मेरे साथ कमरे में रहती है पुलिस, शीशे से भी झांकती है: सोनम वांगचुक की पत्नी
सोनम वांगचुक की पत्नी का कहना है कि सरकार का ये कहना कि उन्हें वांगचुक के स्वास्थ्य की चिंता है, केवल नौटंकी है। उनका दावा है कि अस्पताल का माहौल जेल जैसा है जहां पुलिस लगातार उन पर नजर रखती है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने सोनम वांगचुक को प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने की उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा है कि सरकार ने जो भी किया, उसे जबरदस्ती नहीं कह सकते। कोर्ट के फैसले के बाद अंजली आंग्मो ने वांगचुको को अस्पताल में शिफ्ट किए जाने के पूरे घटनाक्रम को नौटंकी करार दिया है। गीतांजलि आंग्मो ने कहा, सरकार ने कहा कि वे उन्हें इसलिए ले गए क्योंकि उन्हें उनकी गिरती सेहत की बहुत चिंता थी। लेकिन ये दावे गलत हैं। इसी के साथ उन्होंने पुलिस पर सोनम वांगचुक पर दिनभर नजर रखने का आरोप भी लगाया है।
आंग्मो ने कहा, सबसे पहली बात, उनकी सेहत बिल्कुल भी खराब नहीं हो रही थी। अगर आप पिछली शाम की रिपोर्ट देखें, तो सब कुछ बिल्कुल सामान्य था। उनका पोटैशियम लेवल 4.3 था और बाकी सभी पैरामीटर भी सामान्य थे। अगर आपको सच में उनकी सेहत की इतनी चिंता थी, तो आपने सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी क्यों भेजे? आपने इतनी बेरहमी से उन्हें क्यों उठाया, स्ट्रेचर पर लिटाया और ले गए? आप बस मेडिकल टेस्ट करने आ सकते थे और उनके परिवार को बता सकते थे कि कोई लेवल कम है और आप उन्हें इसी वजह से ले जाना चाहते हैं। लोकतंत्र में चीजों को संभालने का यही सही तरीका है।
'जोधपुर जेल जैसा माहौल'
उन्होंने आगे कहा कि उनका ये दावा कि वह उनकी सेहत के लिए चिंतित थे, केवल एक नौटंकी है। उन्हें बस इस बात का डर था कि अगर सोनम अपनी मार्च शुरू करते हैं, तो लाखों लोग उनके साथ जुड़ जाएंगे। न सिर्फ़ दिल्ली में, बल्कि पूरे देश में और वे इसी को रोकना चाह रहे थे। हम उन्हें अपनी पसंद के डॉक्टरों के पास ले जाना चाहते हैं, जहां हमें सहज महसूस हो। कल रात को उनका बीपी 125/85 था जो हमेशा 110 रहता है। ऐसा माहौल वहां बनाया जा रहा है। कमरे से बाहर निकलो तो पुलिस है। शीशे स दिनभर पुलिस अंदर देखती रहती है। कई बार मैं अंदर होती हूं तो वहां एक पुलिस कॉन्सटेबल खड़ी रहती है। मुझे ये बिल्कुल जोधपुर जेल जैसा माहौल लग रहा है। मुझे फोन नहीं ले जाने दिया जाता। सोनम को उनका टैब चाहिए था लेकिन वो भी नहीं ले जाने दिया। इन सब चीजों के लिए उनके पास कोई लिखित आदेश भी नहीं है।
दिल्ली हाई कोर्ट का क्या आदेश?
सोनम वांगचुक के सफदरजंग अस्पताल में जारी इलाज के मामले में दखल देने से इनकार कर दिया। जस्टिस मिनी पुष्करणा ने कहा कि इस चरण में सोनम वांगचुक को निजी अस्पताल में शिफ्ट करने संबंधी उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो की याचिका पर किसी अंतरिम आदेश की जरूरत नहीं है। मामले की अगली सुनवाई 24 जुलाई को होगी।
शनिवार को भूख हड़ताल के 21वें दिन दिल्ली पुलिस वांगचुक को जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले गई थी। वांगचुक 28 जून से नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और परीक्षा रद्द होने के बाद कई छात्रों द्वारा आत्महत्या किए जाने के विरोध में भूख हड़ताल कर रहे थे।नरविवार को विशेष सुनवाई के दौरान जस्टिस पुष्करणा ने कहा कि सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टर वांगचुक की लगातार निगरानी कर रहे हैं, और यह नहीं कहा जा सकता कि उनके खिलाफ किसी प्रकार की जबरदस्ती की जा रही है। जस्टिस ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल ले जाए जाने की कार्रवाई को मनमाना नहीं कहा जा सकता।
जस्टिस पुष्करणा ने यह भी गौर किया कि वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो, उनके भाई और रिश्तेदारों को उनसे 24 घंटे मिलने की अनुमति दी गई है। अदालत ने वांगचुक को निजी अस्पताल में शिफ्ट करने के अनुरोध वाली आंग्मो की याचिका पर केंद्र सरकार, सफदरजंग अस्पताल और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया।
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Aditi Sharmaअदिति शर्मा
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