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नई दिल्ली: दुष्कर्म-सहमति के विवाद में फंसा एक साल का मासूम

एक महिला ने अपने परिचित के खिलाफ बलात्कार का मुकदमा दर्ज कराया है। वहीं, आरोपी का कहना है कि शिकायतकर्ता व उसके बीच सहमति से संबंध बने हैं। इसके लिए आरोपी ने अदालत में साक्ष्य भी पेश किए हैं। इस सारे...

नई दिल्ली: दुष्कर्म-सहमति के विवाद में फंसा एक साल का मासूम
नई दिल्ली, हेमलता कौशिकFri, 21 Sep 2018 04:19 AM
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एक महिला ने अपने परिचित के खिलाफ बलात्कार का मुकदमा दर्ज कराया है। वहीं, आरोपी का कहना है कि शिकायतकर्ता व उसके बीच सहमति से संबंध बने हैं। इसके लिए आरोपी ने अदालत में साक्ष्य भी पेश किए हैं। इस सारे विवाद के बीच एक साल के बच्चे का जीवन मुश्किल में फंस गया है। पीड़िता का आरोप है कि यह बच्चा बलात्कार का नतीजा है।

द्वारका स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गुर्रंवदर पाल सिंह की अदालत ने इस मामले में एक साल के बच्चे के भविष्य को लेकर चिंता जाहिर की है। अदालत ने पुलिस को आदेश दिए हैं कि वह सबसे पहले बच्चे का डीएनए टेस्ट कराए। पितृत्व की पुष्टि होने के बाद बच्चे के भविष्य को लेकर निर्णय किया जाएगा। हालांकि अदालत ने इस मामले में शिकायतकर्ता के आरोपों को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा है कि उसने बच्चे के जन्म के एक साल बाद बलात्कार का मुकदमा दर्ज कराया।

लव जेहाद का आरोप
पीड़िता ने उत्तम नगर थाने में 22 अगस्त को प्राथमिकी दर्ज कराते हुए कहा है कि आरोपी अब्दुल कयूम ने उसे झूठे प्रेमजाल में फंसाया। उससे शादी करने का वादा कर शारीरिक संबंध बनाए। आरोपी ने उससे कहा था कि वह अपनी पहली पत्नी से तलाक ले लेगा। दोनों लंबे समय से रिश्ते में थे। आरोपी ने उसकी संपत्ति भी कब्जाने की कोशिश की। पीड़िता ने आरोपी पर लव जेहाद का आरोप लगाया है।

13 साल के रिश्ते पर अदालत ने राहत दी
आरोपी अब्दुल कयूम के अधिवक्ता रवि दराल ने अदालत में कहा है कि उनका मुवक्किल व पीड़िता पिछले 13 साल से एक-दूसरे से परिचित थे। दोनों ने अपनी मर्जी से एक साथ रहने का निर्णय लिया। पीड़िता को पता था कि आरोपी शादीशुदा है और उसके तीन बच्चे हैं, बावजूद वह आरोपी के साथ रिश्ते में थी। अदालत ने इन बातों को ध्यान में रखते हुए आरोपी को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके एवं इतने ही रुपये मूल्य के जमानती पर सशर्त जमानत दे दी है।

परिवार न्यायालय में जाने की सलाह
अदालत ने बच्चे के भविष्य को देखते हुए पीड़िता को सलाह दी है कि वह परिवार अदालत में याचिका दायर कर सकती है। हालांकि, अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया है कि बच्चे की डीएनए रिपोर्ट को पीड़िता व अदालत के समक्ष जल्द पेश किया जाए।

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