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'एक के लायक नहीं' तो कांग्रेस को AAP ने कैसे दीं 3 सीटें, बदले में क्या मिला

लोकसभा चुनाव नजदीक आने के साथ 'इंडिया' गठबंधन में सीट शेयरिंग पर बात बनती दिख रही है। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और सपा के बीच सीट बंटवारे के बाद अब आम आदमी पार्टी के साथ डील लगभग फाइनल है।

'एक के लायक नहीं' तो कांग्रेस को AAP ने कैसे दीं 3 सीटें, बदले में क्या मिला
Sudhir Jhaलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीThu, 22 Feb 2024 01:17 PM
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लोकसभा चुनाव नजदीक आने के साथ 'इंडिया' गठबंधन में सीट शेयरिंग पर बात बनती दिख रही है। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और सपा के बीच सीट बंटवारे के बाद अब आम आदमी पार्टी के साथ भी डील फाइनल होती दिख रही है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों दलों के बीच दिल्ली में 4-3 फॉर्मूले पर बात बन गई है। कांग्रेस और आप की दोस्ती पंजाब को छोड़कर तीन राज्यों में दिखेगी। 

कांग्रेस और आप के बीच सीट बंटवारे की औपचारिक घोषणा गुरुवार शाम या शुक्रवार तक होने की संभावना है। सूत्रों की मानें तो दिल्ली में कांग्रेस और आप के बीच चार-तीन पर सहमति बन गई है। आप चार सीट पर लड़ेगी तो कांग्रेस को 3 सीटें देने का फैसला लिया गया है। कांग्रेस पूर्वी दिल्ली, उत्तर-पूर्वी दिल्ली और चांदनी चौक से चुनाव लड़ेगी तो 'आप' पश्चिमी दिल्ली, दक्षिणी दिल्ली, नई दिल्ली और दक्षिणी पश्चिमी सीट पर उम्मीदवार उतारेगी।

कैसे आप ने बदला अपना ऑफर
इससे पहले आम आदमी पार्टी ने ऐलान कर दिया था कि वह दिल्ली में कांग्रेस को महज एक सीट दे सकती है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संदीप पाठक ने तो प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए यहां तक कह दिया था कि आंकड़े कांग्रेस को एक भी सीट देने लायक नहीं हैं, लेकिन गठबंधन धर्म का पालन करते हुए एक सीट दी जाएगी। उन्होंने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली शून्य सीट का भी जिक्र किया था। हालांकि, आप के इस तेवर के बाद भी कांग्रेस के नेता चुप्पी साधे रहे और बातचीत का क्रम आगे बढ़ाया गया। माना गया कि 'आप' ने 'प्रेशर गेम' के तहत इस तरह का ऐलान किया था। 

दिल्ली में तीन सीट के बदले क्या मिला
आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में कांग्रेस को तीन सीटें देने का फैसला किया है तो बदले में गुजरात से हरियाणा तक हिस्सेदारी हासिल की है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस गुजरात में आम आदमी पार्टी को 2 सीट देने पर राजी हुई है। हरियाणा में भी उसे एक सीट पर लड़ने का मौका दिया जाएगा। पंजाब में भले ही दोनों दल अलग लड़ेंगे, लेकिन चंडीगढ़ में कांग्रेस के उम्मीदवार को 'आप' समर्थन देगी। इससे पहले दोनों दल के साथ आने से चंडीगढ़ में 'आप' का मेयर बन चुका है। खबर है कि साउथ गोवा सीट से आम आदमी पार्टी ने अपनी उम्मीदवारी पीछे लेने का फैसला किया है।

कांग्रेस का गढ़ रही है दिल्ली
पिछले एक दशक में भले ही दिल्ली में कांग्रेस को बेहद मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा हो। लेकिन देश की सबसे पुरानी पार्टी का यह बेहद मजबूत गढ़ रहा है। 2014 और 2019 में भले ही कांग्रेस एक भी सीट जीतने में कामयाब नहीं रही, लेकिन 2009 में उसने सातों सीटों पर कब्जा जमाया था। राजनीति में 'आप' की एंट्री से पहले विधानसभा में भी लगातार 15 सालों तक कांग्रेस की सरकार रही। पिछले लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस वोट शेयर के मामले में 'आप' से आगे रही थी। कांग्रेस ने 22.50 फीसदी वोट पर कब्जा जमाया था तो आप को 18.10 फीसदी वोट मिले थे। भाजपा ने 56 फीसदी वोट लेकर सभी सीटों पर कब्जा कर लिया था।

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