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फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है अरविंद केजरीवाल सरकार, इस बार क्या मांग?

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि अरविंद केजरीवाल सरकार दिल्ली के बिजली नियामक डीईआरसी में अस्थायी सदस्यों की नियुक्ति की फाइल पर आगे बढ़ने की अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है।

फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है अरविंद केजरीवाल सरकार, इस बार क्या मांग?
Krishna Singhपीटीआई,नई दिल्लीSun, 09 Jun 2024 12:50 AM
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अरविंद केजरीवाल सरकार दिल्ली के बिजली नियामक डीईआरसी में अस्थायी सदस्यों की नियुक्ति की फाइल पर आगे बढ़ने की अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी है। दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) तीन सदस्यों वाला निकाय है। इसमें एक अध्यक्ष शामिल है। बीते साल से दो सदस्यों के पद खाली पड़े हैं। 

आधिकारिक सूत्रों ने कहा- अस्थायी सदस्यों की नियुक्ति के लिए फाइल को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की ओर से दिल्ली के उपराज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित समिति ने अस्थायी सदस्यों की सूची बना ली है, लेकिन लोकसभा चुनाव के लिए आदर्श आचार संहिता लागू होने और मार्च में दिल्ली के मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी के कारण उनकी नियुक्तियों में देरी हुई है। 

बता दें कि पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति जयंत नाथ को डीईआरसी का अस्थायी अध्यक्ष नियुक्त किया था, क्योंकि आप सरकार और दिल्ली के उपराज्यपाल इस पद के लिए उम्मीदवार पर आम सहमति बनाने में विफल रहे थे। सूत्रों ने बताया कि दिल्ली सरकार सर्वोच्च अदालत की अनुमति लेना चाहती है, ताकि बिजली मंत्री इसे सीधे उपराज्यपाल की मंजूरी के लिए भेज सकें। 

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दो अस्थायी सदस्यों का चयन करने के लिए पिछले साल नवंबर में वर्तमान अस्थायी अध्यक्ष जयंत नाथ, बिजली अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन और सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति आशा मेनन की एक चयन समिति का गठन किया गया था। चूंकि केजरीवाल जेल में हैं, इसलिए फाइल लंबित है। इसी वजह से सरकार सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकती है।