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बुजुर्ग महिला ने जीत ली कोरोना संग साल भर लंबी चली जंग, होश में आते ही बोली- 'मुझे भूख लगी है'

'जाको राखे साइयां मार सके न कोय' इस कहावत को 65 वर्षीय उषा गुलाटी ने सच कर दिखाया है। कोरोना से करीब 1 साल लंबी लड़ाई लड़ने के बाद उषा गुलाटी को आखिरकार जब पिछले साल मई में होश आया...

बुजुर्ग महिला ने जीत ली कोरोना संग साल भर लंबी चली जंग, होश में आते ही बोली- 'मुझे भूख लगी है'
नई दिल्ली। सौम्या पिल्लैTue, 22 Mar 2022 02:23 PM

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'जाको राखे साइयां मार सके न कोय' इस कहावत को 65 वर्षीय उषा गुलाटी ने सच कर दिखाया है। कोरोना से करीब 1 साल लंबी लड़ाई लड़ने के बाद उषा गुलाटी को आखिरकार जब पिछले साल मई में होश आया तो उन्होंने सबसे पहले अपने 41 वर्षीय बेटे करण से बेहद धीमी आवाज में फुसफुसाते हुए कहा कि 'मुझे भूख लगी है'।

उषा के मुंह से निकले ये शब्द परिवार के लिए एक बड़ी राहत लेकर आए, लेकिन उनके ठीक होने की राह अभी भी लंबी थी। संक्रमण की चपेट में आने के 11 महीने बाद उषा, जो अब भी ऑक्सीजन सपोर्ट पर निर्भर हैं, लेकिन अब वह अपने घर के आसपास चलने में सक्षम हैं। 

उत्तर प्रदेश के खुर्जा की रहने वाली उषा और उनके पति पिछले साल अप्रैल महीने में कोविड-19 संक्रमित हो गए थे, जिनकी संक्रमण के कारण मौत हो गई थी। लगभग 10 दिनों की बीमारी के बाद, उषा की हालत बिगड़ गई और उन्हें एक स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया था।

करण ने कहा कि उनकी हालत और खराब होती गई और एक समय ऐसा भी आया जब फुल ऑक्सीजन सपोर्ट पर होने के बाद भी उनके ब्लड में ऑक्सीजन का स्तर केवल 50-55 के बीच होता था। सही दिनों में, उनका ऑक्सीजन स्तर बढ़कर 80 हो जाता, जो अपने आप में बहुत कम है।

करण ने कहा कि मां के इलाज के लिए उन्होंने उत्तर प्रदेश से लेकर अमेरिका तक के कई अस्पतालों के डॉक्टरों से भी संपर्क किया। उन्होंने वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग पर अमेरिका के अस्पतालों में पांच डॉक्टरों से सलाह ली और अपनी मां की स्थिति के बारे में उन्हें लिखा, सभी ने उनके परिवार को बताया कि वह कुछ दिनों से अधिक नहीं जीवित रहेंगी, लेकिन शायद यमराज हम पर मेहरबान थे जिन्होंने हमें उनके साथ कुछ और समय दिया।

इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में उषा का इलाज कर रही डॉक्टर डॉ. विनी कांतरू ने कहा कि कोविड-19 की दूसरी लहर के बाद गंभीर कोविड और पोस्ट-कोविड वाले मरीजों की संख्या में बड़ी वृद्धि हुई थी। मरीजों में अन्य जटिलताओं के साथ अत्यधिक थकान, स्ट्रोक, मायोकार्डिटिस, म्यूकोरमाइकोसिस, गुलेन बैरे सिंड्रोम और क्रोनिक फेफड़ों के संक्रमण जैसी दिक्कतें शामिल थीं।

उषा का परिवार मां की रिकवरी को एक चमत्कार मान रहा है। जून में इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में शिफ्ट होने और तीन महीने से अधिक समय तक आईसीयू में रहने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी देने की अनुमति दी गई थी, लेकिन इस शर्त पर कि डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में उनके घर में एक आईसीयू स्थापित किया जाएगा। 

डॉ. कांतरू ने बताया कि अस्पताल में तीन महीने बिताने के बाद, अगस्त 2021 में उसे आर्टिफिशिलयल रेसपिरेटरी सपोर्ट और अस्पताल से ऑक्सीजन पर छुट्टी दे दी गई। आमतौर पर तीन-चार महीनों में, लोग इन सपोर्ट सिस्टम से बाहर हो रहे थे, लेकिन यहां हमें उनके घर पर एक और आईसीयू और सपोर्ट सिस्टम बनाना पड़ा क्योंकि वह बेहद बीमार थीं। बेड तक सीमित रहने और पूरी तरह से ऑक्सीजन सपोर्ट पर निर्भर होने से लेकर अब तक उषा ने एक लंबा सफर तय किया है। वह घर के चारों ओर चलने में सक्षम है और उनका ऑक्सीजन सपोर्ट अब केवल दो लीटर प्रतिदिन तक सीमित हो गया है।   

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