शराब घोटाला केस में CBI को मिली राहत HC ने रखी बरकरार; आज की सुनवाई में क्या हुआ
दिल्ली हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल से जुड़े शराब घोटाला केस में सीबीआई को आज फिर बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने जांच में खामियों के लिए सीबीआई अधिकारी की जांच कराने के ट्रायल कोर्ट के आदेश पर लगाई गई रोक को फिलहाल बरकरार रखा है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया से जुड़े शराब घोटाला केस में सीबीआई को आज फिर बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने जांच में खामियों के लिए सीबीआई पर की गई टिप्पणियों और सीबीआई अधिकारी की जांच कराने के ट्रायल कोर्ट के आदेश पर लगाई गई रोक को फिलहाल बरकरार रखा है।
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि जो भी अंतरिम रोक लगाई गई थी वो अभी ऐसी ही जारी रहेंगी। अदालत ने कहा कि वो इस मामले में 6 अप्रैल को अगली सुनवाई करेगी। बता दें कि इस मामले की पिछली सुनवाई में हाई कोर्ट ने प्रथमदृष्टया यह पाया था कि केजरीवाल और अन्य को बरी करते समय ट्रायल कोर्ट द्वारा की गई कुछ टिप्पणियां ‘गलत’ थीं। कोर्ट ने सीबीआई अधिकारी के खिलाफ की गई प्रतिकूल टिप्पणियों पर भी रोक लगा दी थी और ट्रायल कोर्ट में चल रही ईडी के केस की कार्यवाही को भी टाल दिया था। इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामले में 9 मार्च को हुई पिछली सुनवाई में सीबीआई की दलीलें सुनने के बाद केजरीवाल समेत सभी 23 आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
सीबीआई की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने बताया कि सभी प्रतिवादियों को पहले ही नोटिस दिया जा चुका था और नोटिस जारी होने के बाद भी उन्हें सूचित किया गया है। इस पर बेंच ने प्रतिवादियों से पूछा कि क्या किसी ने भी अपना जवाब दाखिल नहीं किया है? क्या आप और समय चाहते हैं? प्रतिवादियों ने कहा, ‘हां’ उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए कुछ और मोहलत चाहिए।
केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई एसएलपी
अरविंद केजरीवाल की तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट एन. हरिहरन ने कहा कि यह 500 पन्नों का आदेश है। सिर्फ इसलिए कि यह आदेश उनके पक्ष में नहीं है, वो इसे गलत बता रहे हैं। हमें जवाब दाखिल करने के लिए उचित समय दिया जाना चाहिए। केजरीवाल के वकील ने कहा कि जब यह कहा कि हमने सुप्रीम कोर्ट में एक SLP (विशेष अनुमति याचिका) दाखिल की है। एसजी तुषार मेहता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि अगर केस को टालने का यही आधार है तो आपत्तियों को दूर करके केस को सुनवाई के लिए लिस्ट किया जाना चाहिए। इस हरिहरन ने कहा कि मैं सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री का इंचार्ज नहीं हूं।
एसजी ने कहा कि यह कोई ऐसा मामला नहीं है जिसमें जवाब या जवाबी हलफनामा दाखिल करना जरूरी हो, क्योंकि हमें सिर्फ विवादित आदेश और केस के रिकॉर्ड को ही देखना है। यह एक असाधारण आदेश है। इसे रिकॉर्ड में एक पल के लिए भी और नहीं रखा जा सकता।
सीबीआई ने आरोपियों को वक्त देने का किया विरोध
बेंच ने कहा कि उन्हें अपना जवाब दाखिल करने दीजिए। इस पर एसजी ने कहा कि मैं कोर्ट से गुजारिश करूंगा कि उन्हें एक हफ्ते से अधिक का समय न दिया जाए। किसी को बरी करने के मामले में सिर्फ केस के रिकॉर्ड को ही देखा जाता है। यह पूरी तरह से गलत है और मैं इसका विरोध करता हूं।
इसके बाद बेंच ने कहा कि केस को दो हफ्ते बाद लिस्ट किया जाए और प्रतिवादी दो हफ्ते के अंदर अपना जवाब दाखिल करें। जस्टिस शर्मा ने केजरीवाल के वकील से कहा कि मैंने अपने आदेश में यह दर्ज कर लिया है कि आपने याचिका दाखिल की है और यह भी कि आपने मुझे इस बारे में सूचित किया है।
6 अप्रैल तक अंतरिम आदेश जारी रहेंगे
एसजी तुषार मेहता ने कहा कि अब तो यह एक चलन सा बन गया है। ये लोग आरोप लगाते हैं और फिर भाग खड़े होते हैं। ऐसे मुकदमों को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। इन्होंने तो सिर्फ आरोप लगाकर ही अपना करियर बना लिया है। इस पर हरिहरन ने उनसे पूछा कि कैसे आरोप? हम तो सिर्फ जवाब दाखिल करने के लिए थोड़ा और समय मांग रहे हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले की सुनवाई 6 अप्रैल को करेगी और तब तक अंतरिम आदेश जारी रहेंगे।
क्या है मामला
गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीआई की उस याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल, पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को बरी करने वाले ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है।
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Ratan Guptaरतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।
रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।
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रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।
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