मकान के लिए मां-बाप को मार डाला, दम निकलने तक पीटते रहे दोनों बेटे
माता-पिता ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि जिन बेटों को उन्होंने पाल-पोसकर बड़ा किया, वही उनकी जान ले लेंगे। गाजियाबाद में ऐसी ही एक घटना सामने आई है। मकान की लालच में दो बेटों ने मिलकर अपने जन्मदाताओं को ही मौत के मुंह में पहुंचा दिया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

जिन माता-पिता ने बेटों को पाल-पोसकर बड़ा किया, उन्होंने ही सोमवार देर रात पीट-पीटकर उनकी हत्या कर दी। दोनों भाई माता-पिता पर मकान अपने नाम कराने का दबाव बना रहे थे। घटना से एक दिन पहले भी इस बात को लेकर झगड़ा हुआ था। माता-पिता दोनों की बेरोजगारी और शराब की लत का भी विरोध करते थे। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के मुताबिक, गाजियाबाद के भीमनगर गली नंबर-10 निवासी 58 साल के गंगाशरण पत्नी विमलेश और बड़े बेटे दीपक उर्फ विक्की के साथ रहते थे, जबकि छोटा बेटा ललित पास में किराये पर रहता था। गंगाशरण दूध बेचने के अलावा अखबार बांटते थे। दोनों बेटे कैब चालक थे, मगर नशे की लत के कारण घर पर ही रहते थे। सोमवार रात दोनों की माता-पिता से कहासुनी हुई, जिसके बाद उन्होंने वारदात की।
पिता के शरीर पर चोट के निशान
दंपति की बेटी ज्योति ने पुलिस को बताया कि दोनों भाई शराब पीने के बाद आए दिन माता-पिता के साथ मारपीट और गाली-गलौज करते थे। घरेलू कलह से परेशान होकर दोनों की पत्नियां भी अपने मायके चली गई थीं। सोमवार को ललित का जन्मदिन था, जिसकी पार्टी भी हुई थी। इस दौरान दोनों भाइयों का माता-पिता से झगड़ा हुआ। पुलिस के अनुसार, गंगाशरण के शरीर पर चोट के निशान मिले हैं, जबकि विमलेश की मौत दम घुटने से होने की आशंका है।
सिर पटकने से टाइल्स तक टूट गईं
आरोपियों ने पहले घर का मुख्य गेट और सीढ़ियों का दरवाजा बंद किया। इसके बाद दम निकलने तक माता-पिता पर लात-घूंसों से पीटा। पिता का सिर इतनी बेरहमी से पटका गया कि टाइल्स तक टूट गईं। दूसरी मंजिल पर रहने वाले किराएदार को शक होने पर उसने पुलिस को सूचना दी।
मकान के लिए हुआ था झगड़ा
माता-पिता उन्हें रोजगार करने, जिम्मेदारी निभाने और शराब छोड़ने के लिए समझाते थे। जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों भाई माता-पिता पर मकान अपने नाम कराने का दबाव भी बना रहे थे। घटना से एक दिन पहले भी इस बात को लेकर झगड़ा हुआ था। मृतका विमलेश के भाई लेखराज निवाली हेतलपुर अलीगढ़ ने बताया कि परिवार में बड़ी बेटी दीपिका, बेटे दीपक उर्फ विक्की और ललित तथा सबसे छोटी बेटी ज्योति हैं। चारों की शादी हो चुकी है। दीपक की पत्नी मोनिका और ललित की पत्नी सोनी अपने-अपने मायके में रह रही हैं। दीपक के दो बेटे हैं।
जन्मदिन पर कीर्तन कराया
सोमवार को ललित का जन्मदिन था। माता-पिता ने दिन में कीर्तन कराया था, जिसमें मोहल्ले की महिलाएं शामिल हुई थीं। रात में जन्मदिन की पार्टी हुई, जिसमें दोनों भाइयों ने शराब पी। पार्टी के बाद काम-धंधा, नशे की आदत और मकान को लेकर विवाद शुरू हो गया।
बोले, मम्मी-पापा झगड़ रहे हैं
वारदात के समय दूसरी मंजिल पर रहने वाले किरायेदार जगबीर को चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। पूछने पर बताया कि माता-पिता आपस में झगड़ रहे हैं। काफी देर तक हलचल न होने पर उसे अनहोनी की आशंका हुई और उसने डायल-112 पर सूचना दे दी। परिजनों ने आरोप लगाया है कि मामले में दोनों भाइयों के अलावा एक किशोर भी शामिल था। हालांकि, पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है। कार्यवाहक डीसीपी सिटी सुरेंद्र नाथ तिवारी ने बताया कि गंगाशरण के सिर पर गंभीर चोट के निशान मिले हैं, जबकि विमलेश के शरीर पर बाहरी चोट के स्पष्ट निशान नहीं हैं। आशंका जताई जा रही है कि उनकी हत्या गला दबाकर की गई।
बेटियां बोलीं- उन्हें भी वैसी ही सजा मिले
हत्या का पता चलते ही मृतक दंपती की दोनों बेटियां घर पहुंचीं। उन्होंने रोते-बिलखते हुए कहा कि जिन्होंने मां-बाप को इतनी बेरहमी से मार डाला, उन्हें भी वैसी ही सजा मिले। वहीं, मृतक गंगाशरण के साले लेखराज ने भी दोनों के लिए फांसी की मांग की। परिजनों ने बताया कि आरोपी भाइयों की नशे की आदतों से परेशान होकर पत्नियां भी उन्हें छोड़कर मायके चली गई थीं। इसके बावजूद दोनों की आदतों में कोई सुधार नहीं आया।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
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