वाला आरुषि हत्याकांड का 16 मई 2008 को उस समय पता चला जब राजेश और नूपुर तलवार की बेटी का शव उसके ही बेडरूम में मिला। 

पुलिस को शक था कि उनका नौकर हेमराज ने ही हत्या की है। लेकिन 17 मई की सुबह जब घर के नौकर हेमराज का भी शव घर की छत पर मिला तो पूरी जांच की दिशा ही बदल गई। सीबीआई जांच के बावजूद आज तक इस मामले में हत्यारे का पता नहीं चल सका है। 

यूं चला घटनाक्रम : 20 जून 2008 को दिल्ली के सीएफएसएल में राजेश तलवार का लाई डिटेक्टर टेस्ट किया गया। 25 जून 2008 को आरुषि की मां नूपुर तलवार का दूसरा लाई डिटेक्टर टेस्ट किया गया। 26 जून 2008 को गाजियाबाद की अदालत ने राजेश तलवार को जमानत देने से मना कर दिया। 12 जुलाई 2008 को राजेश तलवार को जमानत मिली। 

29 दिसंबर 2010 को सीबीआई ने मामले में अपनी क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की, जिसमें नौकरों को क्लीन चिट दे दी। जबकि रिपोर्ट में आरुषि के मां-बाप पर संदेह जताया गया। 9 फरवरी 2011 के दिन कोर्ट ने सीबीआई की उस रिपोर्ट का संज्ञान भी लिया जिसमें उसने कहा कि दंपति ने दोनों का मर्डर किया और सबूत मिटाए। 21 फरवरी 2011 को आरोपी दंपति ने ट्रायल कोर्ट के समन को खारिज करने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया। 18 मार्च 2011 हाईकोर्ट ने समन को रद्द करने की उनकी याचिका को खारिज करते हुए उनके खिलाफ जांच के आदेश दे दिए। 19 मार्च 2011 को दंपति ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया जिसने उनके खिलाफ चल रही जांच पर स्टे लगा दिया। 10 अक्टूबर 2013 को मामले में आखिरी जिरह शुरू हुई। 

25 नवंबर 2013 को गाजियाबाद की स्पेशल सीबीआई अदालत ने तलवार दंपति को दोषी मानते हुए 26 नवंबर 2013 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। 21 जनवरी 2014 को राजेश और नुपुर तलवार ने सीबीआई अदालत के फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया। 12 अक्तूबर 2017 को सबूतों के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलवार दंपति को बरी कर दिया। सीबीआई तलवार दंपति के खिलाफ ऐसे सबूत पेश नहीं कर पाई जिसमें उन्हें सीधे दोषी माना जा सके। फिलहाल यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

जन्मदिन पार्टी की तैयारी कर रही थी आरुषि

आरुषि बर्थडे पार्टी का बेसब्री से इंतजार करती थी। वैसे तो उसका बर्थडे 24 मई को होता था। लेकिन स्कूल में गर्मी की छुट्टियों को देखते हुए वह आखिरी क्लास वाले दिन ही यह पार्टी दे देती थी। कभी 15 मई तो कभी 16 मई को आखिरी क्लास होती थी। इसलिए वह इन्हीं तारीखों पर अक्सर अपने दोस्तों को पार्टी देती थी। 

माता-पिता को संदेह में लेकर शुरू की गई थी जांच

18 मई 2008 को पुलिस ने अपनी प्राथमिक जांच में कहा कि दोनो की हत्या सर्जरी के लिए प्रयुक्त उपकरण के जरिए की गई है। इससे आरुषि के माता-पिता संदेह के घेरे में आने लगे। 22 मई 2008 को आरुषि हत्याकांड की ऑनर किलिंग के एंगल से जांच शुरू होने पर परिवार संदेह के घेरे में आ गया। 23 मई 2008 को आरुषि के पिता राजेश तलवार को आरुषि-हेमराज हत्याकांड के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। केस की गंभीरता के चलते 1 जून 2008 को सीबीआई को जांच सौंपी गई। यहीं से शुरू हुई इस केस की जांच जिसका आज तक नतीजा न निकल सका।

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  • Web Title:Aarushi murder case: 11 years passed but murder mystery still unsolved