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लोकसभा चुनाव के बीच मंत्री राजकुमार का इस्तीफा पार्टी के लिए बढ़ाएगा मुश्किल, इलेक्शन पर क्या पड़ेगा असर

लोकसभा चुनाव के बीच आम आदमी पार्टी के मंत्री राजकुमार आनंद ने पद और पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इससे पार्टी की चुनौतियां बढ़ने वाली हैं। राजकुमार आनंद ने पार्टी पर कई आरोप लगाए हैं।

लोकसभा चुनाव के बीच मंत्री राजकुमार का इस्तीफा पार्टी के लिए बढ़ाएगा मुश्किल, इलेक्शन पर क्या पड़ेगा असर
Sneha Baluniबृजेश सिंह,नई दिल्लीThu, 11 Apr 2024 06:20 AM
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आम आदमी पार्टी दिल्ली की सत्ता में आने के बाद अभी तक अपने मंत्रियों से अलग-अलग विवादों व भ्रष्टाचार से घिरने के बाद इस्तीफा लेती रही है। पहली बार किसी मंत्री ने सरकार पर ही भ्रष्टाचार समेत दलित समाज के नेताओं की अनदेखी का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दिया है। लोकसभा चुनावों के बीच जब आप व सरकार के मुखिया जेल में है, उस समय गंभीर आरोपों के साथ नैतिकता का हवाला देकर इस्तीफा देना पार्टी की चुनौतियां बढ़ने वाली हैं।

आम आदमी पार्टी अभी तक पूर्वी दिल्ली की सामान्य सीट पर एक दलित चेहरे कुलदीप कुमार को टिकट देकर दलित समाज के वोटों को अपने पाले में करने की जुगत में लगी थी, मगर उसी दलित समाज से आने वाले उनके विधायक व सरकार में मंत्री ने सरकार पर ही दलित नेताओं के प्रतिनिधित्व नहीं मिलने का आरोप लगाकर इस्तीफा दे दिया है। इससे दलितों को लोकसभा चुनाव में साधना आप के लिए चुनौती होगा। हालांकि, आप इससे इनकार करते हुए कहती है कि वह बीते सभी चुनावों से दलित समाज उनके साथ है। आंकड़े भी यही बताते हैं कि दिल्ली की सभी 12 आरक्षित विधानसभा पर आम आदमी पार्टी का कब्जा है। वहीं, आम आदमी पार्टी राजकुमार आनंद का इस्तीफा ईडी के डर को वजह बता रही है।

दलितों को प्रतिनिधित्व नहीं 

पार्टी और पद छोड़ने के बाद बुधवार को राजकुमार आनंद ने प्रेसवार्ता कर कहा, बाबा साहेब डॉ. आंबेडकर ने कहा था ‘पे बैक टू सोसाइटी’। उसी मंत्र के साथ मैं व्यापारी होते हुए भी पहले एनजीओ में आया। विधायक बना फिर मंत्री बना ताकि लोगों की सेवा कर सकूं, लेकिन पार्टी में दलितों को प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है।

आनंद आंदोलन के बाद राजनीति में आए

राजकुमार आनंद आम आदमी पार्टी के गठन के पहले से आंदोलन से जुड़े थे। पार्टी गठन के बाद वह राजनीति में सक्रिय हो गए। पटेल नगर विधानसभा क्षेत्र से 2013 व 2015 में उनकी पत्नी वीणा आनंद विधायक बनी। उसके बाद वर्ष 2020 में वह खुद चुनाव मैदान में उतरे और 61 फीसदी वोट हासिल करके चुनाव जीत गए। आनंद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के करीबी माने जाते हैं।

2022 में मंत्री बनाया

वर्ष 2022 में राजेंद्र पाल गौतम को एक बयान के बाद मंत्री पद से हटाया गया, जिसके बाद जाटव समाज से आने के कारण पार्टी ने राजकुमार आनंद को दिल्ली सरकार में मंत्री बनाया गया। उन्हें मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन के जेल जाने के बाद शिक्षा व स्वास्थ्य मंत्रालय भी दिया गया। हालांकि, बाद में आतिशी और सौरभ भारद्वाज के आने से उनसे यह विभाग ले लिए गए। वर्तमान में एससी-एसटी, समाज कल्याण विभाग, श्रम विभाग समेत कुल सात विभागों का प्रभार संभाल रहे थे।

ईडी मार चुकी छापा

आनंद पर बीते साल नवंबर 2023 में ईडी की छापेमारी पड़ चुकी है। उनके यहां दिल्ली के पटेल नगर, सिविल लाइंस स्थित सरकारी आवास पर छापेमारी हुई थी। उनके यहां यह छापेमारी में सीमा शुल्क चोरी के लिए आयात में झूठी घोषणाओं के आरोप में राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) द्वारा दायर आरोप पत्र के कारण पड़े थे।