PFI पर युद्ध छेड़ने के आरोप तय; आरोपियों को ट्रायल का सामना करने का आदेश
दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने कथित आतंकी साजिश मामले में पीएफआई और उसके 20 पदाधिकारियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। कोर्ट ने सभी आरोपियों को ट्रायल का सामना करने का निर्देश दिया।

प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से जुड़े कथित आतंकी साजिश मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने बड़ा कदम उठाते हुए PFI और उसके 20 पदाधिकारियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। विशेष एनआईए अदालत ने शनिवार को पीएफआई और उसके 20 पदाधिकारियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय करते हुए सबको ट्रायल का सामना करने का निर्देश दिया। वहीं सभी आरोपियों ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है।
विशेष एनआईए जज प्रशांत शर्मा की अदालत ने शनिवार को इस मामले को ट्रायल के लिए लिस्ट किया। आरोपियों में पीएफआई के संस्थापक अध्यक्ष ई. अबूबकर और चेयरमैन ओएमए सलाम शामिल हैं। इन पर देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने, आपराधिक साजिश रचने, आतंकी गतिविधियों के लिए फंड जुटाने, आतंकी कैंप लगाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। सभी आरोप यूएपीए की विभिन्न धाराओं के तहत हैं।
इन आरोपियों को सितंबर 2022 में PFI के खिलाफ देशव्यापी कार्रवाई के दौरान दबोचा गया था। विशेष अदालत ने पीएफआई के साथ 20 आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए। अदालत ने मामले को ट्रायल के लिए लिस्ट कर दिया है। एनआईए 29 जुलाई से ट्रायल के दौरान सबूत पेश करना शुरू करेगी। NIA की ओर से स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर राहुल त्यागी और असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर जतिन खत्री एवं अमित रोहिल्ला पेश हुए।
निशाने पर थे आरएसएस नेता
एनआईए ने जांच पूरी करने के बाद पीएफआई समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ मुख्य आरोपपत्र और पूरक आरोपपत्र अदालत में दाखिल किए हैं। एनआईए का आरोप है कि पीएफआई के नेता युवाओं को कट्टरपंथी बना रहे थे। आरोपी देश का अमन चैन खत्म करने के लिए समुदायों के बीच वैमनस्य बढ़ा रहे थे। आरोपी कुछ प्रमुख आरएसएस नेताओं को निशाना बनाने की साजिच रच रहे थे। अदालत ने माना कि आरोप बेहद गंभीर हैं।
रिकॉर्ड पर मौजूद सबूत गंभीर
विशेष एनआईए जज प्रशांत शर्मा की अदालत ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूत से प्रथम दृष्टया यह गंभीर आशंका बनती है कि आरोपी, पीएफआई और उसकी राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद देश की लोकतांत्रिक सरकार को उखाड़ फेंकने की साजिश में शामिल थे। आरोपी देश में शरिया कानून लागू करने की योजना बना रहे थे।
इन धाराओं में दर्ज किया था केस
एनआईए ने गृह मंत्रालय के निर्देश पर 13 अप्रैल 2022 को इस केस को दर्ज किया था। यह मामला आईपीसी 1860 की धारा 120-B और 153-A और गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), 1967 की धारा 17, 18, 18-B, 20, 22-B, 38 और 39 के तहत अपराधों के लिए दर्ज किया गया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एनआई को पूरे प्रकरण की जांच अपने हाथ में लेने का निर्देश दिया था।
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