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19 फीसदी लोगों को लगता है नकली या खराब है कोरोना का टीका, दिल्ली एम्स के अध्ययन में खुलासा

नई दिल्ली। हेमवती नंदन राजौरा Published By: Praveen Sharma
Tue, 03 Aug 2021 02:22 PM
19 फीसदी लोगों को लगता है नकली या खराब है कोरोना का टीका, दिल्ली एम्स के अध्ययन में खुलासा

कोरोना के खिलाफ टीका न सिर्फ लोगों की जान बचा रह है बल्कि उन्हें गम्भीर रूप से बीमार होने से भी बचा रह है, लेकिन टीके के बारे में जनता के मन में अब बी काफी भ्रम और गलत बातें मौजूद हैं। 19 फीसदी लोगों का मानना है कि कोरोना की वैक्सीन नकली या खराब है। इतना ही नहीं 30 फीसदी लोगों का मानना है कि वैक्सीन लगवाने के तुरंत बाद इसके गम्भीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के एक ताजा अध्ययन में यह बात सामने आई है।

कोरोना वैक्सीन के बारे में लोगों की क्या राय है, यह जानने के लिए एम्स के डॉक्टरों ने 1294 लोगों की राय जानी तो इसमें चौंकाने वाले नतीजे मिले। सर्वे में यह भी सामने आया कि युवा आबादी के मुकाबले 45 साल से अधिक उम्र के लोग टीका लेने के ज्यादा इच्छुक हैं। 

83 फीसदी लोग ही टीका लगवाने के  इच्छुक

सर्वे में शामिल 1294 लोगों में 83.6 फीसदी लोगों ने यह बात स्वीकार की कि वे टीका लगवाने के इच्छुक हैं। 10.75 फीसदी लोगों ने इसमें न तो सहमति जताई और न ही असहमत हुए। वहीं 5.65 लोगों ने कहा कि वे टीका लेने के इच्छुक नहीं हैं। इसके अलावा 6.8 फीसदी लोगों को लगता है कि टीका लगवाने में नुकसान है। वहीं 77 फीसदी लोगों को लगता है कि टीका लगवाने में कोई नुकसान नहीं है। 16 फीसदी लोग टीके लगवाना नुकसान देह नहीं है के सवाल पर न तो सहमत हैं और न ही असहमत।

35 फीसदी लोग टीके के भावी दुष्प्रभाव को लेकर चिंतित

शोध में टीके को लेकर झिझक की वजह जानने की कोशिश की गई तो सबसे बड़ी वजह यह पता चली कि लोग टीके के दुष्प्रभाव को लेकर चिन्तित हैं। 35 फीसदी लोग इस बात से सहमत हैं कि टीके लगवाने के बाद भविष्य में इसके दुष्प्रभाव हो सकते हैं। 30 फीसदी को लगता है कि टीका लगवाने के तुरंत बाद गम्भीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। 19 फीसदी लोगों को लगता है कि टीका नकली या खराब है। 22 फीसदी को लगता है कि ये फार्मा कम्पनियों के फायदे के लिए हैं। 35 फीसदी को लगता है कि टीका आसानी से उपलब्ध नहीं है। ग्रामीण इलाकों के मुकाबले शहरी क्षेत्र के लोगों में इस बात पर अधिक सहमति थी कि टीका आसानी से उपलब्ध नहीं है।

यह भी जानकारी नहीं

  • 62 फीसदी लोगों को ये नहीं पता कि कम प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग ले सकते हैं टीका या नहीं
  • 34.98 फीसदी लोगों को यह जानकारी नहीं कि क्रोनिक बीमारियों से पीड़ित लोग टीका ले सकते हैं या नहीं
  • 41.89 फीसदी को यह नहीं पता कि गर्भवती महिलाएं या शिशु को दूध पिलाने वाली माता कोरोना का टीका ले सकती है या नहीं।

ये है टीके को लेकर झिझक की वजह 

  • 19 फीसदी लोगों को लगता है कि टीका नकली या खराब है
  • 30 फीसदी लोगों को लगता है कि इसके तुरंत बाद गम्भीर साइड इफेक्ट होंगे
  • 35 फीसदी को लगता है कि इसके तुरंत गम्भीर दुष्प्रभाव होंगे
  • 35 फीसदी लोगों को लगता है कि टीका आसानी से उपलब्ध नहीं है
  • 22 फीसदी को लगता है कि ये फार्मा कम्पनियों के फायदे के लिए हैं।

टीके से बचने के लिए कुछ लोग पानी में कूद गए  

एम्स के मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर और इस शोध के सह-लेखक डॉक्टर पीयूष रंजन ने बताया कि टीके को लेकर लोगों में काफी भ्रम है। उन्हें कई जगहों से पता चला कि टीके न लगवाने के लिए कुछ लोग इतने ज्यादा भ्रमित थे कि जब प्रशासनिक टीम टीकाकरण क्व लिए गई तो कुछ ने टीके से बचने के लिए खुद को कमरों में बंद कर लिया तो कुछ लोग पानी में कूद गए।

''टीका लेने से रुकना मत और कोरोना की गाइडलाइन का पालन करने से चूकना मत। कोरोना के सभी टीके 80 फीसदी से अधिक कारगर हैं। टीका न सिर्फ जान बचाएगा बल्कि अस्पताल में भर्ती होने से भी बचाएगा।'' -डॉ. पीयूष रंजन, एसोसिएट प्रोफेसर, मेडिसिन विभाग, एम्स, दिल्ली

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