कहीं नल सूखे, तो कहीं काला बदबूदार पानी; 45 डिग्री वाली गर्मी में दिल्ली के इन इलाकों का हाल बेहाल
South Delhi Water Crisis: कई घरों में पीने-नहाने लिए पानी नहीं है। कुछ घरों में नलों से काला बदबूदार पानी बह रहा है। सैकड़ों लोगों के लिए गर्मी अब सिर्फ परेशानी नहीं है, बल्कि यह जिंदा रहने की लड़ाई बन गई है।

South Delhi Water Crisis: दिल्ली समेत पूरा उत्तर भारत भीषण गर्मी की चपेट में है। 45 डिग्री की चिलचिलाती गर्मी में राजधानी के पॉश इलाके में गिने जाने वाले हिस्से साउथ दिल्ली में पानी का संकट पैदा हो गया है। कई घरों में पीने-नहाने लिए पानी नहीं है। कुछ घरों में नलों से काला बदबूदार पानी बह रहा है। सैकड़ों लोगों के लिए गर्मी अब सिर्फ परेशानी नहीं है, बल्कि यह जिंदा रहने की लड़ाई बन गई है।
पानी की समस्या से जूझ रही साउथ दिल्ली
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिणपुरी के ब्लॉक 10 और 11 और आस-पास के इलाकों में नल सूख गए हैं। परिवार पानी की एक-एक बाल्टी के लिए जूझ रहे हैं। बच्चे रोज की जरूरतों को पूरा करने के लिए दूर-दराज के इलाकों से पानी भरे कंटेनर ला रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह मुश्किल अब सिर्फ परेशानी तक ही सीमित नहीं है। कई परिवारों के लिए इतनी ज़्यादा गर्मी में नहाना, खाना बनाना और सफाई जैसे बुनियादी काम भी मुश्किल हो गए हैं।
साउथ दिल्ली के कई इलाके प्रभावित
दक्षिणपुरी और देवली के अलावा, संगम विहार, अंबेडकर नगर, खानपुर, टिगरी, मदनगीर, तुगलकाबाद एक्सटेंशन, कालकाजी के कुछ हिस्सों और बदरपुर बॉर्डर के पास की कॉलोनियों से भी पानी की भारी कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं।
बिना नहाए जा रहे स्कूल-ऑफिस
स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद हफ्तों से पानी की कमी बनी हुई है। लोगों ने बताया, यहां एक महीने से ज्यादा समय से पानी की दिक्कत है, लेकिन कोई सुन नहीं रहा है। कई परिवारों का कहना है कि लोग बिना नहाए ऑफिस जा रहे हैं, जबकि बच्चों को ऐसे ही हालात में स्कूल भेजा जा रहा है, क्योंकि पानी बिल्कुल नहीं मिल रहा है। महिलाएं, बुज़ुर्ग लोग और मरीज सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं, क्योंकि घरों में पानी बहुत कम या बिल्कुल नहीं होने से रोज के काम करने में मुश्किल हो रही है।
घरों में आ रहा काला और बदबूदार पानी
जिन घरों में पानी आ रहा है, उनमें से कुछ घरों में काले रंग का पानी आ रहा है। लोगों ने बताया कि इस काले रंग के पानी में तेज बदबू भी आ रही है। बदबू इतनी तेज कि घर के अंदर खड़ा होना मुश्किल हो गया था। स्थानीय लोगों ने दावा किया कि पानी नाले के पानी जैसा था और घर में इस्तेमाल के लिए भी ठीक नहीं था।
प्राइवेट टैंकर आते, कीमत 1500 रुपये
इलाके के लोग दूर-दूर से पानी लाने को मजबूर हो गए हैं। बच्चे अपने परिवारों की मदद करने के लिए कंधों पर पानी के कैन ढोते देखे गए। लोगों का कहना है कि सरकार ने भरोसा दिलाया था कि राजधानी में पानी की कोई कमी नहीं होगी, जहां भी जरूरत होगी, टैंकर सप्लाई का इंतजाम किया जाएगा। हालांकि, स्थानीय लोगों का दावा है कि इलाके में पहुंचने वाले ज्यादातर टैंकर प्राइवेट तौर पर चलाए जाते हैं। हर ट्रिप के लिए लगभग 1,500 रुपये चार्ज करते हैं। एक व्यक्ति ने बताया, टैंकर आते हैं मगर वे प्राइवेट होते हैं। गरीब परिवार इतने पैसे नहीं दे सकते।
लेखक के बारे में
Ratan Guptaरतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।
रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।
लाइव हिंदुस्तान में बीते 2 साल से काम करते हुए रतन ने ब्रेकिंग न्यूज, राजनीतिक घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था से जुड़ी खबरों पर लगातार लेखन किया है। इसके साथ ही वह एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं, जहां जटिल मुद्दों को सरल और तथ्यपरक भाषा में पाठकों के सामने रखते हैं।
रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।
इसके साथ ही आईआईएमसी की एकेडमिक पढ़ाई ने उन्हें रिपोर्टिंग, न्यूज प्रोडक्शन, मीडिया एथिक्स और पब्लिक अफेयर्स की गहरी समझ दी है। इसका सीधा असर उनके लेखन की विश्वसनीयता और संतुलन में दिखाई देता है।
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